भारत में डॉ- श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक विधान, एक प्रधान और एक निशान की संकल्पना को सामने रखा था। उनका मानना था कि सत्ता का मूल उद्देश्य राज करना नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित भाव से कार्य करना है।
उन्होंने एक विधान, एक प्रधान और एक निशान के संकल्प के लिए अपना बलिदान देकर कश्मीर से परमिट राज खत्म कर उसे भारत का अभिन्न अंग बनाया।
एक राष्ट्र एक विधान हेतु किये गए प्रयास
एक देश एक चुनावः एक साथ चुनाव करवाने का समर्थन करते हुए नीति आयोग की मसौदा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में दोनों चुनाव एक साथ होने से शासन व्यवस्था में रुकावटें कम होंगी। देश में पहले भी लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ हो चुके हैं। जैसा की पहली चार लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं का चुनाव 1952, 1957, 1962 और 1967 में हुए थे।
एक देश एक कर प्रणालीः जीएसटी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और टैक्स की चोरी भी रुकेगी।
एक देश एक राशन कार्डः एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ (वन नेशन वन राशन कार्ड) योजना के माध्यम से राशन कार्डों की राष्ट्रव्यापी पोर्टेबिलिटी का कार्यान्वयन, भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है। ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ प्रवासियों की कठिनाइयों का समाधान करने के लिए राशन कार्डों की राज्य के भीतर तथा अंतर-राज्य पोर्टेबिलिटी के लिए प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली है।
एक देश एक उर्वरकः इस योजना के अंतर्गत यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके आदि के लिए एकल ब्रांड नाम क्रमशः भारत यूरिया, भारत डीएपी, भारत एमओपी और भारत एनपीके का प्रयोग सभी उर्वरक कंपनियों, राज्य व्यापार इकाइयों (एसटीई) और उर्वरक विपणन इकाइयों (एफएमई) द्वारा किया जाएगा। भारतीय जन उर्वरक परियोजना के एक भाग के रूप में ‘एक राष्ट्र-एक उर्वरक’ योजना की शुरुआत की गयी।
एक राष्ट्र एक वाहन नंबरः केंद्र सरकार अब देशभर के वाहनों का रजिस्ट्रेशन आइएन (इंडिया) के नाम से जारी करने वाहन मालिक को अब एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में जाने के लिए एनओसी (नान ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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