​महाकालेश्वर मंदिर

अक्टूबर 2022 में, प्रधानमंत्री ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल लोक कॉरिडोर परियोजना के प्रथम चरण का उद्घाटन किया है।

प्रमुख बिंदु: महाकाल लोक एक मेगा कॉरिडोर परियोजना है। इस परियोजना के तहत महाकालेश्वर मंदिर परिसर के क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा। इससे अधिक संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में आ सकेंगे।

  • इस कॉरिडोर में दो भव्य प्रवेश द्वार होंगेः 108 अलंकृत स्तंभों वाली एक समानांतर स्तंभ-पंत्तिफ़ (Colonnade) होगी। इनमें भगवान शिव के आनंद तांडव स्वरूप (प्रफुल्लित नृत्य रूप) को दर्शाया जाएगा।
  • 50 से अधिक भित्ति चित्रें वाला रनिंग पैनल स्थापित किया जाएगा। इसमें शिव पुराण की कथाओं का चित्रण किया जाएगा।
  • इस समग्र पुनर्विकास योजना पर 705 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।

प्रमुख तथ्य: यह मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है।

  • महाकाल मंदिर की स्थापना का सही समय ज्ञात नहीं है। पुराणों के अनुसार इसकी स्थापना सबसे पहले प्रजापिता ब्रह्मा ने की थी।
  • आगे चलकर, राजकुमार कुमारसेन (प्रद्योत वंश के राजा प्रद्योत के पुत्र) ने 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में महाकाल मंदिर की कानून और व्यवस्था के प्रबंधन का दायित्व संभाला था।
  • प्रद्योत वंश ने आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व से छठी शताब्दी ईसा पूर्व के बीच अवंती (वर्तमान में मध्य प्रदेश) पर शासन किया था।
  • कालिदास ने अपने महाकाव्य रघुवंश में इस मंदिर को ‘निकेतन’ के रूप में वर्णित किया है। संभवतः इसका कारण यह था कि मंदिर की छतें अधिकतर समतल थीं।
  • इस मंदिर में पुनर्विकास और पुनर्निर्माण का कार्य कई शताब्दियों तक किया जाता रहा। इसके परिणामस्वरूप, मंदिर परिसर में भूमिजा, चालुक्य और मराठा स्थापत्य शैली का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है।