मामलेः लैंगिक समानता के लिए कार्यरत एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा जनहित याचिका के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 14, 19 तथा 21 के माध्यम से प्राप्त अधिकारों को प्रभावी रूप से लागू कराने का प्रयास किया गया।
न्यायालय का निर्णयः उच्चतम न्यायालय द्वारा लैंगिक समानता को सुनिश्चित करने वाले अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों की विषय वस्तु पर विश्वास किया गया और स्पष्ट किया गया कि मूलभूत रूप से लैंगिक समानता की उपलब्धता निर्वाचित एवं सुनिश्चित करते समय मनोवांछित गरिमा सहित कार्य करने का अधिकार तथा लैंगिक उत्पीड़न के विरुद्ध सुरक्षा सुनिश्चित करना अन्तर्निहित दायित्व होता है।