हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में यह निर्णय दिया है कि केंद्र और राज्यों के प्रत्यायोजन विधानों की शक्तियां, मूल कानून (Parent Act) द्वारा दी गई शत्तिफ़यों से अधिक नहीं हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह अधिकारातित (Ultra Vires) है और उन्हें प्रभावी नहीं होने दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार प्रत्यायोजित विधान को मूल कानून के दायरे से बाहर नहीं जाना चाहिए तथा इसे संसदीय कानून का प्रतिस्थापक न होकर उसका पूरक होना चाहिए।
प्रत्यायोजित विधान
प्रत्यायोजित विधान की अमान्यता
प्रमुख मुद्दा
न्यायिक निर्णय
आगे की राह