मूल अधिाकार बनाम मूल कर्तव्य

जहां अधिकार होते हैं, वहां कर्तव्य स्वतः उत्पन्न हो जाते हैं। मौलिक कर्तव्य और मौलिक अधिकार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। मूल अधिकार और मूल कर्तव्य में एक अंतर यह भी है कि मूल अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय, जबकि मूल कर्तव्य नहीं। अतः स्पष्ट हो जाता है कि संविधान में उल्लेखित मूल कर्तव्य प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है तथा जिनके द्वारा राष्ट्र निरंतर विकास कर सके।

मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संबंध

  • अधिकार लोगों के बीच अंतःक्रिया के नियम हैं। अधिकार को दावों के रूप में परिभाषित किया जाता है। अधिकारों का वास्तविक अर्थ तभी होता है, जब व्यक्ति कर्तव्यों का पालन करते हैं।
  • कर्तव्य एक ऐसी क्रिया है, जिसकी किसी से अपेक्षा की जाती है या करने की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों की देखभाल करें।
  • अधिकार वे हैं, जो हम चाहते हैं कि दूसरे हमारे लिए करें, जबकि कर्तव्य वे कार्य हैं, जो हमें दूसरों के लिए करना चाहिए। इस प्रकार, एक अधिकार दूसरों के अधिकारों के प्रति सम्मान दिखाने के दायित्व के साथ आता है।
  • अधिकार और कर्तव्यों का घनिष्ठ संबंध है और दोनों अविभाज्य हैं।

मूल अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक

  • नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क परिवहन जैसी सुविधाओं के उपयोग का अधिकार प्राप्त है, पर उनके बेहतर रख-रखाव का कर्तव्य भी आरोपित है।
  • गरिमामयी जीवन जीने का अधिकार के साथ पर्यावरण के संरक्षण का दायित्व भी नागरिकों पर आरोपित है। शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने का कर्तव्य भी संविधान में शामिल है।
  • 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करना मौलिक अधिकार है, पर साथ ही अभिभावकों का मौलिक कर्तव्य भी है कि वे अपने पाल्यों को प्राथमिक शिक्षा दिलवाएं।
  • अभिव्यत्तिफ़ की स्वतंत्रता का अधिकार, भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करने के कर्तव्य पर आधारित है। उसी प्रकार धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सर्वधर्म समभाव और संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के परिरक्षण के कर्तव्य के साथ आता है
  • सूचना पाने का अधिकार प्राप्त है तो वहीं दूसरी ओर असामाजिक व देश-विरोधी तत्त्वों के बारे में जांच एजेंसियों को सूचना उपलब्ध कराने का कर्तव्य भी निहित है।

आगे की राह

  • मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि नागरिकों को प्रदान किए गए कर्तव्यों की उपेक्षा की जाती है तो अधिकारों की कोई मांग नहीं हो सकती है। भले ही केवल मौलिक अधिकार लागू करने योग्य और अदालत के समक्ष पेश करने योग्य हैं, लेकिन तब भी मौलिक कर्तव्य समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।