इस वाद में मुंबई उच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 15(3) को संरक्षित करते हुए महिलाओं के लिए शिक्षण संस्थाओं की स्थापना तथा अन्य शिक्षण संस्थाओं में उनके लिए स्थान के आरक्षण को संवैधानिक घोषित किया।
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