राज्यों की बीच सीमा विवाद

हाल ही में कई राज्यों, जैसे महाराष्ट्र-कर्नाटक, असम-नागालैंड, असम-मिजोरम आदि के बीच सीमा टकराव देखने को मिला है।

सीमा विवाद क्या है?

  • राज्य, प्रायः भाषा, क्षेत्रीयता तथा ऐतिहासिकता के आधार पर पडोसी राज्यों के भू-भाग पर अपना दावा पेश करते हैं। यद्यपि राज्यों की सीमाओं का निर्धारण भाषाई तथा प्रशासनिक सुविधा के आधार पर किया गया है।

विवादों की उत्पत्ति के कारण

  • 1950 के दशक में राज्यों के पुनर्गठन में कई अंतर-राज्य सीमा विवादों की जड़ें भाषा पर आधारित है।
  • कई राज्यों का सीमांकन अंग्रेजों (औपनिवेशिक विभाजन) द्वारा बनाई गई जिला सीमाओं पर आधारित थे।
  • संसाधनों का असमान बंटवारा, जैसे- नदी के पानी तक पहुंच को लेकर।
  • भूमि संबंधी विवादों को लेकर संवैधानिक तंत्र का अभाव।
  • राजनीतिक दलों द्वारा सीमा विवाद का इस्तेमाल राजनीतिक अवसरवादिता के लिए।

विभिन्न अंतर्राज्यीय विवाद

  • महाराष्ट्र-कर्नाटक-‘बेलगावी’ जिले में भाषा से संबंधित विवाद।
  • असम-अरुणाचल प्रदेश- पारम्परिक क्षेत्र से संबंधित विवाद।
  • असम और मेघालय के बीच 12 क्षेत्रें से संबंधित विवाद।
  • असम-मिजोरम के बीच 3 प्रमुख जिलों का विवाद।
  • नागालैंड-असम के बीच एक गांव से संबंधित विवाद।
  • हरियाणा-हिमाचल प्रदेश का परमाणु क्षेत्र से संबंधित विवाद।
  • लद्दाख-हिमाचल प्रदेश के बीच सरचू क्षेत्र से संबंधित विवाद।

चुनौतियां

  • भूमि संबंधी विवादों पर संवैधानिक तंत्र का अभाव, जिसके कारण लम्बे समय तक सीमा विवाद का समाधान न निकलना।
  • विवादों को सुलझाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं, जिससे राजनीतिक दलों द्वारा इसका इस्तेमाल राजनीतिक अवसरवादिता के लिए किया जा रहा है।

क्षेत्रवादः इससे राज्यों के बीच आपसी सहयोग प्रभावित होता है, और नृजातीय संघर्ष तथा मतभेद को बढ़ावा मिलता है।

  • इससे विवादित क्षेत्र की विकास प्रक्रिया पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे वहां के लोग दूसरे क्षेत्रें की ओर पलायन करते हैं।

सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयास

  • राज्यों के सहमत होने पर संसद राज्य की सीमाओं को बदलने के लिए एक कानून ला सकती है। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्यों के बीच समितियों का गठन की सिफारिश की गई है।
  • दो या दो से अधिक राज्यों के बीच किसी भी प्रकार के विवाद को सुलझाना सर्वोच्च न्यायालय का मूल क्षेत्रधिकार है।
  • संविधान का अनुच्छेद 263, राष्ट्रपति को राज्यों के बीच विवादों के समाधान के लिये अंतर-राज्यीय परिषद गठित करने की शक्ति देता है।
  • राज्यों के बीच सीमा विवादों को वास्तविक सीमा स्थानों के उपग्रह मानचित्रण का उपयोग करके सुलझाया जा सकता है।
  • केंद्र व राज्य सरकारों दोनों को सहकारी संघवाद के लोकाचार को आत्मसात करने की आवश्यकता है।
  • राज्यों के लिये सामान्य चिंता के मामलों पर चर्चा करने हेतु क्षेत्रीय परिषदों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।