प्रभावी लोकतंत्र और निर्वाचन सुधार

लोकतंत्र को प्रभावी बनाने में स्वतंत्र और संप्रभु निर्वाचन प्रणाली का योगदान काफी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह लोगों की इच्छा की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सरकार को वैधता प्रदान करती है। चुनाव एक लोकतांत्रिक गणराज्य के गठन की प्रक्रिया का वह आवश्यक तत्व है, जिसके बिना लोकतंत्र महत्वहीन हो जाएगा, अर्थात् चुनाव या निर्वाचन लोकतंत्र के प्राण तत्व की भांति है।

  • लोकतंत्र में निर्वाचन का महत्व निम्न कारणों से है-
    • इससे सत्ता परिवर्तन अहिंसक तरीके से होता है।
    • उत्तरदायी और जवाबदेह सरकार का निर्माण करती है।
    • यह राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाती है।
    • यह सामाजिक और राजनीतिक एकीकरण को सुगम बनाती है।
    • यह राजनीतिक दलों को स्वयं आत्म-निरीक्षण करने का अवसर देती है।
    • यह मानव को समाज के लिए कार्य करने का अवसर देता है।
    • यह व्यक्ति को स्थानीय दायरे से ऊपर उठाकर राष्ट्रीयता के दायरे तक ले जाते हैं।
    • इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है।
    • ये सरकार में स्थायित्व लाता है।
    • ये जनता के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का संचार करता है।
    • यह राष्टवाद और देशभक्ति का प्रतीक है।
    • लोक कल्याणकारी कार्य को प्रोत्साहन देता है।

निर्वाचन व्यवस्था के सम्मुख प्रमुख चुनौतियां: राजनीति का अपराधीकरण, निर्वाचन व्यय की समस्या, हिंसा व जाली मतदान, निर्वाचन नामावलियों से सम्बन्धित त्रुटियाँ, मत व परिणाम के मध्य असंतुलन, राजनीतिक दलों की बढ़ती संख्या, विधिहीन आचार संहिता, सरकारी मीडिया का दुरुपयोग, मतदाता पहचान पत्र का दोहराव, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से सम्बन्धित त्रुटियां, निर्वाचकों की अनुपस्थिति राजनीति का अपराधीकरण और अपराधियों का राजनीतिकरण, जाति-धर्म का राजनीति से सम्बन्ध, सांप्रदायिकता के साथ-साथ सोशल मीडिया दुरुपयोग, भ्रामक खबरें तथा चुनावों में लोगों की कम भागीदारी आदि प्रमुख चुनौती के रूप में खड़ी है।

सुधार हेतु उठाए गए कदम

  • चुनावी बांड के द्वारा पारदर्शिता को बढ़ावा दिया गया है।
  • चुनाव लड़ने हेतु अर्हता प्राप्त करने के लिए स्वयं के और अपने परिवार के सदस्यों के आय के स्रोतों का ब्योरा देना अनिवार्य किया गया है।
  • चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को अपने आपराधिक रिकॉर्ड सहित सभी व्यतिगत जानकारी प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।