जहां अधिकार होते हैं, वहां कर्तव्य स्वतः उत्पन्न हो जाते हैं। मौलिक कर्तव्य और मौलिक अधिकार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। मूल अधिकार और मूल कर्तव्य में एक अंतर यह भी है कि मूल अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय, जबकि मूल कर्तव्य नहीं। अतः स्पष्ट हो जाता है कि संविधान में उल्लेखित मूल कर्तव्य प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है तथा जिनके द्वारा राष्ट्र निरंतर विकास कर सके।
मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संबंध
मूल अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक
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