भारत एशिया इन्फ्राट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB)

इसकी स्थापना AIIB आर्टिकल्स ऑफ एग्रीमेंट (25 दिसंबर, 2015 से लागू) नामक एक बहुपक्षीय समझौते के माध्यम से की गई है। समझौते के पक्षकारों(57 संस्थापक सदस्य) में बैंक की सदस्यता अनिवार्य है। इसका मुख्यालय बीजिंग में है और जनवरी 2016 में इसका परिचालन शुरू हुआ।

  • रूस, जर्मनी, इटली और यूनाइटेड किंगडम सहित G-20 के 14 सदस्य AIIB के भी सदस्य हैं। बैंक में 26.61% वोटिंग शेयरों के साथ चीन सबसे बड़ा शेयरधारक है, उसके बाद क्रमशःभारत (7.6%), रूस (6.01%) एवं जर्मनी(4.2%) का स्थान है।

आर्थिक योगदानः बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के मामले में AIIB द्वारा वित्तपोषण का भारत सबसे बड़ा लाभार्थी है। AIIB ने भारत में पाँच परियोजनाओं को मंजूरी दी है; जो इस प्रकार हैं-

  • इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फंड।
  • आंध्र प्रदेश 24 × 7 - पावर फॉर ऑल प्रोजेक्ट।
  • बैंगलोर मेट्रो रेल परियोजना (USD 335 मिलियन)।
  • ट्रांसमिशन सिस्टम सुदृढ़ीकरण परियोजना, गुजरात
  • ग्रामीण सड़क (MMGSY) परियोजना (गुजरात राज्य के 33 जिलों में 4,000 गाँवों को सभी मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिये 13 साल के ऋण के माध्यम से 329 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद प्रदान की गई है)।

रन ऑफ़ द रिवर प्रोजेक्ट

यह जल-विद्युत उत्पादन का एक प्रकार है। इसमें विद्युत उत्पन्न करने के लिए किसी नदी के प्राकृतिक और अधोमुखी प्रवाह (निचली धारा) का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार, इसमें जलाशय निर्मित करने की आवश्यकता नहीं होती।


भारत-चीन व्यापार का ऐतिहासिक तथ्य

वर्ष 1984 में भारत और चीन द्वारा एक व्यापार समझौता किया गया था, जिसमें दोनों देशों को मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा प्रदान किया गया।

  • दोहरे कराधान समझौतेः भारत-चीन के मध्य वर्ष 1992 में पूर्णतः द्विपक्षीय व्यापार सम्बन्ध स्थापित हुआ तथा दोनों देशों के मध्य 18 जुलाई, 1994 में दोहरे कराधान समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जो नवम्बर 1994 से लागू हुआ।
  • बैंकाक समझौताः यह समझौता दोनों देशों के मध्य वर्ष 2003 में किया गया, जिसके अनुसार दोनों देशों ने एक-दूसरे को कुछ व्यापारिक मान्यता प्रदान की तथा दोनों ने सिल्क रूट के माध्यम से खुली सीमा आधारित व्यापार करने के लिए समझौता किया।
  • अनौपचारिक शिखर सम्मेलन 2019 के दौरान व्यापार संबंधों में सुधार हेतु अपनी प्रतिबद्धता को दोनों देशों द्वारा दोहराया गया। दोनों देशों ने उन्नत व्यापार और वाणिज्यिक संबंधों की प्राप्ति तथा दोनों के मध्य व्यापार को बेहतर ढंग से संतुलित करने के उद्देश्य से एक उच्च-स्तरीय आर्थिक एवं व्यापार वार्ता तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्ति की, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत और चीन के मध्य एक ‘विनिर्माण साझेदारी’ का निर्माण करना है।