​​नई यूरिया नीति 2015

केंद्र सरकार ने नई यूरिया नीति 2015 को मंजूरी दी थी। फसलों की वृद्धि के लिये यूरिया बेहद जरूरी है। इसके जरिये पौधों की वृद्धि के लिये जरूरी नाइट्रोजन मिलता है।

  • नई यूरिया नीति 2015 के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं-
    • स्वदेशी यूरिया उत्पादन को वृद्धि और यूरिया इकाइयों में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना ताकि सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम किया जा सके।
    • कार्बन फुटप्रिंट कम होने से ऊर्जा की बचत होगी और यह अधिक पर्यावरण अनुकूल होगा।
    • घरेलू क्षेत्र की 30 यूरिया उत्पादन इकाइयों को अधिक ऊर्जा कुशल बनने में मदद करना।
    • सब्सिडी के बोझ को युत्तिफ़संगत बनाना और उत्पादन को अधिकतम करने के लिये यूरिया इकाइयों को प्रोत्साहित करना।
    • किसानों को अधिकतम खुदरा मूल्य पर यूरिया की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही राजकोष पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ कम करना जिससे यूरिया क्षेत्र में आयात की निर्भरता भी कम हो सके।
    • इससे पहले सरकार ने सभी यूरिया इकाइयों के लिये एक समान कीमत पर गैस आपूर्ति हेतु गैस पूलिंग नीति को मंजूरी दी थी।
    • इसके अलावा सरकार ने 26 लाख टन अतिरित्तफ़ यूरिया उत्पादन के लिये बिहार के बरौनी और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बंद पड़ी यूरिया इकाइयों को पुनर्जीवित करने का फैसला किया था।

उर्वरक उद्योग, देश के आठ कोर उद्योगों में से एक हैं

कृषि क्षेत्रक में मुख्य रूप से 3 प्रकार के उर्वरकों का उपयोग किया जाता है- यूरिया, DAP और म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP)। इनमें से यूरिया का सबसे अधिक उपयोग होता है। यह सबसे अधिक उत्पादित (88%), सबसे अधिक इस्तेमाल (74% हिस्सा) और सबसे अधिक आयात (52%) किया जाने वाला उर्वरक है।