सामाजिक विकास
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के विश्व सामाजिक सुरक्षा रिपोर्ट 2020-22 के अनुसार भारत में केवल 24-4 प्रतिशत लोगों को ही किसी न किसी सामाजिक योजना के तहत कवर किया गया है, जो बांग्लादेश के औसत (28.4 प्रतिशत) से भी कम है।
भारत के सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रति व्यत्तिफ़ ळक्च् के 5 प्रतिशत से भी कम है। नागरिकों के सामाजिक कल्याण जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा आदि जैसे प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही मानव विकास के दीर्घकालिक लक्ष्यों और ‘‘सबका साथ, सबका विकास’’ पर ध्यान केंद्रित करना प्रमुख हो गया है।
नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 ने स्वास्थ्य तथा अन्य सामाजिक क्षेत्रें में सरकारी कार्यक्रमों के उत्साहजनक परिणाम दिखाए। कुल जन्म दर (टीएफआर) वर्ष 2015-16 में 2-2 से घटकर वर्ष 2019-21 में 2 हो गई। स्वास्थ्य अवसंरचना तथा जनता तक पहुंचने वाली सेवाओं में उल्लेऽनीय सुधार देखा गया। आर्थिक समीक्षा 2022-23 के अनुसार सामाजिक सेवाओं के कुल व्यय में स्वास्थ्य पर खर्च का हिस्सा 21 प्रतिशत से बढाकर वित्त वर्ष 23 (बीई) में 26 प्रतिशत हो गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में 2025 तक सरकार के स्वास्थ्य व्यय को मौजूदा 1.2 प्रतिशत से बढाकर सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत करने की सिफारिश की है। केंद्रीय बजट 2023-24 का मुख्य विषय समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करना है जो विशेष रूप से सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा को प्रोत्साहित करता है, जिसमें किसान, महिला, युवा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दिव्यांगजन (PwD) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) शामिल हैं।
भारत में सामाजिक सुरक्षा एक मूल अधिकार नहीं है, किन्तु एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते राज्य के नीति निदेशक तत्वों, जैसे अनुच्छेद 41, 42 और 47 का पालन करते हुए सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना राज्य का कर्तव्य है। चूंकि श्रम समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा एवं सामाजिक सहायता संबंधी लाभ प्रदान करना केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों का भी कर्तव्य है।
महिला विकास
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- ग्रामीण महिला श्रम बल भागीदारी दर (एफएलएफपीआर) में वर्ष 2018-19 में 19-7 प्रतिशत से वित्त वर्ष 2020-21 में 27-7 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- बजट 2023-24 के प्रावधानों के अनुसार आजादी का अमृत महोत्सव के स्मरणस्वरूप, मार्च 2025 तक दो वर्ष की अवधि के लिए एककालिक नई लघु बचत योजना, महिला सम्मान बचत प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जो महिलाओं या बालिकाओं के नाम पर आंशिक आहरण विकल्प के साथ 2 वर्ष की अवधि के लिए 7-5 प्रतिशत की नियत ब्याज दर पर 2 लाख रुपए तक की जमा सुविधा का प्रस्ताव देगा।
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के अनुसार भारत में लिंगानुपात 1020 हो गई है, जबकि 2020-21 में जन्म के समय लिंगानुपात बढ़कर 937 हो गया है। इसके साथ ही मातृ मृत्यु दर वर्ष 2011-13 के 167 से घटकर वर्ष 2017-19 में 103 रह गई है।
- देश के विकास में जेंडर समानता के मुद्दे को मुख्य स्थान दिया गया है। यह धारणा तय सतत विकास लक्ष्यों के माध्यम से प्रतिबिंबित होती है, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘हमारी बदलती दुनियाः 2030 सतत विकास का एजेन्डा’ के रूप में जाना जाता है।
- जेंडर समानता को बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने नवंबर 2021 में महिलाओं को सामाजिक और संवैधानिक समानता प्रदान करते हुए हिंदू मैरिज ऐक्ट, 1955 के सेक्शन 5 (प्प्प्), स्पेशल मैरिज ऐक्ट, 1954 और बाल विवाह निषेध ऐक्ट, 2006 में बदलाव करने का प्रस्ताव पारित किया है। भारतीय संविधान में लैंगिक समानता का सिद्धांत प्रतिष्ठापित है।
बाल विकास व संरक्षण
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में बच्चों और किशोरों के लिए अलग-अलग क्षेत्रें, भाषाओं, विषयों और स्तरों में गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें विभिन्न उपकरणों के माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय की स्थापना का प्रावधान किया गया।
- बजट 2023-24 में राज्यों को उनके लिए पंचायत तथा वार्ड स्तरों पर प्रत्यक्ष पुस्तकालय स्थापित करने और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय संसाधनों तक पहुँच बनाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है।
- आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार , बाल मृत्यु दर (Infant Mortality Rate - IMR), 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर (Under Five Mortality Rate - U5MR) और नवजात शिशु मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate - NMR) में गिरावट दर्ज की गई है।
- हाल ही में श्रम पर संसद की स्थायी समिति को सूचित किया गया था कि केंद्र के पास बाल श्रम पर कोई नया डेटा उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 5-14 वर्ष की आयु के 10-1 मिलियन कामकाजी बच्चे हैं, जो बाल श्रम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।
- तात्कालिक अधिकार (नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार): ऐसे अधिकार होते हैं, जो तुरंत अमल में लाना जरूरी होता है। इसमें भेदभाव, सजा, मुकदमें में निष्पक्ष सुनवाई, बच्चों के लिए अलग न्याय की व्यवस्था का अधिकार, जीवन का अधिकार, राष्ट्रीयता का अधिकार और दोबारा परिवार के साथ रहने का अधिकार शामिल हैं।
ट्रांसजेंडर
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- केंद्रीय बजट 2023-24 में ट्रांसजेंडर व्यत्तिफ़यों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास की घोषणा की गई है। इसमें वितीय वर्ष 2022-23 की तुलना में 76% की वृद्धि की गई। वितीय वर्ष 2022-23 में जहां 30 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था वहीं वितीय वर्ष 2023-24 में 52.91 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है।
- सामाजिक कलंक के कारण और उन्हें कोई सुरक्षा प्राप्त नहीं होने के कारण, उनके लिए संसद द्वारा ट्रांसजेंडर व्यत्तिफ़ अधिनियम, 2019 पारित किया गया है। यह अधिनियम इस समुदाय को ‘तीसरे लिंग’ के रूप में मान्यता प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण बनाम भारत का संघ में उच्चतम न्यायालय ने इस समुदाय को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के रूप में माना है। ट्रांसजेंडर व्यत्तिफ़यों के लिए भेदभाव धर्म पर आधारित नहीं है; बल्कि जन्म से उनके लैंगिक व्यवहार को ‘संदूषण’ और ‘अशुद्धता’ के रूप में देखे जाने पर अधिक आधारित है।
- वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में कुल 4,87,803 ऐसे लोग थे जिनकी न तो ‘महिला’ के रूप में पहचान की जा सकती थी और न ही ‘पुरुष’ के रूप में।
- ट्रांसजेंडर व्यत्तिफ़यों को मताधिकार 1994 में ही मिल गया था, परंतु उन्हें मतदाता पहचान-पत्र जारी करने का कार्य पुरुष और महिला के प्रश्न पर उलझ गया।
वरिष्ठ नागरिक
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के लिए अधिकतम जमा सीमा को 15 लाख रुपए से बढाकर 30 लाख रूपए करने का प्रावधान किया गया है।
- बजट 2023-24 के अनुसार मासिक आय खाता स्कीम के लिए अधिकतम जमा सीमा को एकल खाते के लिए 4-5 लाख रूपए से बढाकर 9 लाख और संयुत्तफ़ खाते के लिए 9 लाख रूपए से बढाकर 15 लाख कर दिया जाएगा।
- विकसित देशों में जहाँ पर जीवन संभाव्यता अपेक्षाकृत अधिक है, वहां लोग 65 वर्ष की आयु पार करने के बाद ही वृद्ध की श्रेणी में आते हैं, परन्तु विकासशील देशों में जैसे कि भारत में जहाँ पर अपेक्षाकृत कम जीवन संभाव्यता है, वहां 60 वर्ष की आयु को वृद्ध माना जाता है। इन दोनों ही मामलों में वृद्ध की परिभाषा अस्पष्ट है। वृद्ध होना एक जटिल और क्रमिक प्रक्रिया है; जिसमें जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक आयाम होते हैं।
- संयुत्तफ़ राष्ट्र जनसंख्या कोष और हेल्पएज इण्डिया द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 तक वृद्ध नागरिकों की संख्या बढ़कर 173 मिलियन हो जाने का अनुमान है।
- 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लगभग 10.4 करोड़ वृद्ध नागरिक (60 वर्ष या उससे अधिक) हैं, जिनमें 5.3 करोड़ महिलाएं और 5.1 करोड़ पुरुष हैं। वृद्ध लोगों में 71 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रें में, जबकि 29 प्रतिशत शहरी क्षेत्रें में निवास करती हैं।
- वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में व्यापक रूप से वृद्धजन निर्भरता अनुपात 14.2 प्रतिशत है, जिसमें वृद्ध महिलाओं और पुरुषों में यह निर्भरता अनुपात क्रमशः 14.9 प्रतिशत और 13.6 है। भारत में सर्वाधिक वृद्ध जनसंख्या वाला राज्य केरल (12.6 प्रतिशत) है। इसके उपरांत गोवा (11.2 प्रतिशत) और तमिलनाडु (10.4 प्रतिशत) का स्थान है, जबकि शहरी क्षेत्रें की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रें में कुल आबादी में वृद्धजनों की आबादी की सर्वाधिक प्रतिशतता हिमाचल प्रदेश (92.36 प्रतिशत) है। इसके बाद बिहार (89.11 प्रतिशत) और अरुणाचल प्रदेश (88.56 प्रतिशत) का स्थान आता है।
दिव्यांगजन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत दिव्यांगजनों के अधिकारों पर संयुत्तफ़ राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीआरपीडी) और सतत् विकास लक्ष्य का एक समर्थक (पार्टी) है।
- वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 2-68 करोड़ दिव्यांगजन हैं (जो कि कुल जनसंख्या का 2.21 प्रतिशत है)। कुल दिव्यांगजनों में से 1.50 करोड़ पुरुष और 1.18 करोड़ महिलाएं हैं। इनमें दृष्टि, श्रवण, वाक और गतिविषयक दिव्यांगताएं, मानसिक रूग्णता, मानसिक मंदता (बौद्धिक दिव्यांगताएं), बहु-दिव्यांगताएं तथा अन्य दिव्यांगताएं शामिल हैं।
- सरकार ने दिव्यांग व्यत्तिफ़यों के उत्थान के लिए ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में एक दिव्यांगता खेल केंद्र (सैंटर फॉर डिसेबिलिटी स्पोर्ट्स) को स्थापित कर रही है।
अनुसूचित जाति व जनजाति
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (Particularly Vulnerable Tribal Groups - PVTG) की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार हेतु प्रधानमंत्री PVTG विकास मिशन शुरू किया जाएगा।
- बजट 2023-24 में, केंद्र सरकार द्वारा अगले तीन वर्षों (2026 तक) में 3.5 लाख आदिवासी छात्रें की सेवा करने वाले 740 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के लिये 38,800 शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती का प्रावधान किया गया है।
- इससे च्टज्ळ परिवारों और बस्तियों को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल तथा स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण, सड़क तथा दूरसंचार कनेक्टिविटी और स्थायी आजीविका के अवसरों तक बेहतर पहुंच जैसी बुनियादी सुविधाओं का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।
- अनुसूचित जनजातियों के लिये विकास कार्ययोजना के तहत अगले 3 वर्षों में मिशन को लागू करने के लिये 15,000 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
- वर्ष 1931 की जनगणना में, पहली बार जातियों को व्यवस्थित रूप से दलित वर्गों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इसके पश्चात, भारत सरकार अधिनियम 1935 में पहली बार सामाजिक रूप से वंचित जातियों को अनुसूचित जातियों के रूप में अधिसूचित करने की व्यवस्था की गई थी। तद्नुसार ऐसी जातियों की एक सूची भारत सरकार (अनुसूचित जाति) आदेश, 1936 में अधिसूचित की गई थी।
अल्पसंख्यक वर्ग
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में अल्पसंख्यक समुदाय के पासमंदा समाज को प्रशिक्षित करने का प्रावधान किया गया है। बजट में 3097 60 करोड़ रु- अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए आवंटित किये गये हैं।
- इसके अतरित्तफ़ बजट में प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। यह एक विशेष क्षेत्र विकास कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य चयनित अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रें में विकास करना और वहां की कमियों को दूर करना है।
- मदरसों में आधुनिक विषयों को शामिल करने, शिक्षक प्रशिक्षण और अल्पसंख्यक संस्थानों में स्कूल की बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता के रूप में बजट में विशेष व्यवस्था की गई है।
पिछड़ा वर्ग
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) जिनकी संख्या हमारी जनसंख्या की अनुमानतः लगभग आधी है, सदियों से सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए हैं। पिछड़े वर्ग में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा, ऐसे वर्ग या नागरिक शामिल हैं, जिन्हें केंद्र सरकार ऐसे नागरिक वर्गों के पक्ष में नौकरियों में आरक्षण देने के प्रयोजनार्थ समय-समय पर तैयार की गई सूचियों में विनिर्दिष्ट करती है।
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की उन्नति के लिए प्रावधान करने हेतु सरकार सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में संशोधन किया है। इसके तहत सरकार नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सभी पदों पर 10 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान कर सकती है।
गरीबी
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में वित्त मंत्री ने अंत्योदय योजना के तहत गरीबों के लिए मुफ्रत खाधान्न की आपूर्ति को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है।
- इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 2 लाख करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
- वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2022 में भारत में गरीबी वर्ष 2005-06 के 55.1% से घटकर वर्ष 2019-21 में 16.4% रह गई है।
- राष्ट्रीय स्तर पर 2005-06 से 2015-16 की 8.1 प्रतिशत की तुलना में 2015-16 से 2019-21 तक सापेक्ष कमी 11-9 प्रतिशत है, जो सर्वाधिक है।
- भारत में ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी वर्ष 2015-16 में 36.6 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2019-2021 में 21.2 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्र में 9.0 प्रतिशत से घटकर 5.5 प्रतिशत रह गई है।
- वर्ष 2005-06 से लेकर 2019-21 के दौरान भारत में 415 मिलियन लोग गरीबी से बाहर निकलने में सफल रहे।
शिक्षा
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- वित्त वर्ष 2022-23 (संशोधित अनुमान) से वित्त वर्ष 2023-24 में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के बजट आवंटन में 9752.07 करोड़ रुपये (16.51%) की कुल बढ़ोतरी हुई है।
- बजट अनुमान 2023-24 में उच्च शिक्षा के लिए 44,094.62 करोड़ रुपये दिए गए हैं। संशोधित अनुमान 2022-23 के 40,828-35 करोड़ रुपये की तुलना में ये 8% की वृद्धि है।
- बजट 2023-24 में, अगले तीन वर्षों में लाखो युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना 4.0 शुरू करने का प्रावधान किया गया है। ऑन जॉब प्रशिक्षण, उद्योग साझीदार और उद्योग की जरूरतों के साथ पाठयक्रमों के संरेखन पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं को अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए कौशल प्रदान करने हेतु अलग-अलग राज्यों में 30 स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।
- बजट 2023-24 में अखिल भारतीय राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत तीन वर्षों में 47 लाख युवाओं को वृत्तिका सहायता प्रदान करने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर शुरू करने का प्रावधान किया गया है।
- देश में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान विकसित किए जाएंगे जो शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए सर्वाेत्कृष्ट संस्थान होंगे।
- भूगोल, भाषा सहित कई क्षेत्रें में उत्कृष्ट पुस्तकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल बाल एवं किशोर पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी।
- शिक्षा मंत्रलय द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के सहयोग से 7-9 जुलाई 2022 को वाराणसी में तीन दिवसीय अिऽल भारतीय शिक्षा समागम का आयोजन किया गया। बच्चों में कक्षा तीन के अंत तक बुनियादी पाठ पढ़ने एवं समझने और गणित के बुनियादी सवालों को हल करने की क्षमता के विकास से सम्बंधित है।
- शिक्षा पूर्ण मानव क्षमता को प्राप्त करने, एक न्यायसंगत और न्यायपूर्ण समाज के विकास और राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए मूलभूत आवश्यकता है।
- भारत द्वारा 2015 में अपनाए गए सतत विकास एजेंडा 2030 के लक्ष्य-4 में परिलक्षित वैश्विक शिक्षा विकास एजेंडा के अनुसार विश्व में 2030 तक सभी के लिए समावेशी और समान गुणवत्तायुत्तफ़ शिक्षा सुनिश्चित करने और जीवन-पर्यंत शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा दिए जाने का लक्ष्य है।
बेरोजगारी
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- 24 जनवरी 2023 तक 6.49 करोड़ परिवारों ने मनरेगा के तहत रोजगार की मांग की और 6.48 करोड़ परिवारों को रोजगार की पेशकश की गई जबकि 5.7 करोड़ परिवारों ने रोजगार का लाभ उठाया।
- सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों के अनुसार अगस्त, 2022 में बेरोजगारी दर में 8.3 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि के बाद, सितंबर 2022 में यह घटकर 6.43 प्रतिशत हो गई।
- ग्रामीण क्षेत्रें में, बेरोजगारी दर अगस्त में 7.68 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 5.84 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रें में 9.57 प्रतिशत से गिरकर 7.70 प्रतिशत हो गई।
- भारत में बेरोजगारी की दर वर्ष 2017-18 के 4.7 प्रतिशत और वर्ष 2018-19 के 6.3 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2021 में 7.91 प्रतिशत हो गई है।
- वर्तमान में शहरी भारत देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 60 प्रतिशत से अधिक योगदान करता है और यह अनुमान है कि वर्ष 2030 तक GDP में इसका योगदान 75 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाएगा।
स्वास्थ्य
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में वर्ष 2014 से स्थापित मौजूदा 157 चिकित्सा महाविद्यालयों के साथ ही 157 नए नर्सिंग कॉलेज खोलने का प्रावधान किया गया है।
- लक्षित लाभों को सबके लिए सुलभ करने के साथ अनेक योजनाओं के कुशल कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप समावेशी विकास संभव हुआ है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 11.7 करोड़ परिवारों में शौचालय, उज्जवला के अंतर्गत 9.6 करोड़ एलपीजी कनेक्शन, 102 करोड़ लोगों का 220 करोड़ टीकाकरण, 47.8 करोड़ पीएम जन धन बैंक खाते पीएम सुरक्षा बीमा और पीएम जीवन ज्योति योजना के तहत 44.6 करोड़ व्यत्तिफ़यों के लिए बीमा कवर और पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 11.4 करोड़ से अधिक किसानों को 2.2 लाख करोड़ का नकद अंतरण किया गया है।
- 4 जनवरी, 2023 तक आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 22 करोड़ लाभार्थियों का सत्यापन किया गया है। आयुष्मान भारत के तहत देश भर में 1.54 लाख से भी अधिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्रों (Health and Wellness Centres) को चालू किया गया है।
- स्वास्थ्य क्षेत्र में, स्वास्थ्य की आधारभूत सेवाओं को मजबूत बनाने और स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में दक्षता राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) के परिणामों से देखा जा सकता है, जिसमें एनएफएचएस-4 की तुलना में एनएफएचएस-5 में अधिकांश चयनित राज्यों में शिशु मृत्यु दर और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में गिरावट आई है। परन्तु वैश्विक पोषण रिपोर्ट 2021 के अनुसार भारत में 15-49 आयु वर्ग की आधी से अधिक भारतीय महिलाएं रत्तफ़ाल्पता से पीडि़त हैं। वर्ष 2016 में 52.6 प्रतिशत महिलाएं रत्तफ़ाल्पता से पीडि़त थी, जो वर्ष 2020 में बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई है।
पोषण व खाद्य सुरक्षा
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- वित्त वर्ष 2023-24 के लिए, केंद्र ने द्य सब्सिडी के लिए 1,97,350 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों (आरई) 2,87,194.05 करोड़ रुपये की तुलना में 31.28 प्रतिशत कम है।
- वित्त वर्षों 2021-22 से 2025-26 के दौरान भारत सरकार ने 2 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों (40,000 सालाना की दर से) को सक्षम आंगनबाड़ी के तौर पर उन्नत किए जाने को भी मंजूरी दे दी है।
- वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2022 में भारत को 121 देशों की सूची में 107वां स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि वर्ष 2021 में भारत 101वें स्थान पर था।
- संधारणीय विकास लक्ष्य-2 का प्रमुख उद्देश्यः वर्ष 2030 तक भुखमरी मिटाना और सभी लोगों, विशेषकर गरीब और शिशुओं सहित लाचारी की स्थिति में रह रहे लोगों को पूरे वर्ष
- सुरक्षित, पौष्टिक तथा पर्याप्त भोजन सुलभ कराने की व्यवस्था करना है। वर्ष 2021 में भारत ने संयुत्तफ़ राष्ट्र को 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे 72 देशों का समर्थन मिला और संयुक्तराष्ट्र महासभा ने 2023 को अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के रूप में घोषित किया।
संचारी एवं गैर-संचारी रोग
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में, वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया का उन्मूलन करने के लिए एक मिशन की शुरुआत का प्रावधान किया गया है। इसमें प्रभावित जनजातीय क्षेत्रें में जागरूकता सृजन, 0-40 वर्ष के आयु वर्ग के 7 करोड़ लोगों की युनिवर्सल स्क्रीनिंग और केन्द्रीय मंत्रलयों और राज्य सरकारों के सहयोगपरक प्रयासों के माध्यम से काउंसलिंग का कार्य किया जाएगा।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान (Global Health Estimates: GHE) के अनुसार, वर्ष 2019 में गैर-संचारी रोग 74% वैश्विक मृत्युओं के लिए उत्तरदायी रहे हैं। क्षय रोग को 2025 तक समाप्त करने के भारत सरकार के विजन के अनुरूप जनवरी 2020 में कार्यक्रम को राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम नाम दिया गया।
- केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission- NHM) के तहत कैंसर, मधुमेह और हृदय रोगों तथा स्ट्रोक की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कैंसर सहित सामान्य गैर-संचारी रोगों से लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है, जिसमें स्वास्थ्य संवर्द्धन गतिविधियाँ आदि शामिल हैं।
- 30 जनवरी को ‘विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD) दिवस’ के रूप में घोषित किया गया है।
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (IRMR) के अनुसार म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) एक कवकीय संक्रमण (fungal Infection) है।
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रलय ने वर्ष 2017 में दुर्लभ रोगों के उपचार के लिए राष्ट्रीय नीति (NPTRD) विकसित की है।
- तपेदिक के उन्मूलन के लिये नवंबर 2017 में मास्को में विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा रूस के स्वास्थ्य मंत्रलय के सम्मिलित प्रयासों से पहली बार मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित हुई। मास्को घोषणा में वर्ष 2030 तक तपेदिक उन्मूलन का वैश्विक लक्ष्य रखा गया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था
भारतीय अर्थव्यवस्था, महामारी से सामना करने के बाद आगे बढ़ी हुई प्रतीत होती है, वित्तीय वर्ष 2022-23 में कई देशों से आगे पूर्ण पुनर्प्राप्ति कर ली है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का विकास दर 7 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है।
अमृत काल के लिए हमारी संकल्पना में सुदृढ़ लोक वित्त और सशत्तफ़ वित्तीय क्षेत्र के साथ, प्रौद्योगिकी-चालित और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था शामिल है, जिसे हासिल करने के लिए सबका साथ सबका प्रयास के माध्यम से जन भागीदारी अनिवार्य है। इस विजन को हासिल करने के लिए आर्थिक एजेंडा में तीन चीजों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, (I) नागरिकों, विशेषकर युवा वर्ग को, अपनी आकांक्षाओं की पूर्ति करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध करना, (II) विकास और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना तथा (III) वृहद् आर्थिक सुस्थिरता को सुदृढ़ करना।
अमृत काल के दौरान चार स्तम्भ रुपांतरकारी हो सकते हैं, जिमाने (I) महिलाओं का आर्थिक सशत्तिफ़करण, (II) पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान (पीएम विकास), (III) पर्यटन तथा (IV) हरित विकास शामिल है।
बजट 2023-24 में सात प्राथमिकताएँ, जिनमें समावेशी विकास, अंतिम व्यत्तिफ़ तक पहुंचना, अवसंरचना एवं निवेश, सक्षमता को सामने लाना, हरित विकास, युवा शत्तिफ़ तथा वित्तीय क्षेत्र को अपनाई गई हैं, जो एक-दुसरे का सम्पूरण करती हैं और अमृत काल के दौरान हमारा मार्गदर्शन करते हुए सप्तर्षि की भांति कार्य करती हैं।
आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में हेडलाइन मुद्रास्फीति के 6.8 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया है, जो लक्षित सीमा के बाहर है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए शहरी बेरोजगारी दर सितंबर 2021 को समाप्त तिमाही में 9.8 प्रतिशत से घटकर एक वर्ष बाद (सितंबर 2022 को समाप्त तिमाही में) 7.2 प्रतिशत हो गई। इसके साथ-साथ श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में भी सुधार हुआ है, जो वित्त वर्ष 2023 की शुरुआत में अर्थव्यवस्था के महामारी से प्रेरित मंदी से उभरने की पुष्टि करता है।
सामयिक मुद्दे
आर्थिक विकास अथवा वृद्धि से उस प्रक्रिया का बोध होता है जिसके द्वारा किसी देश अथवा प्रदेश के निवासी उपलब्ध साधनों का उपयोग, प्रति व्यक्ति वस्तुओं के उत्पादन में निरन्तर वृद्धि के लिए करते हैं
कृषि विकास
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में राष्ट्रीय स्तर पर वितरित सूक्ष्म-उर्वरक और कीटनाशक विनिर्माण नेटवर्क बनाते हुए 10,000 बायो-इनपुट रिसोर्स केंद्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जो अगले 3 वर्षों में 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए सहायता प्रदान करेगा।
- बजट 2023-24 में ग्रामीण क्षेत्रें में युवा उद्यमियों द्वारा कृषि-स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिये कृषि त्वरक कोष की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
- कृषि वर्धक निधिः बजट 2023-24 में, युवा उद्यमी ग्रामीण क्षेत्रें में एग्री-स्टार्ट-अप्स खोल सके, इसके लिए उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए कृषि वर्धक निधि की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इस निधि का उद्देश्य किसानों के सामने आ रही चुनौतियों का नवोन्मेषी एवं किफायती समाधान उपलब्ध करना है।
- बजट 2023-24 में कृषि ऋण के लक्ष्य को पशुपालन, डेयरी और मत्स्य उद्योग को ध्यान में रखते हुए 20 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।
खाद्यान्न फसल
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- 2021-22 के चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार, खाद्यान्न और तिलहन का उत्पादन साल-दर-साल (वाईओवाई) बढ रहा है। दालों का उत्पादन भी पिछले पांच वर्षों के औसत 23.8 मिलियन टन से उल्लेखनीय रूप से अधिक रहा है।
- प्रथम अग्रिम अनुमान 2022-23 (केवल खरीफ) के अनुसार धान का रकबा 2021-22 (खरीफ सीजन) के दौरान 411.2 लाख हेक्टेयर बोए गए क्षेत्र से लगभग 3.8 लाख हेक्टेयर कम था। इसके अलावा, चालू रबी सीजन में रबी धान की बुआई में पिछले साल की तुलना में 6.60 लाख हेक्टेयर का विस्तार किया गया।
- खरीफ धान के बुआई क्षेत्र में गिरावट के बावजूद, 2022-23 के दौरान खरीफ चावल का कुल उत्पादन 104.9 मिलियन टन अनुमानित है, जो पिछले पांच वर्षों (2016-17 से 2020-21) के औसत खरीफ चावल उत्पादन 100.5 मिलियन टन से अधिक है।
वाणिज्यिक फ़सल
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- वाणिज्यिक फ़सल कृषि के मुख्य लक्षण आधुनिक निवेशों जैसे अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना है।
- कृषि के वाणिज्यीकरण का स्तर विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग है।
- भारत कच्चे जूट का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है। जूट मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय तथा त्रिपुरा में उगाया जाता है।
- विश्व में जूट निर्यात में भारत की हिस्सेदारी केवल 7 प्रतिशत है, वहीं बांग्लादेश का हिस्सा लगभग 75 प्रतिशत है।
- जूट को ‘सुनहरा रेशा’ (Golden Fibre) भी कहा जाता है। यह एक लंबा, मुलायम और चमकदार प्राकृतिक रेशा है।
- जूट की फसल को 24 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान के साथ आई जलवायु की आवश्यकता होती है। इसे न्यूनतम 1000 मिमी- वर्षा की आवश्यकता होती है।
उर्वरक
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में डिनेचर्ड इथाइल अल्कोहल के उपयोग पर बेसिक सीमा शुल्क में छुट का प्रावधान किया गया है। डिनेचर्ड इथाइल अल्कोहल का उपयोग रसायन उद्योग में किया जाता है।
- बजट 2023-24 में फ्पृथ्वी माता के पुनरुद्धार, इसके प्रति जागरूकता, पोषण और सुधार हेतु प्रधानमंत्री कार्यक्रम (पीएम- प्रणाम)य् राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रें को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग तथा इनके स्थान पर वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु शुरू करने का प्रावधान किया गया है।
- भारत ने पिछले 10 वर्षों में प्रतिवर्ष लगभग 500 एलएमटी उर्वरक की ऽपत की है। भारत फर्टिलाइजर के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोत्तफ़ा है, लेकिन उत्पादन के मामले में तीसरे नंबर पर है।
- एक अनुमान के अनुसार, 2022-2027 की अवधि के दौरान भारतीय उर्वरक बाजार की CAGRT 11.9% रहने का अनुमान है।
- वर्ष 2020-21 के दौरान यूरिया का उत्पादन 246.03 एलएमटी था और डीएपी व मिश्रित उर्वरकों का उत्पादन 130.95 एलमएटी था।
बागवानी
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत में 84.95 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सब्जियों की खेती, 63.83 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में फलों की खेती, 33.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपण फसलों की खेती, 29.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में मसालों की खेती तथा 5.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सगंधीय फसलों की खेती की जाती है।
- बजट 2023-24 के अनुसार आत्मनिर्भर स्वच्छ पादप कार्यक्रम का शुभारंभ 2,200 करोड़ रुपए के प्रारंभिक परिव्यय के साथ उच्च गुणवत्ता वाली बागवानी फसल हेतु रोग-मुक्त तथा गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से किया जाएगा।
- फलों और सब्जियों का विश्व में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश।
- आम, केला, नारियल, काजू, पपीता, अनार आदि का शीर्ष उत्पादक देश।
- मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश।
- अंगूर, केला, कसावा, मटर, पपीता आदि की उत्पादकता में प्रथम स्थान है।
- ताजा फलों और सब्जियों के निर्यात में मूल्य के आधार पर 14 प्रतिशत और प्रसंस्करित फलों और सब्जियों में 16.27 प्रतिशत वृद्धि दर।
- केंद्रीय बागवानी संस्थान (सीआईएच), नागालैंड में स्थित है।
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन का 34.73 प्रतिशत उत्पादन करता है।
पशुपालन एवं डेयरी
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- पशुधन क्षेत्र 2014-15 से 2020-21 (स्थिर कीमतों पर) के दौरान 7.9 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ा और 2014-15 में कुल कृषि जीवीए (स्थिर कीमतों पर) में इसका योगदान 24.3 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में 30.1 प्रतिशत हो गया है।
- आर्थिक समीक्षा 2022-23 के अनुसार देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने, जमीनी स्तर तक इसकी पहुंच को गहरा करने और सहकारिता आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दृष्टि से एक नई राष्ट्रीय सहयोग नीति तैयार की जा रही है, जिसमें प्रासंगिक हितधारकों जैसे कि सहकारी क्षेत्र के विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के प्रतिनिधि शामिल हैं।
- भारत में पोल्ट्री सहित विशाल पशुधन संसाधन मौजूद हैं। भूमिहीन और सीमांत किसानों के लिए पशुधन, आय का एक महत्वपूर्ण ड्डोत है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- पशुधन क्षेत्र वर्ष 2014-15 से वर्ष 2020-21 तक 7.93 प्रतिशत (स्थिर मूल्य पर) की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से लगातार बढ़ रहा है।
- पशुपालन के माध्यम से कृषि विविधीकरण ग्रामीण आय में वृद्धि के प्राथमिक वाहकों में से एक है और किसानों की आय को दोगुना करने के लिए पशुधन क्षेत्र में उच्च सार्वजनिक निवेश समय की आवश्यकता है।
मत्स्य पालन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान कुल अनुमानित मत्स्य उत्पादन 14.73 मिलियन मीट्रिक टन है, जिसमें 11.25 मिलियन मीट्रिक टन अंतर्देशीय क्षेत्र से और 3.48 मिलियन मीट्रिक टन समुद्री क्षेत्र से है।
- भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जिसका योगदान वैश्विक उत्पादन में 7.56% है और यह देश के सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में लगभग 1.24% और कृषि जीवीए में 7.28% से ज्यादा का योगदान करता है।
- देश के समुद्री संसाधनों में 2.02 मिलियन वर्ग किलोमीटर अनन्य आर्थिक क्षेत्र, 0.53 मिलियन वर्ग किलोमीटर महाद्वीपीय शेल्फ क्षेत्र और 8,118 किलोमीटर तटवर्ती क्षेत्र है।
- भारत दुनिया में मछली का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है क्योंकि यह वैश्विक मछली उत्पादन में 7.7% का योगदान देता है।
- 2016-17 से मत्स्य पालन क्षेत्र की वार्षिक औसत वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत रही है और कुल कृषि जीवीए में इसकी हिस्सेदारी लगभग 6.7 प्रतिशत है।
- बजट 2023-24 में मत्स्यपालन विभाग के लिए 2022-23 के दौरान 1624.18 करोड़ रुपये और 2021-22 के दौरान 1360 करोड़ रुपये के मुकाबले 2248.77 करोड़ रुपये की राशि के आवंटन की घोषणा की है। यह वित्त वर्ष 2022-23 के बजट की तुलना में 38.45% की समग्र वृद्धि को दर्शाता है और यह विभाग के लिए अब तक के सबसे अधिक वार्षिक बजटीय सहयोग में से एक है।
- मत्स्यपालन क्षेत्र राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा अर्जित करने के प्रमुख घटकों में एक है।
खाद्य प्रबंधन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- खाद्य प्रबंधन के प्रमुख उद्देश्य किसानों से लाभकारी कीमतों पर खाद्यान्न की खरीद, उपभोत्तफ़ाओं, विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों को कम कीमतों पर खाद्यान्न का वितरण एवं खाद्य सुरक्षा तथा मूल्य स्थिरता के लिए खाद्य बफर स्टॉक का रख-रखाव है।
- ये सभी किसानों से एमएसपी पर खरीद एवं लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के तहत केंद्रीय निर्गम मूल्य (सीआईपी) पर विक्रय पर उपयोग किए जाते हैं। खाद्यान्नों की खरीद, वितरण एवं भंडारण करने वाली नोडल एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) है।
- खाद्यान्न का वितरण मुख्य रूप से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) तथा भारत सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत किया जाता है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- उद्योगों के नवीनतम वार्षिक सर्वेक्षण (एएसआई) 2019-20 के अनुसार, पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र में लगे कुल व्यक्तियों में से 12-2 प्रतिशत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कार्यरत थे।
- 2021-22 के दौरान प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात सहित कृषि-खाद्य निर्यात का मूल्य, भारत के कुल निर्यात का लगभग 10-9 प्रतिशत था।
- भारत में खाद्य प्रसंस्करण का मौजूदा स्तर 10 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने की नितांत आवश्यकता है, जिससे कि किसानों की आय बढाई जा सके। भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र दुनिया में सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। इसका उत्पादन वर्ष 2025-26 तक 535 अरब डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है।
- भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रक विश्व के सबसे बड़े खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रकों में से एक है, जो वर्ष 2025-26 तक इस क्षेत्रक का उत्पादन स्तर 535 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रक लगभग 11.18 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है। अप्रैल 2000 से मार्च 2022 तक खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रक में कुल 11.08 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश प्राप्त हुआ है।
बैंकिंग
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बैंक एक वित्तीय संस्था है। वर्ष 1949 में भारत के केंद्रीय बैंक (Central bank of India) का राष्ट्रीयकरण भी किया गया। नरसिम्हन समिति की सिफारिश के साथ, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का गठन 2 अक्टूबर, 1975 को किया गया था।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने "भूगतान विजन (Payments Vision) 2025" नामक एक दस्तावेज जारी किया है। यह दस्तावेज वर्ष 2025 तक की अवधि के लिए भारतीय भुगतान प्रणाली पर RBI की सोच और उसके विजन को बताता है।
मुद्रा व्यवस्था
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- RBI अधिनियम, 1934 के अनुसार, केवल RBI को भारत में बैंक नोट जारी करने का अधिकार है। सिक्का निर्माण अधिनियम, 2011 के तहत केंद्र सरकार द्वारा केवल सिक्के और 1 रुपये का नोट जारी किया जाता है।
- आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा के अंतर्गत मुख्य रूप से देश के मौद्रिक प्राधिकरण द्वारा जारी करेंसी, नोट और सिक्के आते हैं।
- करेंसी नोट और सिक्कों के अतिरिक्त, व्यावसायिक बैंकों में लोगों द्वारा जमा किये गए बचत खाते और चालू खाते को भी मुद्रा कहा जाता है, क्योंकि इन खातों से आहरित चेकों का उपयोग संव्यवहार के लिए किया जाता है। ऐसी जमा को माँग जमा कहते हैं, जो खाताधारी की माँग पर बैंक द्वारा भुगतान योग्य होता है।
- RBI के अनुसार, ब्ठक्ब् केंद्रीय बैंक द्वारा डिजिटल रूप में जारी की गई एक वैध मुद्रा है।
- इसे देश की फिएट करेंसी (सरकार द्वारा जारी मुद्रा) के तय मूल्य से जोड़ दिया जाता है। साथ ही यह बैंक नोट के मौजूदा भौतिक स्वरूप को डिजिटल रूप प्रदान करती है।
ग्रामीण बैंकिग व्यवस्था
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारतीय ग्रामीण बैंकिग व्यवस्था में ग्रामीण सहकारी बैंक (आरसीबी) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) का नाबार्ड द्वारा पर्यवेक्षण किया जाता है और उनमें विभिन्न संविधिक अनुपालनों और फ्रेमवर्कों का पालन सुनिश्चित कराया जाता है।
- मजबूत ग्रामीण सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक वित्तीय व्यवस्था को स्थिर और स्वस्थ बनाते हैं एवं ग्रामीण ग्राहकों को संधारणीय रूप से सेवाएँ प्रदान करते हैं। इस प्रकार नाबार्ड ग्रामीण वित्तीय संस्थाओं के व्यवसाय की प्रगति, लाभप्रदता, पूंजी पर्याप्तता और अनर्जक आस्तियों की स्थिति की निगरानी करता है और पुनर्पूंजीकरण, व्यवसाय विविधीकरण और उत्पाद नवोंमेशन, कम्प्यूटरीकरण और डिजिटाइजेशन आदि के माध्यम से उन्हें बढ़ावा देता है।
- नाबार्ड के प्रयासों के परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2021 से वित्तीय वर्ष 2022 तक महामारी की स्थिति में भी ऋण प्रवाह और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्रगति हुई।
प्रतिभूति बाजार
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में प्रतिभूति बाजार में कार्य निष्पादकों और पेशवरों की क्षमता निर्माण हेतु राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्थान में शिक्षा हेतु मानदंड और स्तर तैयार करने, विनियमित करने, बनाए रऽने और प्रवर्तित करने के लिए और डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट को मान्यता प्रदान करने हेतु सेबी को सशत्तफ़ करने का प्रावधान किया गया है।
- प्रतिभूतियाँ एक प्रकार का वित्तीय साधन हैं, जो धन जुटाने हेतु जारी किये जाते हैं। प्रतिभूति बाज़ारों का प्राथमिक कार्य उन लोगों से पूंजी के प्रवाह को सक्षम करना है, जिनके पास इसकी अधिकता है।
- प्रतिभूति बाज़ार निवेश के लिये धन के आवंटन हेतु चैनल प्रदान करते हैं और इस तरह इन दोनों गतिविधियों को अलग कर देते हैं।
- ‘नेशनल स्टॉक एक्सचेंज’ के आँकड़ों के अनुसार, व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी वर्ष 2021 में बढ़कर 45% हो गई, जो वर्ष 2020 में 39% थी। ‘नेशनल स्टॉक एक्सचेंज’ भारत का सबसे बड़ा वित्तीय बाज़ार है।
बीमा क्षेत्र
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान, गैर-जीवन बीमाकर्ताओं (भारत के भीतर और बाहर) के सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम में 10-8 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से स्वास्थ्य और मोटरफंड द्वारा संचालित है।
- वित्त वर्ष 2022 में गैर-जीवन बीमाकर्ताओं का निवल दावा 1-4 लाख करोड़ था, जो मुख्य रूप से प्रति व्यत्तिफ़ आय, उत्पाद नवाचारों और अनुकूलन, मजबूत वितरण चैनलों के विकास और बढ़ती वित्तीय साक्षरता से प्रेरित था।
- वित्त वर्ष 2022 में जीवन बीमा प्रीमियम में 10-2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें नए व्यवसायों का योगदान जीवन बीमाकर्ताओं द्वारा प्राप्त कुल प्रीमियम का 45-5 प्रतिशत था।
- देश में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा कंपनी स्टार हेल्थ और एलाइड इंश्योरेंस को दिसंबर 2021 में सूचीबद्ध किया गया था।
- बीमा वित्तीय क्षेत्र का एक अभिन्न अंग है, जो आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मृत्यु दर, संपत्ति और हताहत जोखिमों से सुरक्षा और सुरक्षा जाल प्रदान करने के अलावा, बीमा क्षेत्र बचत को प्रोत्साहित करता है और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए दीर्घकालिक धन प्रदान करता है।
- वर्ष 2021 में, कुल वैश्विक बीमा प्रीमियम में वास्तविक रूप से 3.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ गैर-जीवन बीमा क्षेत्र में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।भारत में बीमा उत्पादों की उपस्थिति वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का तकरीबन 3.7 प्रतिशत है, जबकि विश्व औसत लगभग 6.31 प्रतिशत है। बीमा क्षेत्र में विदेशी स्वामित्व की सीमा को 74 प्रतिशत तक बढ़ाने से भारत में बीमा उत्पादों के संदर्भ में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल करने में मदद मिली है। भारत को 2032 तक दुनिया के शीर्ष छह बीमा बाजारों में से एक के रूप में उभरने की उम्मीद है।
मुद्रा-स्फ़ीति
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- दिसंबर 2022 तक भारत में लगभग 5-7 प्रतिशत मुद्रास्फीति है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा मुद्रास्फीति की दर को वर्ष 2021 में 3.1 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2022 में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
- वर्ष 1982 के बाद सबसे अधिक है। मार्च 2022 में मुद्रास्फीति की उच्च दर मुख्य रूप से कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, खनिज तेल, मूल धातुओं आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण थी, जो रूस-यूक्रेन संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान से प्रेरित थी।
वित्त व्यवस्था
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- वित्त मंत्री ने कहा कि सभी राज्यों को वर्ष 2023-24 के अंत तक पूंजीगत व्यय के लिये अपने 50 वर्षीय ऋण का उपयोग करना चाहिये।
- राज्यों को अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 3.5% घाटा रखने की अनुमति है, इस राशि का 0.5% विशेष रूप से विद्युत क्षेत्र में सुधारों के लिये निर्धारित है।
- बजट 2023-24 में कुल प्राप्तियां और कुल व्यय क्रमशः 27.2 लाख करोड़ रुपए और 45 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया गया है।
- निवल कर प्राप्तियां 23.3 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। राजकोषीय घाटा ळक्च् के 5-9 प्रतिशत रहने का अनुमान।
- वर्ष 2023-24 में राजकोषीय घाटे का वित्तपोषण करने के लिये दिनांकित प्रतिभूतियों से निवल बाजार उधारियां 11.8 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है।
- सकल बाजार उधारी का अनुमान 15.4 लाख करोड़ रुपए है। साथ ही सरकार वर्ष 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को 4.5% से कम करने के लिये इस योजना पर अडिग रहने हेतु प्रतिबद्ध है।
कर व्यवस्था
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- प्रस्तावित 2023 वित्त विधेयक के अनुसार, फ्एंजेल टैक्सय्, जो कभी केवल भारतीय निवासियों द्वारा जुटाए गए निवेशों पर लागू होता था, अब विदेशी निवेशकों को शेयर बेचने वाले व्यवसायों पर भी लगाया जा सकता है।
- स्टार्टअप्स को आयकर लाभ प्राप्त करने की तिथि को बढ़ाकर 31 मार्च, 2024 कर दिया गया है। स्टार्टअप्स के लिये हानियों को अग्रेषित करने की अवधि को निगमन के 7 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया गया है।
- 31 मार्च, 2024 से पहले विनिर्माण शुरू करने वाली नई विनिर्माण सहकारी समितियों पर कर की दर 15% कम होगी।
- प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों और प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों द्वारा नकद जमा तथा ऋण की सीमा को बढ़ाकर 2 लाख रुपए प्रति सदस्य कर दिया गया है।
- बजट 2023-24 में व्यक्ति और एचयूएफ के लिए वित्त अधिनियम 2020 में शुरू की गई नई कर व्यवस्था को अब डिफॉल्ट व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव किया गया है।
- अप्रैल से दिसंबर 2022 तक वर्ष दर वर्ष आधार पर सकल जीएसटी संग्रह में 24.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वित्तीय समावेशन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- देश में वित्तीय समावेशन तथा ऑनलाइन पेमेंट बढ़ रहा है। 2022 में 47.8 करोड़ प्रधानमंत्री जनधन बैंक खाते खोले गए। यूपीआई के माध्यम से 126 लाख करोड़ रुपये के 7,400 करोड़ डिजिटल भुगतान किए गए हैं।
- केंद्र सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय वित्तीय सूचना रजिस्ट्री की स्थापना की जाएगी जो वित्तीय सहायक सूचना की केन्द्रीय भंडार के रूप में काम करेगी। इसे ऋण का कुशल प्रवाह संभव हो पाएगा, वित्तीय समावेशन तथा वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
- समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वित्तीय समावेशन हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति 2019-24 तैयार की है, जिसका उद्देश्य मार्च 2024 तक प्रत्येक वयस्कों तक मोबाईल के माध्यम से वित्तीय सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित हो सके।
पर्यटन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 के अनुसार एक एकीकृत और नवोन्मेषी दृष्टिकोण से, कम से कम 50 गंतव्यों का चैलेंज मोड से चयन किया जाएगा।
- बजट 2023-24 के अनुसार पर्यटक अनुभव को संवर्द्धित करने के लिए प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी, वर्चुअल कनेक्टिविटी, टूरिस्ट गाइड, फूड स्ट्रीट और पर्यटक सुरक्षा के उच्च मानक जैसे पहलुओं के अलावा, सभी प्रासंगिक पहलुओं को एक ऐप पर उपलब्ध करवाया जाएगा।
- बजट 2023-24 के अनुसार देखो अपना देश पहल का उद्देश्य हासिल करने के लिए क्षेत्र विशिष्ट कौशलवर्द्धन और उद्यमिता विकास का समन्वयन स्थापित किया जाएगा।
- संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन की दीर्घकालिक भविष्यवाणी टूरिज्म टुवार्ड्स 2030 के अनुसार 2010 से 2030 के मध्य विश्व में अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन में 3.3 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से वृद्धि होगी और 2030 तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या 1.8 बिलियन प्रतिवर्ष पहुंच जाएगी।
- विश्व में समस्त पर्यटकों में भारत की हिस्सेदारी 1.64 प्रतिशत है। तथा घरेलू पर्यटन में 11.05 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मामूली सुधार देखा गया है। वर्ष 2021 में वैश्विक यात्र और पर्यटन विकास सूचकांक में भारत की 54वीं रैंक थी।
विदेशी व्यापार
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- अक्टूबर 2022’ में भारत का कुल निर्यात (वस्तुओं और सेवाओं का संयुक्त) 58.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 4.03 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्शाता है।
- भारत का विदेशी क्षेत्र प्रतिकूलताओं और अनिश्चितता से बार-बार प्रभावित हुआ है, जिससे वैश्विक पण्य वस्तुओं (कमोडिटी) की कीमतों में वृद्धि दिखाई दी।
- वित्त वर्ष 2023 (दिसंबर 2022 तक) के दौरान भारत के निर्यात ने वित्त वर्ष 2022 में निर्यात के रिकॉर्ड स्तर के बाद लचीलेपन का प्रदर्शन किया है।
- पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न और आभूषण, जैविक और अकार्बनिक रसायन, दवाएं और पफ़ार्मास्यूटिकल्स प्रमुख निर्यात वस्तुओं में से थे। हालांकि, वैश्विक व्यापार में मंदी की विशेषता वाली धीमी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारतीय निर्यात में मंदी अपरिहार्य रही।
- कोविड-19 प्रेरित व्यवधानों के बाद, वित्तीय वर्ष 2022 में वैश्विक व्यापार संभावनाओं में सुधार हुआ है।
परिवहन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में 2.40 लाख करोड़ के पूंजीगत परिव्यय का प्रावधान किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक परिव्यय वर्ष 2013-14 में किए गए परिव्यय से लगभग 9 गुना है।
- बजट 2023-24 में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी में सुधार लाने के लिए पचास अतिरित्तफ़ हवाई अड्डा हेलीपोर्ट, वाटर एरोड्रोम और एडवांस लैंडिंग ग्राउंड का पुनरुध्दार करने का प्रावधान किया गया है।
- किसी देश के आर्थिक विकास के लिए सड़क परिवहन एक महत्वपूर्ण अवसंरचना है। यह विकास की गति, संरचना और पद्धति को प्रभावित करता है।
- भारत का सड़क नेटवर्क लगभग 63.72 लाख किमी है, जो विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, राज्यीय राजमार्ग, प्रमुख जिला सड़कें, अन्य जिला सड़कें और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं।
- भारत में 14,500 कि.मी. लंबा जलमार्ग नौकायन हेतु उपलब्ध है, जो देश के परिवहन में लगभग 1» का योगदान देता है। भारत की 7,516.6 किलोमीटर लंबी तटरेखा गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, ओडि़शा एवं पश्चिम बंगाल राज्यों तथा दमन एवं द्वीव, लक्षद्वीप, पुदुचेरी तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह संघ शासित क्षेत्रें से होकर गुजरती है, जो भारत को जल परिवहन के विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती है।
दूरसंचार
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत 86.89 प्रतिशत के टेली घनत्व और 118.9 करोड़ टेलीफोन कनेक्शनों के साथ विश्व का दूसरा सबसे दूरसंचार क्षेत्रक है। शहरी-ग्रामीण भारत के सन्दर्भ में, लगभग 66 करोड़ कनेक्शन शहरी भारत में और 53 करोड़ ग्रामीण भारत में है।
- दूरसंचार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त करने के मामले में तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्रक है।
- कुल FDI प्रवाह में इसकी हिस्सेदारी लगभग 7.1 प्रतिशत है। भारतीय दूरसंचार क्षेत्रक प्रत्यक्ष रूप से 2.2 मिलियन और अप्रत्यक्ष रूप से 1.8 मिलियन लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
- यह संभावना व्यक्ति की गई है कि वर्ष 2023-2040 की अवधि के दौरान 5G तकनीक भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 450 बिलियन डॉलर का योगदान करेगी।
निवेश व अवसंरचना
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में पूंजीगत निवेश में 33 प्रतिशत की वृद्धि कर 10 लाख करोड़ करने का प्रावधान किया गया है, जो GDP का 3-3 प्रतिशत है। केंद्र द्वारा प्रत्यक्ष पूंजीगत निवेश का राज्यों को सहायता अनुदान के माध्यम से पूंजीगत आस्तियों के सृजन के लिए किए गए प्रावधान द्वारा सम्पुरण किया जाता है। केंद्र के प्रभावी पूंजीगत व्यय का बजट 13.7लाख करोड़ होगा, जो GDP का 4.5 प्रतिशत होगा।
- बजट 2023-24 के अनुसार नवस्थापित अवसंरचना वित्त सचिवालय इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रधानतया सार्वजनिक संसाधनों पर निर्भर रहने वाले रेलवे, सड़क, शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और पावर सहित में और अधिक निजी निवेश के लिए सभी हितधारकों की सहायता का प्रावधान किया गया है।
- भारत को अधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बनाने के लिए सरकार ने रक्षा, पेंशन, ई-कॉमर्स गतिविधियों आदि जैसे सभी क्षेत्रें में कई क्रांतिकारी और परिवर्तनकारी एपफ़डीआई सुधारों को लागू किया है।
सड़क अवसंरचना
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों, जिला सड़कों, ग्रामीण सड़कों और शहरी सड़कों के नेटवर्क के रूप में सड़क अवसंरचना देश की उपभोक्ताओं और व्यवसायों की विविध आबादी के लिए परिवहन और कनेक्टिविटी के प्रमुख साधन के रूप में कार्य करता है।
- समय के साथ वित्त वर्ष 2022 में 10457 किलोमीटर सड़कों के निर्माण के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच)/सड़कों के निर्माण में वृद्धि हुई है।
- वित्त वर्ष 2023 में (अक्टूबर 2022 तक), 4,060 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों/सड़कों का निर्माण किया गया।
रेल अवसंरचना
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- एक प्रमुख परिवहन अवसंरचना, जिसे बेहतर तरीके से भारत की जीवन रेखा कहा जा सकता है। 68,031 मार्ग किमी से अधिक के साथ भारतीय रेलवे (आईआर) एकल प्रबंधन के तहत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है।
- वित्त वर्ष 2022-23 (नवंबर 2022 तक) के दौरान, भारतीय रेलवे (आईआर) ने वित्त वर्ष 2021-22 (केआरसीएल11 को छोड़कर) में इसी अवधि के दौरान 901.7 मिलियन टन की तुलना में 976.8 मिलियन टन राजस्व अर्जित करने वाला माल यातायात (केआरसीएल को छोड़कर) किया, जिससे 8.3 प्रतिशत की वृद्धि में हुई है।
डिजिटल अवसंरचना
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- हाल के वर्षों में, देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए डिजिटल अवसंरचना की भूमिका बढ़ी है।
- यह विशेष रूप से कोविड-19 की अवधि के दौरान ऐसा सच था, जब वास्तविक बातचीत में कमी के कारण सेवा वितरण और दूरस्थ कार्य के लिए पहले से उपलब्ध डिजिटल अवसंरचना का उपयोग आवश्यक हो गया था।
- आने वाले वर्षों में, डिजिटल अवसंरचना की उपलब्धता और प्रसार आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
स्कूल अवसंरचना
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों के लाभांश आने वाले दशकों में देश की वृद्धि और विकास की संभावनाओं को समृद्ध करेंगे। शिक्षकों की उपलब्धता, जिसे छात्र - शिक्षक अनुपात द्वारा मापा जाता है।
- संकेतक, जो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार से विलोम संबंध रखता है, में वित्त वर्ष 13 से वित्त वर्ष 22 की अवधि में लगातार सभी स्तरोंः प्राथमिक स्तर पर 34.0 से 26.2, उच्च प्राथमिक में 23.0 से 19.6, माध्यमिक में 30.0 से 17.6 और उच्च माध्यमिक स्तर पर 39.0 से 27.1, तक की कमी हुई, जिसके परिणाम स्वरूप शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ।
स्वास्थ्य अवसंरचना
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में सहयोगात्मक अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए चुनिंदा आईसीएमआर प्रयोगशालाओं की सुविधाएं सरकारी तथा निजी मेडिकल कॉलेज संकाय तथा निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास दलों को अनुसंधान के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
- बजट 2023-24 में फार्मास्यूटिकल्स में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से एक नया कार्यक्रम शुरू करने का प्रावधान किया गया है।
- बजट 2023-24 में मौजूदा चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सा उपकरणों हेतु पूर्ण समर्पित बहु-विषयक पाठ्यक्रमों का बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है, जिससे भविष्यत्कालिक चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, उच्च कोटि के विनिर्माण तथा अनुसंधान के लिए कुशल श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित किया जा सके।
- आकांक्षी जिले कार्यक्रम की सफलता को आगे बढाते हुए सरकार ने हाल ही में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और आधारभूत अवसंरचना जैसे विभिन्न डोमेनों में अनिवार्य सरकारी सेवाओं की पूर्ण उपलब्धता के लिए 500 ब्लॉकों को कवर करते हुए आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम शुरू किया है।
उद्योग
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में मुख्य स्थान रखता है और इसने 12.1 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दिया। वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाहीं के लिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर औद्योगिक क्षेत्र द्वारा समग्र सकल मूल्यवर्द्धन (जीवीए) 3.7 प्रतिशत बढा, जो पिछले दशक की पहली छमाहीं में प्राप्त 2.8 प्रतिशत की औसत वृद्धि से अधिक है।
- भारत सरकार वर्ष 2020-24 तक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमक्षेत्र के योगदान को जीडीपी के 50% तक बढ़ाने और 50 करोड़ रोजगार सृजित करने की योजना बना रहा है।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग का भारत की GDP में 29% योगदान है। इसमें 11 करोड़ से ज्यादा लोगों (कृषि के बाद दूसरा बड़ा नियोजक क्षेत्रक) को रोजगार मिला है।
- वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 (9 मार्च, 2022 तक) के दौरान, MSMEs के रूप में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम मंत्रलय के पास पंजीकृत 5,907 उद्यम देश में बंद हो गए। इनमें से 99.1 प्रतिशत सूक्ष्म उद्यम थे, जबकि 0.75 प्रतिशत लघु उद्यम थे।
- भारत का लक्ष्य 2025 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनना है और इस विजन को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2026 तक 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और 120 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के निर्यात तक पहुंचने का लक्ष्य है। उद्योग 4.0 में, बेहतर डिजिटलीकरण और रोबोटिक्स अनुप्रयोगों के कारण औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी वृद्धि देखी जा रही है।
भारतीय राजव्यवस्था
व्यवस्थित परिवर्तन की जटिल प्रक्रियात्मक व्यवस्था ही संविधानवाद है। - कार्ल जे- फ्रेड्रिक
राजनीतिक व्यवस्था सामान्यत व्यवस्थाओं की सीमाओं के पार, पर्यावरण से तथा परस्पर अंतक्रिया करने वाली उन संरचनाओं, प्रक्रियाओं तथा समस्यों का समुच्चिकरण है, जिसे राजनीतिक अंतक्रिया की इकाई या व्यवस्था कहा जा सकता है।
भारतीय राजव्यवस्था में संविधानवाद एक महत्वपूर्ण आयाम है, जो एक आधुनिक युगीन संकल्पना है, जो विधि और विनियमों द्वारा शासित राजनीतिक व्यवस्था की अपेक्षा करती है। यह व्यक्ति के स्थान पर विधि की सर्वोच्चता का समर्थक है। इसमें राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और सीमित (शक्तियों वाली) सरकार के सिद्धान्तों का समावेश होता है। इसका तादात्म्य ‘विभक्त शक्तियों’ की व्यवस्था के साथ किया जाता है।
राजनीतिक व्यवस्था एक सामाजिक संस्था है, जो किसी देश के शासन से संव्यवहार करती है और लोगों से इसका संबंध प्रकट करती है।
भारत, राज्यों का संघ, एक संप्रभुसत्तासंपन्न, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है, जिसमें शासन की संसदीय व्यवस्था है। भारतीय राजव्यवस्था संविधान के संदर्भ में शासित होती है।
संविधानवाद का अर्थ है, ऐसा सिद्धान्त और व्यवहार, जिसके अन्तर्गत किसी समुदाय का शासन संविधान के अनुसार चलाया जाता है। प्रस्तुत संदर्भ में संविधान का अर्थ है, उन नियमों और प्रक्रियाओं का समुच्चय, जो शासन की संरचना और कार्यों का स्वरूप निर्धारित करती है, शासन के अंगों का विवरण देती है, उनकी शक्तियों और परस्पर संबंधों का निरूपण करती है एवं यह भी निर्दिष्ट करती है कि इन्हें किन-किन सीमाओं और मर्यादाओं के भीतर कार्य करना होगा, ताकि शासन या उनका कोई अंग, किसी तरह की मनमानी न कर पाए।
नागरिकता
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 के बाद से भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की कुल संख्या 16,63,440 है. इनमें से 2,25,620 भारतीय ऐसे हैं, जिन्होंने 2022 में भारतीय नागरिकता छोड़ी है।
- 2017 -2022 विगत पांच सालों मेंभारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए सबसे ज्यादा 7,782 आवेदन पाकिस्तान से प्राप्त हुए हैं।
- वहीं,विगत इन पांच सालों में अफगानिस्तान के 795 व्यक्तियों, बांग्लादेश के 182 व्यक्तियों, केन्या के 135 व्यक्तियों, नेपाल के 167 व्यक्तियों, श्रीलंका के 205 लोगों इत्यादि ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था।
- नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (सीएए) को दिसंबर 2019 को अधिसूचित किया गया तथा जनवरी 2020 से लागू किया गया।
निवारक निरोधा
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- निवारक निरोध राज्य के अधीन एक सांविधिक शक्ति है, जिसके तहत राज्य किसी व्यक्ति को कोई संभावित अपराध करने से रोकने के लिये हिरासत में ले सकता है।
- भारतीय संविधान में दो प्रकार की गिरफ्रतारी के विरुद्ध आरोपी व्यक्ति को संरक्षण प्राप्त है: पहला सामान्य विधि के अंतर्गत गिरफ्रतारी में संरक्षण अर्थात आईपीसी, मूल विधियां आदि।
- दूसरी निवारक निरोध अर्थात प्रतिबंधित कार्यवाही से संरक्षण। जब कोई गिरफ्रतारी किसी सुरक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा या लोकशान्ति भंग या परिशांति भंग प्रतीत होती है, तब गिरफ्रतार व्यक्ति को निरुद्ध रखा जाता है।
आरक्षण
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- फरवरी, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा राज्य के निवासियों के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75% आरक्षण का प्रावधान करने वाले एक विवादास्पद राज्य कानून पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाने के आदेश को रद्द कर दिया।
- यह अधिनियम, जो 15 जनवरी, 2022 को लागू हुआ था, ष्हरियाणा राज्य में अधिवासितष् नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों को निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है।
- यह कानून निजी कंपनियों, सोसाइटीज, ट्रस्टों और साझेदारी फर्मों को कवर करता है तथा उन नौकरियों पर लागू होता है जो अधिकतम 30,000 रुपये तक का सकल मासिक वेतन या मजदूरी प्रदान करते हैं।
धार्मिक अधिाकार
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी एक मौलिक अधिकार है, जिसके तहत हर धर्म और पंथ को एक आजादी मिली है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक देश है, जिसका अपना कोई सरकारी तौर पर घोषित धर्म नहीं है।
- भारत के मूल संविधान में पंथनिरपेक्ष राज्य शब्द को अभिव्यक्त रूप से उल्लेखित नहीं किया गया है, परंतु इस बात का कोई संदेह नहीं हो सकता कि हमारे संविधान निर्माता ऐसा राज्य स्थापित करना चाहते थे, तदनुसार संविधान के यह उपबंध बनाए गए थे।
- पंथनिरपेक्ष शब्द को बाद में जोड़ा गया, परंतु अनुच्छेद 25 में धर्म की स्वतंत्रता का उल्लेख भारत के संविधान को बनाए जाने के समय से है।
जीवन का अधिाकार
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार “किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है’’।
- मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा (यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स) के अनुच्छेद 3 के तहत किसी व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता और सुरक्षा के अधिकार को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय करार (कॉवेनेंट) के अनुच्छेद 6 में यह प्रावधान है कि फ्हर इंसान को जीवन का अंतर्निहित (इन्हेरेंट) अधिकार है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- स्वतंत्रता व्यक्ति का नैसर्गिक अधिकार है और इस प्रकार के नैसर्गिक अधिकार को किसी भी शासन द्वारा छीना नहीं जा सकता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 से 22 तक में भारत के नागरिकों को स्वतंत्रता संबंधी विभिन्न अधिकार प्रदान किए गए हैं। यह चारों अनुच्छेद दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार पत्र स्वरूप हैं। यह स्वतंत्रता मूल अधिकारों का आधार स्तंभ भी है।
- वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ शब्द, लेखों, मुद्रण, चिन्हों या किसी अन्य प्रकार से अपने विचारों को व्यक्त करना है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में किसी व्यक्ति के विचारों को किसी ऐसे माध्यम से अभिव्यक्त करना सम्मिलित है, जिससे वह दूसरे तक उन्हें संप्रेषित कर सके।
निदेशक सिध्दांत और कर्तव्य
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- संविधान कुछ राज्य के नीति निर्देशक तत्व निर्धारित करता है, यद्यपि ये न्यायालय में कानूनन न्यायोचित नहीं ठहराए जा सकते, परन्तु देश के शासन के लिए मौलिक हैं और कानून बनाने में इन सिद्धान्तों को लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
- कर्तव्य अधिकारों से अधिक महत्त्वपूर्ण है। अधिकारों का सही उपयोग तभी सम्भव है, जब कर्तव्य की सही समझ हो। प्रारम्भ में संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान मैं मौलिक कर्तव्यों का समावेश नहीं किया गया था, केवल मौलिक अधिकारों का ही समावेश किया गया था।
- मौलिक अधिकारों के दुरुपयोग की आशंका से संविधान में मौलिक कर्तव्यों का पृथक् से उल्लेख किया जाना आवश्यक है, फलतः संविधान के 42वें संशोधन द्वारा मौलिक कर्तव्यों का समावेश कर दिया गया है। इसमें नागरिकों के 10 मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है।
सहकारी संघवाद
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- सहयोगात्मक संघवाद का अभिप्राय यह है कि हमारा संविधान केंद्र एवं राज्यों के परस्पर सहयोग पर अधिक बल देता है। भारत के संविधान निर्माताओं ने एक ऐसी संघ प्रणाली की कल्पना की थी; जो सहयोग एवं समन्वय पर आधारित हो। सहकारी संघवाद सामान्य एवं क्षेत्रीय सरकारों के मध्य प्रशासनिक सहयोग की पद्धति है।
- सहकारी संघवाद जिसका अर्थ है सत्ता का विकेंद्रीकरण और संघ, राज्य तथा स्थानीय एजेंसी व संस्थानों के पास समान अधिकार का होना। सहकारी संघवाद हमारे लोकतंत्र की नींव है।
- भारत के परिसंघीय ढांचे की विशेषता यह है कि इसका आत्मा भले एकात्मक है, लेकिन इसका चरित्र परिसंघीय है।
केंद्र-राज्य संबंधा
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत राज्यों का संघ है और संघ तथा राज्यों के बीच के सम्बन्ध को भारत के संविधान में परिभाषित किया गया है। संविधान में केंद्र राज्य सम्बन्धों को तीन व्यापक श्रेणियों विधायी, प्रशासनिक और वितीय में वर्गीकृत किया गया है।
- केंद्र-राज्य संबंध से अभिप्राय किसी लोकतांत्रिक राष्ट्रीय राज्य में संघवादी केंद्र और उसकी इकाइयों के बीच के आपसी संबंधों से होता है। भारत का संविधान अपने स्वरूप में संघीय है और समस्त शक्तियां केंद्र और राज्यों के बीच में विभाजित है।
- देश की एकता विकास एवं सुरक्षा के लिए केंद्र का शक्तिशाली होना आवश्यक है, वहीं राज्यों की मांग है कि उनके विकास के लिए उन्हें अधिक शक्तियां प्रदान की जाए।
संसदीय व्यवस्था
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत में संसदीय लोकतंत्र न केवल समय की कसौटी पर खरा उतरा है, बल्कि इसने अपनी जडें और भी मजबूत की है और इसमें काफी लचीलापन भी आया है।
- भारत के संसदीय लोकतंत्र की सफलता का श्रेय उन स्वस्थ्य संसदीय पद्धतियों और प्रक्रियाओं को दिया जा सकता है, जिन्हें हमने विगत वर्षों में विकसित किया है।
- समय के साथ विकसित हुई यही संसदीय पद्धतियां और प्रक्रियाएं, संसदीय संस्थाओं को सशक्त, प्रभावी और मजबूत बनाती हैं, विकसित और पोषित करती हैं।
स्थानीय स्वशासन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- छत्तीसगढ़ सरकार ने अगस्त 2022, में राज्य के अनुसूचित क्षेत्रें में ग्राम सभा के माध्यम से स्थानीय स्वशासन सुनिश्चित करने के लिए पेसा अधिनियम 1996 के कार्यान्वयन हेतु नियमों को अधिसूचित किया।
- नए नियमों के अनुसार, ग्राम सभा के 50% सदस्य आदिवासी समुदायों से होंगे और इसमें से 25% सदस्य महिलाएं होंगी।
- पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रें में विस्तार) अधिनियम या पेसा कानून (PESA Act) एक केंद्रीय कानून है, जिसका कार्यान्वयन राज्य-विशेष पर निर्भर करता है।
न्यायपालिका
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में न्याय में कुशल प्रशासन हेतु, ई-न्यायालय परियोजना के चरण-3 को 7,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ शुरू किया जाएगा।
- जनवरी, 2023 को न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने ‘लिविंग विल’ से संबंधित मौजूदा दिशा-निर्देशों में बदलाव करके देश में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को सरल बनाने पर सहमति व्यक्त की।
- मई 2022 तक भारत में न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों में 4-7 करोड़ से अधिक मामले लंबित थे। इनमें से 87-4% मामले अधीनस्थ न्यायालयों में तथा 12-4% मामले उच्च न्यायालयों में लंबित थे। भारत में लंबित कुल मामलों में से लगभग 1,82,000 मामले 30 वर्षों से अधिक समय से लंबित हैं।
चुनाव सुधार
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 23-24 जनवरी, 2023 को नई दिल्ली में ‘प्रौद्योगिकी का उपयोग एवं चुनाव निष्ठा’ विषय पर दूसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की गई।
- दिसंबर 2021 में आयोजित ‘लोकतंत्र के लिए सम्मेलन’ के बाद चुनावी शुचिता पर समूह की स्थापना की गयी थी, जिसका नेतृत्व ईसीआई कर रहा है।
- चुनावी प्रणाली नियमों के उस समूह को संदर्भित करती है, जिसके माध्यम से लोग अपने प्रतिनिधियों या राजनीतिक नेताओं का चुनाव करते हैं। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।
सुशासन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- 19-25 दिसंबर, 2022 तक मनाए जा रहे दूसरे ‘सुशासन सप्ताह’, ‘नागरिक-प्रथम’ के सिद्धांत पर आधारित है, जो सरकार द्वारा हर स्तर पर प्रक्रियाओं और कार्यवाहियों को सरल बनाकर इकोसिस्टम को पारदर्शी और त्वरित बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
- भारत में सुशासन नागरिकों के डिजिटल सशक्तिकरण और संस्थानों के डिजिटल रूपांतरण की दिशा में कार्य कर रहा है। सुशासन का लक्ष्य आर्थिक तथा वित्तीय संसाधनों या लोक सेवाओं के सक्षम प्रबंधन से कहीं अधिक व्यापक होता है, जो लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता और कार्यकुशलता में सुधार करना है।
- वर्ष 1992 में ‘शासन और विकास’ नामक रिपोर्ट में विश्व बैंक ने सुशासन अर्थात् ‘गुड गवर्नेंस’ की परिभाषा तय की।
अंतरराष्ट्रीय व द्विपक्षीय संबंध
एक राष्ट्र के रूप में भारत का जन्म विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि में हुआ था। ऐसे में भारत ने अपनी विदेश नीति में अन्य सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और शांति कायम करके अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य सामने रखा। इस लक्ष्य की प्रतिध्वनि संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में सुनाई देती है।
मॉडलस्की के अनुसार-कोई राष्ट्र अन्य राष्ट्रों के व्यवहार में परिवर्तन करवाने के लिए और गतिविधियों को अन्तरराष्ट्रीय पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए जो उपाय करता है, विदेश नीति कहलाती है। प्रत्येक संप्रभु देश की एक विदेश नीति होती है। भारत की भी अपनी एक विदेश नीति है। विदेश नीति के अंतर्गत कुछ सिद्धांत, हित और वे सभी उद्देश्य आते हैं, जिन्हें किसी दूसरे राष्ट्र से संपर्क के समय बढ़ावा दिया जाता है।
विदेश नीति के संचालन में राष्ट्रीय हित रूपी साध्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राष्ट्रीय हित तथा विदेश नीति के आपसी सम्बन्धों को जानने कि लिए राष्ट्रीय हित द्वारा विदेश नीति को प्रभावित करने वाली भूमिका का अध्ययन करना जरूरी है। राष्ट्र-हित की प्रभावकारी भूमिका को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है-
- राष्ट्रीय हित विदेश नीति को अन्तरराष्ट्रीय परिवेश में प्रतिस्थापित करता है।
- राष्ट्रीय हित विदेश नीति को नियन्त्रित करने वाले मापदण्डों का विकल्प प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय हित विदेश नीति को निरन्तरता प्रदान करता है और उसे गतिशील बनाता है।
- विदेश नीति स्वयं को राष्ट्रीय हित के सन्दर्भ में परिवर्तित अन्तर्राष्ट्रीय परिवेश में समायोजित करती है, अर्थात स्वयं को बदली अन्तरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार ढालती है।
- राष्ट्रीय हित विदेश नीति को मजबूत आधार प्रदान करते हैं, क्योंकि ये समाज के समन्वित एवं सर्वसम्मति पर आधारित मूल्यों की अभिव्यक्ति होते हैं।
- राष्ट्रीय हित विदेश नीति का दिशा-निर्देशन करते हैं। जिस तरह राष्ट्रीय हित विदेश नीति का आधार होता है, उसी तरह विदेश नीति राष्ट्रीय हित का निर्देशन करती है।
सामयिक मुद्दे
अंतर्राष्ट्रीय संबंध से तात्पर्य दो या अधिक राष्ट्रों के मध्य संबंधों के स्वरूप से है, जिसमें राजनीतिक आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामरिक संबंध स्थापित होते हैं।
भारतीय विदेश नीति
- कई वर्षों के अंतराल के बाद सभी द्विपक्षीय निवेश संधियों को रद्द करने और 15 देशों की एशियाई क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी से हटने के बाद सभी मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा करने के पश्चात् वर्ष 2022 में भारत पुनः FTA में शामिल हो गया।
- भारत, अमेरिका के नेतृत्त्व वाले हिंद-प्रशांत आर्थिक ढाँचा में भी शामिल है, हालाँकि बाद में उसने व्यापार वार्ता से बाहर रहने का फैसला किया।
- विदेश नीति एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जहां विभिन्न कारक (विभिन्न देश) विभिन्न स्थितियों में अलग-अलग प्रकार से एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
- भारत ने स्वतंत्रता के बाद से अपने अतीत के 75 वर्षों को याद करने हेतु वर्ष 2022 में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया। सदियों के उपनिवेशवाद और अधीनता के बाद, भारत 15 अगस्त, 1947 में स्वतंत्र हुआ।
भारत की परमाणु नीति
- भारत अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तहत वर्ष 2024 तक 14.6 गीगावाट बिजली का उत्पादन करेगा, जबकि वर्ष 2032 तक बिजली उत्पादन की यह क्षमता 63 गीगावाट हो जाएगी। फिलहाल भारत में 21 परमाणु रिएक्टर सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 7 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
- मई 1974 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था।
- पहले परमाणु परीक्षण का नाम ‘स्माइलिंग बुद्धा’ था। भारत ने 11 और 13 मई, 1998 को राजस्थान के पोखरण परमाणु स्थल पर 5 परमाणु परीक्षण किये थे।
- भारत पहला ऐसा परमाणु शक्ति संपन्न देश बना जिसने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
- 10 अगस्त, 1948 को भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की गयी थी।
- परमाणु ऊर्जा विभाग को सीधे प्रधानमन्त्री के अधीन रखा गया तथा डॉ. भाभा को परमाणु ऊर्जा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
- अप्रैल 1951 में जादूगोड़ा में यूरेनियम डिपोजिट की खोज हुई थी।
- 4 अगस्त, 1956 को एशिया के पहले अनुसंधान रिएक्टर की स्थापना की गयी तथा 1957 में इसे अप्सरा नाम दिया गया था।
- 20 जनवरी, 1957 को परमाणु ऊर्जा स्थापना ट्राम्बे की स्थापना की गयी थी, जिसे बाद में 22 जनवरी, 1967 को नाम परिवर्तित कर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र रख दिया है।
भारत और प्रमुख क्षेत्रीय संगठन
- अंतरराष्ट्रीय संगठन उन संस्थाओं को कहते हैं; जिसके सदस्य, कार्यक्षेत्र तथा उपस्थिति वैश्विक स्तर पर हो तथा कुछ विशेष उद्देश्यों के लिए स्थापित किये जाते हैं, जो उनके संघटक दस्तावेजों में वर्णित किये जाते हैं। क्षेत्रीय संगठन जैसे यूरोपीय संघ, आसियान, सार्क यह सब क्षेत्रीय संगठन हैं।
- क्षेत्रीय संगठन आपसी बातचीत को बढ़ावा देने के लिए, विवादों का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करने के लिए, आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए और आर्थिक विकास व आपसी व्यापार को तेज करने के लिए स्थापित किये जाते हैं।
भारत और क्षेत्रीय संबंध
- भारत को वर्ष 2023 का G20 की अध्यक्षता सौंपी गई है। इस अवसर पर भारत में G20 के अन्तर्गत वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा सहित भविष्य के कई अन्य वैश्विक मुद्दों पर बैठकों का आयोजन किया जा रहा है।
- इसी क्रम में G20 इंडिया के तहत युवा संस्करण की पहली यूथ-20 (Y-20) एंगेजमेंट ग्रुप की पहली बैठक असम के गुवाहाटी में शुरु हुई है।
- Y-20 इंसेप्शन की तीन दिवसीय बैठक IIT गुवाहाटी परिसर में 6 से 8 फरवरी तक आयोजित की गई।
- भारत में पहली Y-20 इंसेप्शन मीटिंग की मेजबानी युवा मामले और खेल मंत्रलय कर रहा है।
भारत का द्विपक्षीय संबंध
- एक राष्ट्र का दूसरे राष्ट्र के साथ सामरिक और कूटनीतिक संबंध किसी भी राष्ट्र की विदेश नीति का प्रमुख अंग होता है, जिसके माध्यम से एक राष्ट्र अपने हितों की पूर्ति कर वैश्विक स्तर पर पहचान की स्थापना करता है।
- इसी क्रम में भारत के कई महत्त्वपूर्ण देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भारत के पड़ोसी देश
भूगोल ने हमें पड़ोसी, इतिहास ने मित्र, अर्थशास्त्र ने भागीदार तथा आवश्यकता ने सहयोगी बना दिया है। जिन्हें भगवान ने ही इस प्रकार जोड़ा है, उन्हें इन्सान कैसे अलग कर पाए! -जॉन एफ़ कैनेडी
एक सुरक्षित, स्थायी, शांतिपूर्ण तथा समृद्धशाली पड़ोस भारतीय सुरक्षा संरचना का केंद्र-बिंदु है। भारत, आपसी सूझबूझ एवं क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व को बढ़ावा देने की दृष्टि से अपने पड़ोसियों के साथ सक्रिय तथा सहयोगात्मक कार्यों को आगे बढ़ाता रहा है।
गतिशील क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिवेश भारत के लिए विस्तृत चुनौतियां पेश करता है, जिनका तेजी से और कारगर ढंग से मुकाबला किया जाना चाहिए; ताकि देश का विकास एवं उत्थान तथा यहां के लोगों का विकास बनाए रखा जा सके और उसमें मदद दी जा सके। यह देश और हमारी रक्षा सेनाएं सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूर्णतः तैयार हैं।
भारत अपने पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण सहयोग की नीति का अनुसरण करता है। हालांकि यह नीति बहुत कठिन रही है। गत दशक में अनेक बाधाएं आईं, जिन्होंने द्विपक्षीय सम्बन्धों को खराब किया। भारत का हमेशा से यह नीति रही है कि अपने पड़ोसियों के साथ उत्तम व्यवहार करे, भारत आजादी के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय शांति की बात करता रहा है तथा अपने पड़ोसियों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाता रहा है।
भारत के पड़ोसी देश हैं- श्रीलंका, चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार एवं बांग्लादेश। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात से ही भारत ने अपने सभी पड़ोसी देशों से निकटतम संबंध बनाए रखने का निरंतर प्रयास किया है।
भारत ने हमेशा से पड़ोस की विचारधारा को ऐसी विचारधारा के रूप में परिभाषित किया है, जिसके क्षेत्र का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक समानताओं की मध्य धुरी के इर्द-गिर्द निरन्तर विकास हो।
सामयिक मुद्दे
राष्ट्र की सुरक्षा एवं संपत्रता को सुनिश्चित करने के लिये न सिर्फ पड़ोसी देशों के साथ बल्कि अन्य राष्ट्रों के साथ भी सकारात्मक एवं सौहार्द्रपूर्ण संबंध सहायक सिद्ध होते हैं।
भारत-पाकिस्तान
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत द्वारा अटारी में अपना पहला एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) खोले जाने के बाद से लगभग पिछले 10 वर्षों से सीमावर्ती बुनियादी ढाँचे में कोई बड़ा निवेश नहीं हुआ है।
- भारत के उत्तरी और पूर्वी पड़ोसी देशों के साथ 60 से अधिक बॉर्डर क्रॉसिंग हैं, जबकि पाकिस्तान के साथ केवल एक औपचारिक क्रॉसिंग है।
- भारत ने वर्ष 2025 तक23 आई.सी.पी. के निर्माण की योजना बनाई है, उनमें से कोई भी पाकिस्तान की सीमा पर स्थित नहीं है।
- विश्व के किन्हीं भी दो देशों में इतनी समानता नहीं है, जितनी कि भारत और पाकिस्तान में है। फिर भी लंबे समय से दोनों के बीच निरन्तर अघोषित युद्ध चल रहा है।
- पाकिस्तान के कारगिल आक्रमण (1999) के बाद दोनों देश नाभिकीय शक्ति क्षमता प्रदर्शन तक पहुंच गए हैं। इस संदेह और अविश्वास की भावना का जन्म 1947 में भारत विभाजन के बाद हो गया था। भारत, पाकिस्तान के साथ 3,190 किलोमीटर लम्बी सीमा साझा करता है।
- वर्ष 1947 में द्वि-राष्ट्र सिद्धांत के आधार पर भारत-पाकिस्तान का स्वरूप सामने आया। अगस्त, 1947 में स्वतंत्रता एवं विभाजन की दो घटनाओं ने द. एशिया में भारत एवं पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र राष्ट्रों को जन्म दिया।
- भारत-पाक के मध्य 1947 से ही कश्मीर को लेकर विवाद आरंभ हुआ तथा दोनों के मध्य अभी तक 1965, 1971, 1999 में युद्ध हो चुके हैं, जिनमें पाक सभी युद्धों में पराजित हुआ।
- वर्ष 1971 के युद्ध की समाप्ति के पश्चात् हुआ ‘शिमला समझौता’ दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय संबंधों के आधार के रूप में प्रसिद्ध है।
भारत-अफगानिस्तान
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भौगोलिक दृष्टि से अफगानिस्तान एक भू-आबद्ध (Land Looked) देश है। 17वीं सदी तक अफगानिस्तान बृहद भारत का एक भाग था। अफगानिस्तान को खुरासान, आर्याना आदि नामों से जाना जाता था।
- 19वीं सदी में आंग्ल-अफगान युद्धों के कारण अफगानिस्तान पर यूरोपीय प्रभाव बढ़ता गया। अफगानों के साथ हुए संघर्षों के बाद अंग्रेजों ने ब्रिटिश-भारत एवं अफगानिस्तान के मध्य ‘डूरंड रेखा’ नामक सीमा का निर्धारण किया। यह रेखा वर्तमान में पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के मध्य सीमा है।
- वर्ष 1980 के दशक में अफगानिस्तान में रूसी सेना ने अतिक्रमण कर कम्युनिस्ट शासन की स्थापना की, किंतु अमेरिकी सहयोग से यहां के जनजातीय एवं मुजाहिदीन लोगों ने रूसी सेना को 1989 में भगा दिया।
- रूसी सेना के भगाने के बाद से अफगानिस्तान में कट्टरपंथ को बढ़ावा मिला, जिसकी परिणति 1997 में तालिबानी शासन के रूप में हुई। यहीं से इस क्षेत्र का आतंकीकरण हुआ। अफगानिस्तान, जो पहले मध्य-एशिया एवं पश्चिम-एशिया तथा भारत के बीच का सांस्कृतिक महत्त्व हुआ करता था, वह पिछले 200 वर्षों से महाशत्तिफ़यों की प्रतिस्पर्द्धा का केंद्र बना हुआ है।
भारत-चीन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- चीन एशियाई महाशक्ति है एवं सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है, साथ ही P5 +1 समूह का सदस्य है। वहीं भारत एक उपक्षेत्रीय शक्ति है एवं अर्द्ध परमाणु संपन्न राष्ट्र है। भारत-चीन ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध लड़कर आजाद हुए एवं आरंभ में दोनों देशों के मध्य शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संबंध विद्यमान रहा तथा दोनों देशों के मध्य संबंधों में समन्वय स्थापित करने हेतु 1954 में ‘पंचशील सिद्धांत’ का प्रतिपादन किया गया। परंतु 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध ने दोनों देशों के मध्य संदेह का वातावरण निर्मित कर दिया। 2003 के बाद से भारत-चीन के मध्य सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत किए जाने का प्रयास किया गया।
भारत-नेपाल
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- नेपाल 5 भारतीय राज्यों- उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार के साथ सीमा साझा करता है, इसलिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये उनका सामरिक महत्त्व हेतु इस देश का महत्वपूर्ण स्थान है।
- वर्ष 1816 में ब्रिटिश द्वारा नेपाल को जीतकर अपने नियंत्रण में ले लिया गया, किंतु भारत के स्वतंत्रता के पश्चात् चीन के प्रभाव को नेपाल में बढ़ने से रोकने हेतु भारत-नेपाल संबंधों को ब्रिटिश नीति का भी समर्थन मिला।
- भारत द्वारा नेपाल की अर्थव्यवस्था को सहारा देने हेतु व्यापार एवं पारगमन संधि (जुलाई, 1950) की गयी। नेपाल, भारत और तिब्बत के बीच स्थित है और अब तिब्बत पर चीन के आधिपत्य के बाद भारत व चीन के मध्य एक बफर स्टेट के रूप में कार्य करता है।
- भारत के उत्तर-पूरब में स्थित नेपाल सामारिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। चीन द्वारा तिब्बत को हस्तगत कर लेने के बाद भारत-चीन सम्बन्धों में नेपाल की सामरिक स्थिति का राजनीतिक महत्व बढ़ गया।
भारत-भूटान
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत भूटान के साथ 699 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। सिक्कम, पश्चिम बंगाल, असम एवं अरुणाचल प्रदेश की सीमाएं भूटान से मिलती है। भारत और भूटान के बीच शांतिपूर्ण सीमा प्रबंधन है, जबकि सीमा पर भूटान और चीन के बीच विवाद है। इसलिए चीन से भूटान खुद को असुरक्षित महसूस करता है; भारत के साथ उसके मजबूत मैत्री संबंधों का एक कारण यह भी है।
- हाल के दिनों में भूटान ने एक ओपन डोर पालिसी (open door policy) विकसित की है। दुनिया के अन्य देशों के साथ राजनीतिक संबंधों को भी भूटान द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है।
- दुनिया के 52 देशों और यूरोपीय संघ के साथ भूटान के राजनयिक संबंध हैं। वर्ष 1971 के बाद से ही भूटान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है। हालांकि भूटान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के साथ औपचारिक संबंध नहीं रखता है।
भारत-बांग्लादेश
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बांग्लादेश विगत 8 वर्षों में सड़क, रेलवे, पोत परिवहन और बंदरगाहों जैसे विभिन्न क्षेत्रकों में भारत के लाइन ऑफ क्रेडिट (8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक रहा है।
- बांग्लादेश, भारत की प्रमुख ‘नेबरहुड फर्स्ट (Neighborhood First) और ‘एक्ट ईस्ट (Act East) नीतियों के केंद्र में है। साथ ही भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में बांग्लादेश की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
भारत-म्यांमार
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत, म्यांमार के साथ 1,468 किलोमीटर लम्बी सीमा साझा करता है। भारतीय राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर तथा मिजोरम म्यांमार के साथ सीमा साझा करते हैं। म्यांमार जिसे पहले बर्मा के नाम से जाना जाता था, भारत के साथ औपनिवेशिक विरासत का साझीदार रहा है।
- ब्रिटिश द्वारा बर्मा/पेगू विजय के द्वारा इसे भारत में मिला लिया गया था, जिसे 1935 के भारत शासन अधिनियम के माध्यम से पुनः भारत से पृथक कर दिया गया था। भारत-म्यांमार अपने सीमा के समीप निवास करने वाली जनजातियों को सीमा के आर-पार 16 किलोमीटर तक यात्र करने के लिए एक मुक्त आवागमन व्यवस्था की अनुमति प्रदान करते हैं।
- मुक्त आवागमन व्यवस्था जहां जनजातियों को पुराने संबंधों को बनाए रखने में मदद की है, वहीं यह सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत चिंता का कारण भी बना हुआ है। क्योंकि विप्लवकारियों ने मुक्त आवागमन व्यवस्था का लाभ उठाकर म्यांमार में पहुंच कर हथियारों से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और विद्रोही हमलों को अंजाम देते हैं।
भारत-श्रीलंका
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- श्रीलंका जिसे पहले (1972 तक) सीलोन के नाम से जाना जाता था, एक छोटा द्विपीय देश है, जो कि भारत के दक्षिण में हिंद महासागर में स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 25,332 वर्ग मील है। सभी देशों में भारत से इसकी भौगोलिक निकटता सबसे अधिक है।
- केवल 18 मील का विस्तृत पाकस्ट्रेट वाला उथला क्षेत्र जो कि उत्तरी श्रीलंका में जाफना है। वह भारत के सुदूर दक्षिणी राज्य तमिलनाडु से श्रीलंका को अलग करता है। भारत और श्रीलंका के बीच संबंध सामान्यतः अच्छे रहे हैं, हालांकि कुछ अवसरों पर तमिल और सिन्हालियों के बीच जातीय संघर्ष के कारण ये संबंध तनावपूर्ण होते रहे।
- अशोक के काल से ही भारत एवं श्रीलंका के मध्य सांस्कृतिक संबंध बन गए थे। फिर आगे चोल काल एवं पूर्व मध्य काल में व्यापारिक संबंधों के भी साक्ष्य मिलते हैं।
- ब्रिटिश काल में भारत से लोगों को श्रीलंका में बगानी खेती हेतु मजदूर (गिरमिटिया) बनाकर ले जाया गया, जिनमें तमिल लोग अत्यधिक मात्र में थे।
आंतरिक व बाह्य सुरक्षा
भारत की भू-राजनैतिक स्थिति, इसके पड़ोसी कारक, विस्तृत एवं जोखिम भरी स्थलीय, वायु और समुद्री सीमा के साथ इस देश के ऐतिहासिक अनुभव इसे सुरक्षा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील बनाते हैं।
आंतरिक सुरक्षा का सामान्य अर्थ एक देश की अपनी सीमाओं के भीतर की सुरक्षा से है। चाणक्य ने अर्थशास्त्र में लिखा है कि एक राज्य को निम्नलिखित चार अलग-अलग प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ सकता है- 1) आंतरिक, 2) बाह्य, 3) बाह्य रूप से सहायता प्राप्त आंतरिक, 4) आंतरिक रूप से सहायता प्राप्त बाहरी। भारत में आंतरिक सुरक्षा के परिदृश्य में उपर्युक्त खतरों के लगभग सभी रूपों का मिश्रण है।
स्वतंत्रता से पूर्व जहाँ आंतरिक सुरक्षा के केंद्र में धरना-प्रदर्शन, रैलियां, सांप्रदायिक दंगे, धार्मिक उन्माद थे तो वहीँ स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं तकनीकी की विकसित होती प्रणालियों ने आंतरिक सुरक्षा को अधिक संवेदनशील और जटिल बना दिया है।
भारत के पड़ोसी देशों में ‘स्वर्णिम त्रिभुज’ (म्यांमार, थाईलैंड और लाओस) व ‘स्वर्णिम अर्द्धचंद्राकार’ (अफगानिस्तान, ईरान एवं पाकिस्तान) क्षेत्रें की उपस्थिति के फलस्वरूप मादक द्रव्य का बढ़ता व्यापार भारत की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष प्रमुख चुनौती बन कर उभरा है।
भारत जैसे देशों में अवैध घुसपैठ एवं शरणार्थियों की समस्या में भी बाह्य राज्यों का प्रत्यक्ष योगदान है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को अनेक रूपों में चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। भारत में कई अतिवादी संगठन अलगाववादी भावनाओं को प्रेरित कर रहे हैं तथा ये अतिवादी संगठन अन्य देशों से संचालित किये जा रहे हैं।
वित्त वर्ष 2023-24 के केन्द्रीय बजट में कुल 45,03,097 करोड़ रुपये के परिव्यय की परिकल्पना की गई है। इसमें से रक्षा मंत्रलय को कुल 5,93,537.64 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो कि कुल बजट का 13-18 प्रतिशत है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का पूंजी बजट वित्त वर्ष 2022-23 के 3,500 करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2023-24 में 43% बढ़ाकर 5,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
सामयिक मुद्दे
किसी संप्रभु देश की आंतरिक सीमाओं के भीतर विखंडनकारी एवं गैर-कानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगाते हुए कानून एवं शांति व्यवस्था सुनिश्चित करना ही आंतरिक सुरक्षा है।
आंतरिक सुरक्षा
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- अगस्त, 2022 को राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली आरम्भ किया गया।
- अप्रैल 2022 में मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना था, जिसने NAFIS के माध्यम से एक मृत व्यक्ति की पहचान की थी।
- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित साह ने मई, 2022 को बेंगलुरू में नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड परिसर का उद्घाटन किया।
- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 10 अप्रैल, 2022 को गुजरात के बनासकांठा जिले में भारत-पाक सीमा पर स्थित नदाबेट में ‘सीमा दर्शन परियोजना’ का उद्घाटन किया।
- सीमा दर्शन परियोजना शुरू करने का उद्देश्य लोगों को ऐसा अवसर प्रदान करना है जिससे वह जान सकें कि सीमाओं पर सीमा सुरक्षा बल के कार्मिकों का जीवन और कार्य किस प्रकार का होता है।
आतंकवाद
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- हाइब्रिड आतंकवादी वे लोग होते हैं जिन्हें आतंकवादी समूहों द्वारा केवल एक या दो मिशनों को अंजाम देने के लिए लाया जाता है। वे मूल रूप से आतंकवादी समूहों की सहायता करते हैं।
- वर्तमान में आतंकवाद की समस्या एक विश्वव्यापी गंभीर समस्या बन गई है, जो विश्व के विकसित एवं विकासशील देशों में कानून, प्रशासन व समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
- संयुक्ति राष्ट्र ड्रग्स और अपराध कार्यालय (UNODC): यह आतंकवाद रोकथाम शाखा (TPB) आतंकवाद के वित्त पोषण का मुकाबला करने के कानूनी पहलुओं को देखती है।
- संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद रोधी कार्यालय (UNOCT): आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद को रोकने एवं उनका मुकाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की सभी कार्रवाइयों का नेतृत्व और समन्वय करता है।
साइबर सुरक्षा
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- हाल ही में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटा के अनुसार, वर्ष 2020 में भारत में साइबर अपराधों में 11.8% की वृद्धि देखी गई है।
- भारत में साइबर अपराध को गैर-कानूनी गतिविधियों के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसमें कम्प्यूटर ही एक उपकरण या लक्ष्य या दोनों होता है। यह ऐसी आपराधिक गतिविधि है, जो अपराध फैलाने के लिए कम्प्यूटर का उपयोग एक उपकरण के रूप में करती है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 इलेक्ट्रॉनिक संचार, इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य और साइबर अपराधों आदि को कानूनी मान्यता प्रदान करता है। भारत में अब 1.15 बिलियन से अधिक फोन और 700 मिलियन से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्त्ता हैं, जो भारत को से डिजिटल रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है।
- वर्ष 2021 में कुल वैश्विक डिजिटल भुगतान का 40 प्रतिशत भारत में हुआ। डिजिटल समावेशन से साइबर हमलों और अपराधों के लिये अग्रणी डिजिटल खतरों की संभावना बढ़ जाती है।
भारतीय सीमाएं एवं सीमा प्रबंधन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत की भू-सीमा 15,106 किमी. है। देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने और सीमावर्ती क्षेत्रें में अवसंरचना का सृजन करने की रणनीति के एक भाग के रूप में, सीमा प्रबंधन विभाग द्वारा कई पहल की गई हैं।
- इनमें भारत-पाकिस्तान, भारत-बांग्लादेश, भारत-चीन, भारत नेपाल, भारत-भूटान और भारत-म्यांमार सीमाओं पर बाड़ लगाना, तेज रोशनी की व्यवस्था करना, सीमा चौकियों/कंपनी ऑपरेटिंग बेस तथा सड़कों का निर्माण करना, देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के विभिन्न स्थानों पर एकीकृत जाँच चौकियों का विकास करना और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उपाय करना शामिल है।
भारत की समुद्री सुरक्षा
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए समुद्री सुरक्षा प्रमुख वरीयता क्षेत्रें में से एक रहा है।
- वर्ष 2021 में सुरक्षा परिषद की भारत की अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समुद्री सुरक्षा के बारे में बैठक का नेतृत्व किया था।
- भारत की तटरेखा 7,516.6 किमी. है, जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में हिन्द महासागर और पश्चिम में अरब महासागर सहित मुख्यभूमि और द्वीपों से घिरी है।
- भारतीय नौ सेना को समग्र समुद्री सुरक्षा के लिए जिम्मेवार प्राधिकरण के रूप में नामित किया गया है, जिसमें तटीय और अपतटीय सुरक्षा शामिल है।
मनी लॉन्ड्रिग
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- मनी लॉन्ड्रिंग या धन शोधन का अभिप्राय अवैध रूप से अर्जित आय को छिपाना या बदलना है, ताकि वह वैध स्रोतों से उत्पन्न प्रतीत हो।
- यह अक्सर मादक पदार्थों की तस्करी, डकैती या जबरन वसूली जैसे अन्य गंभीर अपराधों का एक घटक है। धन शोधन जघन्य अपराधों में से एक है।
- यह न केवल राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को प्रभावित करता है, बल्कि अन्य जघन्य अपराधों को भी बढ़ावा देता है।
अंतरिक्ष सुरक्षा
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- आत्म-निर्भरता प्राप्त करने और राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास को साध्य बनाने की दिशा में अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों के विकास को बढ़ावा देना अंतरिक्ष विभाग की प्रमुख निम्मेदारी है।
- देश में अंतरिक्ष क्रियाकलापों की शुरुआत 1962 में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति की स्थापना के साथ हुई। भारत सरकार ने अंतरिक्ष आयोग का गठन किया तथा जून 1972 में अंतरिक्ष विभाग की स्थापना की गई और इसरो को सितम्बर 1972 में अंतरिक्ष विभाग के अधीन लाया गया।
- वर्तमान बढ़ते अंतरिक्ष गतिविधियों (हमलों) के देखते हुए देश की अंतरिक्ष सुरक्षा को सुदृढ़ करना महत्वपूर्ण हो गई है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
भारत ने वैश्विक नवोन्मेष सूचकांक (ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स-जीआईआई) की अपनी वैश्विक रैंकिंग में वर्ष 2015 के 81वें स्थान से 2022 में विश्व की 130 अर्थव्यवस्थाओं में 40वें स्थान पर पहुँच गया है। जीआईआई के संदर्भ में भारत 34 निम्न मध्यम-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में दूसरे स्थान पर है और 10 मध्य एवंदक्षिणी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में प्रथम स्थान पर है। भारत दुनिया में प्रौद्योगिकी विनिमय (ट्रांजेक्शन्स) के लिए सबसे आकर्षक निवेश स्थलों में तीसरे स्थान पर है। अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय (जीईआरडी) पिछले 10 वर्षों में तीन गुना से अधिक बढ़ गया है। पिछले 9 वर्षों में बाह्य अनुसंधान एवं विकास में महिलाओं की भागीदारी भी दोगुनी हो गई है। रेजिडेंट पेटेंट फाइलिंग के मामले में भारत 9वें स्थान पर है।
2015 के दौरान शुरू किया गया राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन देश भर के विभिन्न संस्थानों में स्थापित 24 पीएफ कंप्यूट क्षमता प्रणालियों के साथ 4 प्रवेश स्तरीय और 15 मध्य-स्तरीय प्रणालियों के साथ राष्ट्रीय उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दे रहा है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक अधीनस्थ विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (एसओआई) ने ड्रोन तकनीक जैसी सबसे उन्नत तकनीकों के पैमानेकाउपयोग करके 10 सेमी के बहुत उच्च रिजॉल्यूशन पर देश के अखिल भारतीय उच्च चित्रंकन भूस्थानिक मानचित्रण की शुरुआत की है। इसके साथ ही भारत फाउंडेशन डेटा के रूप में अल्ट्रा हाई-रिजॉल्यूशन नेशनल टोपोग्राफिक डेटा रखने वाले कुछ देशों के चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है।
सामयिक मुद्दे
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय के अन्तर्गत विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा इन दोनों के परस्पर सम्बन्धों एवं अन्तःक्रियाओं पर विचार किया जाता है। विज्ञान के विकास से प्रौद्योगिकी का विकास होता है क्योंकि बहुत सारी प्रौद्योगिकियां वैज्ञानिक सिद्धान्तों पर आधारित होतीं हैं।
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- अंतरिक्ष विभाग के बजट में पिछले (2022-23) वित्तीय वर्ष की तुलना में 1,100 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। केंद्र ने अंतरिक्ष विभाग को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए 12,543.91 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। जबकि वर्ष 2022-23 के बजट में अंतरिक्ष विभाग को 13,700 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था।
- बजट 2023-24 में सरकार ने अंतरिक्ष विभाग को 12,544 करोड़ रुपये का आवंटन किया है; ताकि आगामी वर्ष में भारत मानव अंतरिक्ष यान ‘गगनयान’ अंतरिक्ष में भेज सके।
- इंडियन नेशनल स्पेस प्रोमोशन एंड अथाराइजेशन सेंटर (आइएन-स्पेस) के लिए सरकार ने 95 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इनस्पैक-ई के लिए 53 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
सूचना एवं प्रौद्योगिकी
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- वित्त वर्ष 2023-24 के आम बजटमें बच्चों और किशोरों के लिए डिजिटल पुस्तकालय की घोषणा की गई है। सभी स्कूलों को भी डिजिटल लाइब्रेरी से जोड़ा जाएगा जिससे किताबों की पहुँच बच्चों तक बढ़ सके।
- डिजिटल लाइब्रेरी एक पुस्तकालय है, जिसमें उपलब्ध किताबें डिजिटल स्वरूप में मौजूद होते हैं। साथ ही साथ इसमें इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल फॉर्मेट में टेक्स्ट, फोटो, वीडियो या ऑडियो भी शामिल होते हैं।
- वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में डिजिलॉकर और आधार को केवाईसी जरूरतों को पूरा करने के लिए वन-स्टॉप समाधान के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही डिजिलॉकर के लिए वन स्टॉप केवाईसी मैनेजमेंट सिस्टम बनाया जाएगा।
- डिजीलॉकर नागरिकों को पब्लिक क्लाउड पर एक सुरक्षित डॉक्यूमेंटेशन एक्सेस प्लेटफार्म प्रदान करने के डिजिटल इंडिया के विजन क्षेत्रें से जुड़ा है।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत ‘नेशनल डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम’ के लिए एक ओपन प्लेटफार्म चालू किया जाएगा। इसमें चिकित्साकर्मी एवं स्वास्थ्य सुविधाओं, अद्वितीय स्वास्थ्य पहचान, कंसेंट फ्रेमवर्क और सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा।
रक्षा प्रौद्योगिकी
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2022-23 में रक्षा के क्षेत्र में सरकार निर्यातों को कम करने और सशस्त्र बलों के लिए उपकरणों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
- पूंजीगत खरीद बजट के 2021-22 में 58 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2022-23 में घरेलू उद्योग के लिए 68 प्रतिशत तक धनराशि का प्रावधान किया जाएगा।
- रक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के कार्यों को रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट के 25 प्रतिशत हिस्से को उद्योग, स्टार्ट-अप और शिक्षा जगत के लिए खोल दिया जाएगा।
जैव प्रौद्योगिकी
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- दिसंबर 2022 में यूनाइटेड किंगडम के वैज्ञानिकों ने टी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया से पीडि़त मरीज में कैंसर थेरेपी के एक नए रूप ‘बेस एडिटिंग’ का पहली बार सफल परीक्षण किया है। टी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया को कैंसर का एक रूप माना जाता है।
- ह्यूमन सेल एटलस एटलस में मानव फेफड़े, त्वचा, हृदय और रक्त सहित विभिन्न ऊतकों और अंगों से लगभग 500,000 कोशिकाओं का मानचित्रण शामिल हैं। यह एक वैश्विक पहल और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी संघ है, जिसकी स्थापना 2016 में हुई थी।
- चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग को ‘लाल‘ जैव प्रौद्योगिकी के रूप में भी जाना जाता है। लाल जैव प्रौद्योगिकी (रेड बायोटेक्नोलॉजी) का दूसरा प्रमुख क्षेत्र जीन थेरेपी है, जो आनुवंशिक रोगों एवं कैंसर जैसे कुछ अन्य रोगों के निदान एवं उपचार से संबंधित है।
समुद्र विज्ञान
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- अगस्त 2022 में, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा 5270 मीटर की गहराई पर डीप-सी माइनिंग सिस्टम का परीक्षण किया गया।
- यह सीबेड क्रॉलर आधारित खनन मशीन का सबसे गहरे पानी में परीक्षण है। वर्तमान परीक्षण मध्य हिंद महासागर में भारतीय तट से लगभग 1700 समुद्री मील (लगभग 3,000 किमी) की दुरी पर की गई।
- भारत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण द्वारा वर्ष 1987 में ‘प्रमुख निवेशकर्ता’ का दर्जा प्राप्त हुआ था।
- पॉली-मेटैलिक नॉड्यूल्स में मैंगनीज और लोहे के अलावा, निकल, तांबा, कोबाल्ट, सीसा, मोलिब्डेनम, कैडमियम, वैनेडियम, टाइटेनियम पाए जाते हैं और यह आर्थिक और सामरिक महत्व के माने जाते हैं।
पर्यावरण व पारिस्थितिकी
जलवायु परिवर्तन मुख्य रूप से विकसित देशों के ग्रीनहाउस गैसों के काफी लम्बे समय से चले आ रहे और उच्च प्रति व्यक्ति वार्षिक उत्सर्जन दोनों के असमान अनुपात में उच्च संचयी उत्सर्जन के कारण हो रहा है। संचयी वैश्विक उत्सर्जन (वर्ष 1850-2019 की अवधि के लिए) में मात्र लगभग 4 प्रतिशत का योगदान देने और विश्व औसत से इसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अत्यधिक कम होने के बावजूद, भारत इस समस्या की वैश्विक प्रकृति होने के कारण विश्व के सबसे प्रभावित राष्ट्रों में से एक है।
अगस्त 2022 में भारत ने यूएनएफसीसीसी के पार्टियों के सम्मेलन की 26वीं बैठक में व्यक्त किए गए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण (विजन) के अनुरूप राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित किए गए योगदान (एनडीसी) को अद्यतन किया। अक्षय ऊर्जा के स्रोतों में होने वाले परिवर्तन के संदर्भ में, भारत ने वर्ष 2030 से पहले ही गैर-जीवाश्म ईंधन से 40 प्रतिशत संस्थापित विद्युत क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसने अपने लक्ष्य में 50 प्रतिशत की वृद्धि की है, जिससे औसत उत्सर्जन दर में उल्लेखनीय कमी को आएगी। वर्ष 2047 तक भारत को ऊर्जा स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन और हरित हाइड्रोजन नीति शुरू की गई है। भारत की दीर्घावधि कम उत्सर्जन विकास रणनीति (एलटी-एलईडीएस) में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई पड़ती है।
पर्याप्त और वहनीय वित्त की उपलब्धता भारत की जलवायु संबंधी कार्रवाइयों में एक बाधा बनी हुई है। देश ने अब तक अपनी जरूरतों को बड़े पैमाने पर घरेलू स्रोतों से ही पूरा किया है। जलवायु संबंधी कार्रवाइयों के लिए वित्त एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए, देश ने जलवायु संबंधी कार्रवाई के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड सहित निजी पूंजी जुटाने की दिशा में अपने प्रयासों को बढ़ाया है। इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट एसोसिएशन (आईसीएमए) ग्रीन बॉन्ड प्रिंसिपल्स (2021) के अनुपालन में परिवर्ती के लिए ढांचा जारी किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पहल उल्लेखनीय रही है। देश के विभिन्न अंतर-सरकारी संगठनों के गठन और इनका सुदृढ़ीकरण करते हुए वैश्विक कार्रवाइयों में भारत सक्रिय रूप से लगा हुआ है।
सामयिक मुद्दे
पर्यावरण, हमारे चारों और मौजूद जीव-अजीव घटकों का आवरण, जिससे हम घिरे हुए हैं जैसे कि जीव-जंतु, जल, पौधे, भूमि और हवा जो प्रकृति के संतुलन को अच्छा बनाएं रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जलवायु परिवर्तन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- वित्तीय वर्ष 2023-24 के केंद्रीय बजट में गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भारत की निर्भरता को कम करने के उपायों की घोषणा की गई है।
- इनमें सौर फोटोवोल्टिक पैनलों के घरेलू निर्माण (Domestic manufacture of photovoltaic panels) में वृद्धि, कोयले से चलने वाले ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास पेलेट का उपयोग, शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों के उच्च उपयोग की ओर एक बदलाव को बढ़ावा देना और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए ‘ग्रीन बॉन्ड’ शामिल हैं।
- बजट 2023-24 में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 35,000 करोड़ और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को 97,000 करोड़ रुपए के आवंटन किया गया है।
प्रदूषण
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- सरकार नेबजट 2023-24 मेंदेश में कार्बन उत्सर्जन कम करने के दृष्टिकोण के तहत 19,744 करोड़ रुपए के शुरुआती परिव्यय के साथ राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन को भी स्वीकृति दी है।
- पर्यावरण प्रदूषण एक ऐसी सामाजिक समस्या है, जिससे मानव सहित समस्त जैव जगत के लिए जीवन की कठिनाइयां बढ़ती जा रही हैं।
- वर्ष 2022 में जारी विश्व स्वस्थ संगठन के रिपोर्ट के अनुसार 60% से अधिक दक्षिण एशियाई प्रतिवर्ष PM2.5 के औसत 35 ug/m3 के समीपहैं।
- राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत सभी स्थानों पर नियमित निगरानी के लिये चार वायु प्रदूषकों अर्थात् SO2, NO2, PM-10 और PM 2.5 की पहचान की गई है।
सतत विकास
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट 2023-24 में गोबरधन योजनाः चक्रीय अर्थव्यवथा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गोबरधन (गैल्वनाइजिंग आर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) नामक योजना के तहत 10,000 हजार करोड़ रुपए के कुल निवेश के साथ 500 नए ‘अपशिष्ट से आमदनी’ संयंत्र स्थापित किये जाएंगे।
- प्राकृतिक और बॉयोगैस का विपणन कर रहे सभी संगठनों के लिये 5 प्रतिशत का कम्प्रेस्ड बायोगैस अधिशेष भी लाया जाएगा।
- सतत विकास से अभिप्राय ऐसे विकास से है, जो हमारी भावी पीढि़यों की अपनी जरूरतें पूरी करने की क्षमता को प्रभावित किए बिना वर्तमान समय की आवश्यकताएं पूरी करे। यह एक ऐसी अवधारणा है, जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य, सामाजिक रूप से स्वीकार्य और पर्यावरण की दृष्टि से संतुलित हो।
- गरीबी में कमी, सामाजिक समानता और पर्यावरण सुरक्षा पारस्परिक रूप से एक-दूसरे से सम्बद्ध है।
- सतत विकास के लिए स्थानीय संसाधनों का विकास, स्थानीय उत्पाद में वृद्धि, रोजगार के अवसरों में वृद्धि, गरीबी में कमी, सामाजिक समानता और पर्यावरण सुरक्षा अपेक्षित है। सतत विकास को प्राप्त करने के लिए निर्णय निर्माण में व्यापक जन-भागीदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व को मूलभूत आधार माना गया है।
आपदा प्रबंधन
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- आपदा प्रबंधन प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं के दौरान जीवन और संपत्ति की रक्षा करने और आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष तैयारी की प्रक्रिया है।
- आपदा प्रबंधन सीधे खतरे को खत्म नहीं करता है, बल्कि यह योजना बनाकर जोखिम को कम करने में मदद करता है। सूचना तंत्र आपदा प्रबंधन कार्य कुशलता को मजबूत बनाता है।
- आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता ही सुरक्षा प्रदान करेगा। हमारे देश भारत में आपदा पर निगरानी के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) जिम्मेदार हैं। NDMA एक संघठन हैं, जो आपदा से होने वाले जोखिम को कम करने, बचाव को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम चलाता है।
- भारत आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये सेंडाई फ्रेमवर्क (SFDRR) का भी एक हस्ताक्षरकर्त्ता है, जो आपदा प्रबंधन लक्ष्यों का निर्धारण करता है।
जैव विविधता
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- जैव विविधता जीवन और विविधता के संयोग से निर्मित शब्द है, जो आम तौर पर पृथ्वी पर मौजूद जीवन की विविधता और परिवर्तनशीलता को संदर्भित करता है।
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी), के अनुसार जैव विविधता विशिष्टतया अनुवांशिक, प्रजाति तथा पारिस्थितिकि तंत्र के विविधता का स्तर मापता है। जैव विविधता किसी जैविक तंत्र के स्वास्थ्य का द्योतक है। पृथ्वी पर जीवन आज लाखों विशिष्ट जैविक प्रजातियों के रूप में उपस्थित है।
अपशिष्ट प्रबंधान
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- विश्व बैंक के अनुसार, तीव्र नगरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण 2025 तक भारत में प्रतिदिन का अपशिष्ट उत्पादन 377,000 टन तक पहुंच जाएगा।
- अपशिष्ट-से-ऊर्जा परियोजनाओं से लगभग 88.4 मेगावाट (MW) ऊर्जा उत्पन्न की जा रही है।
- भारत में प्रति दिन 150,000 टन नगरपालिका ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है और मुंबई विश्व का पांचवां सबसे अधिक ठोस अपशिष्ट वाला शहर है।
आर्द्रभूमि संरक्षण
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- मिष्टी योजना केंद्रीय बजट 2023-24 में भारत सरकार द्वारा आरम्भ की गई एक नई योजना है, जो भारत के समुद्र तट के साथ-साथ साल्ट भूमि पर मैंग्रोव वृक्षारोपण की सुविधा प्रदान करेगा।
- यह योजना ‘मनरेगा, कैम्पा फंड और अन्य स्रोतों के बीच अभिसरण’ के माध्यम से संचालित होगी।
- इसका लक्ष्य तटीय मैंग्रोव वनों के गहन वनीकरण का है।
- भारत के पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर इस तरह के वन हैं, बंगाल में सुंदरबन सबसे बड़े मैंग्रोव वनों में से एक है।
- अमृत धरोहर योजना केंद्रीय बजट 2023-24 में भारत सरकार द्वारा आरम्भ की गई एक नई योजना है। अमृत धरोहर योजना को आर्द्र भूमि के इष्टतम उपयोग को बढ़ावा देने तथा जैव-विविधता, कार्बन स्टॉक, पर्यावरणीय-पर्यटन के अवसरों तथा स्थानीय समुदायों के लिए आय सृजन बढ़ाने के लिए अगले तीन वर्षों में कार्यान्वित किया जाएगा। योजना को अगले तीन साल में लागू किया जाएगा।
- आर्द्रभूमियों के इष्टतम उपयोग को बढ़ावा देकर उनका संरक्षण करना है।
- 2030 सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए यह योजना आवश्यक है।
- इन लक्ष्यों को भारत ने 2015 में संयुक्त राष्ट्र के अन्य सदस्यों के साथ अपनाया था।
- SDGs का उद्देश्य शांति और समृद्धि प्रदान करना है।
- अमृत धरोहर योजना भारत को SDGs लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी।
वन्यजीव संरक्षण
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- प्रकृति और अन्य वन्यजीव प्रजातियों के महत्व को पहचानने के लिए वन्यजीवों का संरक्षण आवश्यक है।
- लुप्तप्राय पौधों और जानवरों की प्रजातियों को उनके प्राकृतिक निवास स्थान के साथ रक्षा करना भी जरूरी है।
- सबसे प्रमुख चिंता का विषय यह है कि वन्यजीवों के निवास-स्थान की सुरक्षा किस प्रकार की जाए, ताकि भविष्य में वन्यजीवों की पीढि़यां और यहां तक कि इंसान भी इसका आनंद ले सकें।
- हमारे वन्य जीवन और जीवों की लुप्तप्राय प्रजातियों को विशेष कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए वर्ष 1972 में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 नामक एक व्यापक कानून बनाया गया था।
जैव अर्थव्यवस्था
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- सरकार ने बजट 2023-24 में ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) सहित प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और कम लागत वाले अंतरराष्ट्रीय वित्त की मदद से वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा संसाधनों से लगभग 50 प्रतिशत संचयी विद्युत ऊर्जा संस्थापित क्षमता प्राप्त प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- केन्द्रीय बजट 2023-24 में सरकार ने यह घोषणा की है कि अगले तीन वर्षों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिये प्रोत्साहित कर उनकी सहायता करेगी। इसके लिये राष्ट्रीय स्तर पर वितरित सूक्ष्म उर्वरक एवं कीटनाशक विनिर्माण नेटवर्क तैयार करते हुए 10,000 बायो-इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किये जाएंगे।
ऊर्जा सुरक्षा
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट2023-24 में ऊर्जा संक्रमण और शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्रणाली, जैसे उद्देश्यों के लिए 35,000 करोड़ रुपए के प्राथमिकता वाले पूंजी निवेश का प्रावधान किया गया है।
- सरकार 4,000 मेगावाट क्षमता की बैटरी ऊर्जा की स्थापना का समर्थन करेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लीथियम बैटरियों पर लगने वाले सीमा शुल्क को 21 से कम करके 13 फीसदी कर दिया गया है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते होंगे।
- ऊर्जा संक्रमण और शुद्ध शून्य उद्देश्यों तथा ऊर्जा सुरक्षा (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय) की दिशा में प्राथमिकता वाले पूंजी निवेश के लिये 35,000 करोड़ रुपए आवंटित किया गया है।
- बजट 2023-24 में लद्दाख से 13 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी और ग्रिड एकीकरण हेतु अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के लिये 20,700 करोड़ रुपए (केंद्रीय सहायता- 8,300 करोड़ रुपए)।
- ऊर्जा संक्रमण और शुद्ध शून्य उद्देश्यों तथा ऊर्जा सुरक्षा (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय) की दिशा में प्राथमिकता वाले पूंजी निवेश के लिये 35,000 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है।
कला एवं संस्कृति
किसी भी देश के विकास में कला का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह साझा दृष्टिकोण, मूल्य, प्रथा एवं एक निश्चित दृष्टकोण को प्रदर्शित करता है। सभी आर्थिक, सामाजिक एवं अन्य गतिविधियों में संस्कृति एवं रचनात्मकता का समावेश होता है। विविधताओं का देश, भारत अपनी विभिन्न संस्कृतियों के लिए जाना जाता है।
भारत में गीत-संगीत, नृत्य, नाटक-कला, लोक परंपराओं, कला-प्रदर्शन, धार्मिक-संस्कारों एवं अनुष्ठानों, चित्रकारी एवं लेखन के क्षेत्रों में एक बहुत बड़ा संग्रह मौजूद है, जो मानवता की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ के रूप में जाना जाता है। इनके संरक्षण हेतु संस्कृति मंत्रालय ने विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं को कार्यान्वित किया है, जिसका उद्देश्य कला-प्रदर्शन, दर्शन एवं साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तियों, समूहों एवं सांस्कृतिक संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। हमारी संस्कृति में आज भी वैदिक परम्परा, जो हजारों वर्ष पूर्व थी, उसके गुण विद्यमान हैं।
भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। प्रत्येक देश की अलग पहचान उसकी संस्कृति के कारण होती है। चूंकि प्रत्येक देश के नागरिकों का व्यवहार उनकी संस्कृति द्वारा निर्धारित मूल्यों के अनुरूप होता है, जो कि सम्पूर्ण राष्ट्र के व्यक्तित्व का प्रदर्शन करते हैं। संसार में भारतीय संस्कृति का सबसे उच्च स्तर का होना स्वीकार किया गया है, जिसका मूलाधार यहां की संस्कृति के शाश्वत एवं चिरस्थायी मूल्य है। भारतीय संस्कृति मनुष्य और समाज के मध्य संबंध का एक सुव्यवस्थित आदर्श है, जिसमें परिवर्तनों को स्वीकार करने की अदम्य क्षमता है।
सामयिक मुद्दे
- कला एवं संस्कृति किसी समाज एवं देश की अमूल्य धरोहर होती है। यह हमारे समाज के लिए आईना होती है, जिसके माध्यम से हम अपने इतिहास एवं जीवंतता को महसूस करते हैं और इस पर गौरवान्वित होते हैं।
भारतीय विरासत
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- संस्कृति मंत्रालय के वार्षिक बजट 2023-24 का परिव्यय 3,399.65 करोड़ रुपये रखा गया है। इससे पहले बजट योजना 2022-2023 में स्वीकृत परिव्यय का आंकड़ा 3,009.05 करोड़ रुपये था। यानी कि वित्तीय वर्ष 2022-23 के वार्षिक परिव्यय की तुलना में 2023-24 में वार्षिक परिव्यय 12.97 फीसदी अधिक है।
- बजट-2023-24 में एक डिजिटल पुरालेख संग्रहालय भारत शेयर्ड रिपॉजिटरी ऑफ इंस्क्रिप्शन (भारतश्री) की स्थापना की घोषणा की गई है। इसके तहत पहले चरण में एक लाख प्राचीन अभिलेखों को डिजिटल रूप दिया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) हैदराबाद में भारतश्री की स्थापना करेगा।
- वित्तीय वर्ष 2023-24 में मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए 22.19 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 650.74 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
- कला संस्कृति विकास योजना, संग्रहालय का विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संस्कृति मानचित्रण पर राष्ट्रीय मिशन, शताब्दी व वर्षगांठ समारोह योजना और पुस्तकालयों व अभिलेखागार का विकास।
- वित्तीय वर्ष 2022-23 के संशोधित परिव्यय और वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट परिव्यय में मंत्रालय की शताब्दी व वर्षगांठ समारोह योजना के तहत स्मरण उत्सव गतिविधियों को आयोजित करने के लिए एक विशेष प्रावधान किया गया है।
- वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए गणमान्य व्यक्तियों की शताब्दी/जन्म जयंती मनाने के लिए 185 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
त्योहार व उत्सव
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- 12 से 16 जनवरी, 2023 तक देश के पूर्वाेत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में वार्षिक परशुराम कुंड महोत्सव 2023 का आयोजन किया गया। तमिलनाडु के विभिन्न मंदिरों में कार्तिगई दीपम उत्सव मनाया गया। कार्तिगई दीपम को तमिलनाडु में पारंपरिक त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
- 27 दिसंबर, 2022 को पश्चिमी ओडिशा के बरगढ़ शहर में विश्व का सबसे बड़ा ओपन-एयर थिएटर माने जाने वाले ‘धनु यात्र की शुरुआत की गई। बरगढ़ नगरपालिका के चारों ओर 8 किमी. के दायरे में प्रदर्शित किया जाने वाला यह दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-एयर थिएटर है, जिसका उल्लेऽ गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
- संस्कृति मंत्रलय ने 2 अगस्त, 2022 को नई दिल्ली में पिंगली वेंकैया की 146वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्र के लिए उनके योगदान के लिए सांस्कृतिक एवं संगीतमय प्रदर्शनों से भरे ‘तिरंगा उत्सव’ का आयोजन किया।
चित्रकला
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- मई 2022 में प्रधानमंत्री मोदी ने डेनमार्क यात्र के दौरान डेनमार्क की महारानी मार्ग्रेथ द्वितीय को एक ‘रोगन पेंटिंग’ भेंट की। गुजरात के कच्छ में प्रचलित रोगन चित्रकारी कपड़े पर की जाने वाली एक चित्रकला है।
- ओडिशा और झारखंड के आदिवासी संथाली समुदाय अपने पारंपरिक सोहराई भित्ति चित्रें को आधुनिकता में बदलने के अपने तौर तरीकों में बदलाव ला रहे हैं।
- महाराजा सरफोजी द्वितीय की चोरी की गई 19वीं सदी की उत्कृष्ट पेंटिंग का पता एक अमेरिकी संग्रहालय में लगाया गया है। इस पेंटिंग को सरस्वती महल से चुराया गया था।
- इतिहासकारों के अनुसार यह चित्र, जिसमें राजा सरफोजी और उनका छोटा बेटा है, संभवतः 1822 और 1827 के बीच चित्रित किया गया था और इसे सरस्वती महल में रखा गया था।
नृत्यकला
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- थेय्यम केरल और कर्नाटक राज्य का एक प्रसिद्ध आनुष्ठानिक नृत्य पूजा का कला रूप है, जिसकी उत्पत्ति उत्तरी केरल हुई थी। इसमें हजार साल पुरानी परंपराएं और रीति-रिवाज शामिल होते हैं।
- कराकट्टम केरल में, त्योहारों, सम्मेलनों, रोड शो और मुख्य रूप से मरिअम्मन त्योहारों पर किया जाने वाला लोक नृत्य (विसा कंदबम) है। कराकट्टम लोक नृत्य ज्यादातर तमिलनाडु में प्रसिद्ध है, यह केरल के विभिन्न हिस्सों में भी किया जाता है।
- भरतमुनि की कृति नाट्यशास्त्र में नृत्यकला का अत्यन्त प्राचीनतम उल्लेऽ मिलता है।
- नृत्य के दो स्वरूप हैं- प्रथम महादेव के अनुचर तण्डु द्वारा प्रचारित तांडव नृत्य एवं दूसरा वाणदुहिता ऊषा द्वारा प्रचारित सुकुमार कोमल तथा शृंगार-रसोद्दीपक नृत्य लास्य। भारत में नृत्य की परंपरा प्राचीन समय से रही है।
मूर्तिकला
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- लंदन में स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा हाल ही में 10वीं शताब्दी की पत्थर की बनी ‘बकरी के सिर वाली योगिनी’ की मूर्ति नई दिल्ली के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजी गई।
- 2013 में पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने भैंस के सिर वाली एक वृषणा योगिनी की एक ऐसी ही एक मूर्ति बरामद की गई थी, जो लोखरी गांव के उसी मंदिर से चुराई गई थी। इस वृषणा योगिनी की मूर्ति को सितंबर 2013 में नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में स्थापित किया गया था।
स्थापत्य कला
नवीनतम व महत्वपूर्ण तथ्य
- अक्टूबर, 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मोढेरा में स्थित सूर्य मंदिर में हैरिटेज लाइटिंग का उद्घाटन किया। यह भारत का पहला विरासत स्थल बन गया है, जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित है।
- यह मंदिर उड़ीसा के कोणार्क में स्थित सूर्य मंदिर से प्रेरित है। स्कंद पुराण और ब्रह्म पुराण जैसे शास्त्रें में मोढेरा का उल्लेख मिलता है।
- 28 सितंबर, 2022 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 26 बौद्ध गुफाओं की खोज की।
- अजंता की गुफाएं उत्तर-मध्य महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद जिले में अजंता गांव के पास स्थित हैं।
- एलोरा महाराष्ट्र की चरणानंद्री पहाडि़यों में रॉक-कट मंदिरों की श्रृंखला है।
- एलीफेंटा गुफाएं पश्चिमी भारत में एलीफेंटा द्वीप पर स्थित हैं।
- 18वीं शताब्दी तक भारत में इमारतें मुख्यतया हिन्दू और मुस्लिम शैली के अनुसार तैयार की गई।