भारत-नेपाल संबंधा

नेपाल, भारत का एक महत्त्वपूर्ण पड़ोसी है और सदियों से चले आ रहे भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों के कारण अपनी विदेश नीति में एक विशेष महत्त्व रखता है।

भारत-नेपाल संबंध का आधार

  • दोनों देश न केवल एक खुली सीमा और लोगों की निर्बाध आवाजाही साझा करते हैं, बल्कि विवाह और पारिवारिक संबंधों के माध्यम से भी उनके बीच घनिष्ठ संबंध हैं।
  • 1950 की भारत-नेपाल शांति और मित्रता संधि दोनों देशों के बीच के मजबूत संबंधों को आधार प्रदान करती है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार और विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत है।
  • नेपाल एक भू-आबद्ध देश होने के कारण तीन तरफ से भारत से घिरा हुआ है। अतः यह नेपाल को अन्य दुनिया से जोड़ने की सुविधा प्रदान करता है।
  • द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में उपकरण और प्रशिक्षण के प्रावधान के माध्यम से नेपाली सेना को उसके आधुनिकीकरण में सहायता देना।
  • भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंटों का गठन आंशिक रूप से नेपाल के पहाड़ी जिलों से भर्ती करके किया जाता है।
  • भारत और नेपाल कई बहुपक्षीय मंचों को साझा करते हैं।

भारत-नेपाल के बीच वर्तमान मुद्दे

  • भारत के अग्निपथ योजना पर गोरखाओं की भर्ती प्रक्रिया पर नेपाल की आपत्ति।
  • नेपाल ने एक नया राजनीतिक मानचित्र जारी करते हुए उत्तराखंड के कालापानी, लिंपियाधुरा एवं लिपुलेख पर और बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के सुस्ता क्षेत्र पर अपना दावा जताया।
  • 1950 में शांति और मित्रता की संधि नेपाल द्वारा असमान संबंध और भारतीय प्रभाव थोपने के रूप में देखना।
  • नेपाल राष्ट्र बैंक (नेपाल का केंद्रीय बैंक) के पास 7 करोड़ भारतीय पुराने रुपए हैं और भारत का इसे बदलने से इंकार।
  • नेपाल राष्ट्र बैंक के पास विमुद्रीकृत बिलों को स्वीकार करने से भारत का इनकार।
  • नेपाल की नदियों का सही से प्रबंधन न होने के कारण बिहार में बाढ़।

चीन की भूमिका

  • नेपाल, चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में एक महत्वपूर्ण भागीदार।
  • चीन द्वारा नेपाल को चार बंदरगाहों और तीन भूमि बंदरगाहों तक पहुंच प्रदान।
  • चीन द्वारा पोखरा और लुंबिनी हवाई अड्डा का विस्तार।
  • चीन, नेपाल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भारत से आगे।