लोकतंत्र को प्रभावी बनाने में स्वतंत्र और संप्रभु निर्वाचन प्रणाली का योगदान काफी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह लोगों की इच्छा की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सरकार को वैधता प्रदान करती है। चुनाव एक लोकतांत्रिक गणराज्य के गठन की प्रक्रिया का वह आवश्यक तत्व है, जिसके बिना लोकतंत्र महत्वहीन हो जाएगा, अर्थात् चुनाव या निर्वाचन लोकतंत्र के प्राण तत्व की भांति है।
निर्वाचन व्यवस्था के सम्मुख प्रमुख चुनौतियां: राजनीति का अपराधीकरण, निर्वाचन व्यय की समस्या, हिंसा व जाली मतदान, निर्वाचन नामावलियों से सम्बन्धित त्रुटियाँ, मत व परिणाम के मध्य असंतुलन, राजनीतिक दलों की बढ़ती संख्या, विधिहीन आचार संहिता, सरकारी मीडिया का दुरुपयोग, मतदाता पहचान पत्र का दोहराव, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से सम्बन्धित त्रुटियां, निर्वाचकों की अनुपस्थिति राजनीति का अपराधीकरण और अपराधियों का राजनीतिकरण, जाति-धर्म का राजनीति से सम्बन्ध, सांप्रदायिकता के साथ-साथ सोशल मीडिया दुरुपयोग, भ्रामक खबरें तथा चुनावों में लोगों की कम भागीदारी आदि प्रमुख चुनौती के रूप में खड़ी है।
सुधार हेतु उठाए गए कदम