एक उम्मीदवार एक निर्वाचन क्षेत्र

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव कानून में उस प्रावधान को रद्द करने से इनकार कर दिया, जो उम्मीदवारों को एक साथ दो निर्वाचन क्षेत्रें से चुनाव लड़ने की अनुमति देता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कानून और न्याय मंत्रलय से एक उम्मीदवार के एक ही सीट से चुनाव लड़ने संबंधी प्रावधान के लिये कहा है। दायर याचिका में अदालत से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33(7) को अमान्य और अधिकारातीत घोषित करने की मांग की गई थी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने तर्क दिया कि “यह एक नीतिगत मामला है और राजनीतिक लोकतंत्र से संबंधित मुद्दा है। इसलिए इसका फैसला संसद को करना है।’’

प्रावधान

  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 की धारा 33 (7) के अनुसार, एक उम्मीदवार अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रें से चुनाव लड़ सकता है। वर्ष 1996 तक अधिक निर्वाचन क्षेत्रें की अनुमति दी गई थी।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) की धारा 70 में यह निर्धारित किया गया है कि एक उम्मीदवार एक समय में केवल एक सीट पर अपना दावा कर सकता है, भले ही वे एक से अधिक सीटों के लिए चुने गए हों या नहीं।

कई सीटों से चुनाव लड़ने के पक्ष में तर्क

  • उम्मीदवारों को दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रें से चुनाव लड़ने से रोकना। किसी व्यक्ति के चुनाव लड़ने के अधिकार का उल्लंघन करता है और उम्मीदवारों की राजनीतिक पसंद को कम करता है।
  • यह किसी भी बड़ेहार के खिलाफ उम्मीदवार को बचाव बीमा प्रदान करता है।
  • यह उम्मीदवारों को एक चुनावी प्रतियोगिता में एक से अधिक क्षेत्रें पर ध्यान देने की अनुमति देता है।
  • एक उम्मीदवार, दो निर्वाचन क्षेत्र प्रणाली “राजनीति के साथ-साथ उम्मीदवारों के लिये व्यापक विकल्प” प्रदान करता है।

कई सीटों से चुनाव लड़ने के खिलाफ तर्क

  • जब कोई उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव लड़ता है, तो यह अनिवार्य है कि उसे दोनों सीटों में से एक को खाली करना होगा, यदि वह दोनों सीटें जीतता है।
  • रिक्ति के विरुद्ध उपचुनाव कराने के लिए सरकारी खजाने जनशक्ति और अन्य संसाधनों पर परिणामी अपरिहार्य वित्तीय बोझ पड़ता है।
  • यह उस निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के साथ नाइंसाफी है, जहां से उम्मीदवार इस्तीफा दे रहा है।
  • बार-बार चुनाव न केवल अनावश्यक और महंगे हैं, बल्कि इससे मतदाताओं की चुनावी प्रक्रिया में रुचि भी कम होगी।
  • निरपवाद रूप से, उप-चुनाव में सबसे अधिक संभावना है कि कुछ दिन पहले के चुनाव की तुलना में कम मतदाता मतदान करेंगे।

सुझाव

  • उम्मीदवारों को एक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने से रोकने के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33(7) में संशोधन किया जाना चाहिए।
  • दो सीटों से चुनाव लड़ने और जीतने वाले व्यक्ति को एक निर्वाचन क्षेत्र छोड़ने के बाद उपचुनाव का खर्च वहन करना होगा।
  • चुनाव आयोग ने धारा 33 (7) में संशोधन करने की सिफारिश की, ताकि एक उम्मीदवार को केवल एक सीट से चुनाव लड़ने की अनुमति मिल सके।इसने वर्ष 2004, 2010, 2016 और वर्ष 2018 में ऐसा किया।

आगे की राह

  • एक ऐसी प्रणाली विकसित की जानी चाहिये। जिसमें यदि कोई उम्मीदवार दो निर्वाचन क्षेत्रें से चुनाव लड़ता है और दोनों में जीत हासिल करता है, तो उसे किसी एक निर्वाचन क्षेत्र में बाद के उपचुनाव कराने का वित्तीय भार वहन करना होगा। यह राशि विधानसभा चुनाव के लिये 5 लाख रुपए और लोकसभा चुनाव के लिये 10 लाख रुपए होगी।