जून 1954 में चीनी प्रधान मंत्री झोउ एनलाई ने भारत का दौरा किया था।
प्रधान मंत्री नेहरू ने अक्टूबर 1954 में चीन का दौरा किया।
प्रधान मंत्री झोउ एनलाई ने जनवरी 1957 और अप्रैल 1960 में फिर से भारत का दौरा किया।
1962 में 20 अक्टूबर को हुए भारत-चीन संघर्ष ने द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर झटका दिया। अगस्त 1976 में भारत और चीन ने राजदूत संबंधों को बहाल किया।
प्रधान मंत्री राजीव गांधी ने दिसंबर 1988 में चीन का दौरा किया। इस यात्र के दौरान, दोनों पक्ष सभी क्षेत्रें में द्विपक्षीय संबंधों को विकसित और विस्तारित करने पर सहमत हुए।
प्रधान मंत्री नरसिम्हा राव ने सितंबर 1993 में चीन का दौरा किया। भारत-चीन सीमा क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति बनाए रखने पर समझौता हुआ।
राष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ने मई 1992 में चीन की राजकीय यात्रा की। यह भारत की ओर से चीन की पहली राष्ट्र स्तरीय यात्रा थी।
नवंबर 1996 में राष्ट्रपति जियांग जेमिन की भारत की राजकीय यात्रा इसी तरह पीआरसी के किसी राष्ट्राध्यक्ष द्वारा भारत की पहली यात्रा थी। उनकी यात्रा के दौरान जिन चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, उनमें एलएसी के साथ सैन्य क्षेत्र में सीबीएम पर एक समझौता शामिल था, जिसमें दोनों सेनाओं के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने और सहयोग और विश्वास को बढ़ावा देने के लिए ठोस उपायों को अपनाना शामिल था।
11 मई, 1998 को परमाणु परीक्षणों के बाद विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने जून 1999 में चीन का दौरा किया।
मई-जून 2000 में राष्ट्रपति के. आर. नारायणन की चीन यात्रा ने उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान का मार्ग प्रशस्त किया।
प्रधानमंत्री झू रोंगजी ने जनवरी 2002 में भारत का दौरा किया।
प्रधान मंत्री ए.बी. वाजपेयी ने जून 2003 में चीन का दौरा किया था, इस दौरान संबंधों और व्यापक सहयोग के सिद्धांतों पर हस्ताक्षर किए गए थे।