लद्दाख और छठी अनुसूची संबंधी मुद्दे

हाल ही में गृह मंत्रलय द्वारा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया। यहलद्दाख द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा तथा छठी अनुसूची के कार्यान्वयन के साथ-साथ कारगिल और लेह के लिए अलग लोकसभा सीटों की मांग की जा रही है।

समिति के कार्य

  • समिति लद्दाख की भौगोलिक स्थिति और सामरिक महत्व तथा अनूठी संस्कृति और भाषा के संरक्षण पर चर्चा के साथ-साथ भूमि सुरक्षा तथा रोजगार सृजित करने के उपायों की सिफारिश करेगी।
  • समिति समावेशी विकास की रणनीति बनाने के साथ-साथ लेह और कारगिल के लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी जिला परिषदों के सशक्तिकरण से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा करेगी।

आवश्यकता

  • लद्दाख को दिए गए विशेष दर्जे को संसद द्वारा हटाए जाने के बाद से हीविभिन्न नागरिक समाज समूह द्वारा भूमि, संसाधनों और रोजगार की सुरक्षा के लिए उपाय तैयार करने की मांग किया जाना।
  • वर्ष 2019 के पश्चात बड़े व्यवसाय और समूह द्वारा स्थानीय लोगों से नौकरियां और जमीन छीने जाने का डर होना।
  • इस क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की भी मांग किया जाना।

संविधान की छठी अनुसूची

  • छठी अनुसूची के तहत मेघालय सहित असम, मिजोरम और त्रिपुरा में एक अनूठी प्रशासनिक संरचना है।
  • ये राज्य संविधान के अनुच्छेद 244, अनुच्छेद 275 और छठी अनुसूची के तहत शामिल किये गए हैं।
  • असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रें पर लागू होती है।
  • इन क्षेत्रें के प्रशासन में स्वायत्तता के लिए स्वायत्त जिला परिषदों (Autonomous District Councils -ADCs) और क्षेत्रीय परिषदों (Regional Councils) को अपने क्षेत्रधिकार के तहत क्षेत्रें के संबंध में कानून बनाने का अधिकार प्रदान करती है।
  • वर्तमान में छठी अनुसूची के अंतर्गत चार पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा की 10 स्वायत्त जिला परिषदें सम्मिलित हैं।

6वीं अनुसूची से जुड़े मुद्दे

  • गैर-आदिवासी निवासियों के खिलाफ भेदभाव तथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन प्रमुख मुद्दा है।
  • छठी अनुसूची को अल्पसंख्यक आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए शामिल किया गया था।
  • अल्पसंख्यक गैर-आदिवासियों के अधिकार को सुरक्षा का मुद्दामहत्वपूर्ण है।
  • संविधान के इस प्रावधान ने इन क्षेत्रें में स्वायत्तता की वास्तविक शुरुआत के बजाय शक्ति के कई केंद्रों की स्थापना को बढ़ावा दिया है।
  • ‘इनर लाइन परमिट प्रणाली’ (Inner Line Permit-ILP) से सम्बन्धित मुद्दा।

आगे की राह

  • छठी अनुसूची उस क्षेत्र की भूमि पर मूल निवासियों के विशेषाधिकार की रक्षा करती है तथा आदिवासी समुदायों को काफी स्वायत्तता प्रदान करती है। अतः नीति निर्माताओं को भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत प्राप्त शक्तियों को फिर से मूल्यांकित करने पर विचार करना चाहिए।