हाल ही में जोशीमठ तथा कश्मीर के रामबन जिले में भूमि अवतलन के कारण घरों में दरार देखने को मिले हैं, जिसके बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।
राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन/एनओएए) भूमिगत तत्वों के संचलन के कारण भूमि के धंसने को भूमि अवतलन के रूप में परिभाषित करता है।
भूमि अवतलन के कारण
भूमिगत सामग्री के संचलन के कारण जमीन का धंसना पानी, तेल, प्राकृतिक गैस या खनिज संसाधनों को पंपिंग, फ्रैकिंग या खनन गतिविधियों द्वारा जमीन से बाहर निकालने के कारण होता है।
भूकंप, मृदा संघनन, हिमनदों के समस्थानिक समायोजन, अपरदन, सिंकहोल आदि जैसी प्राकृतिक घटनाओं के कारण भी अवतलन होता है।
जोशीमठ में बार-बार भूमि धंसने के संभावित कारण
वर्ष 1976 की मिश्रा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, जोशीमठ मुख्य चट्टान पर नहीं, बल्कि रेत और पत्थर के जमाव पर स्थित है। समिति ने भारी निर्माण कार्य, ब्लास्टिंग या सड़क की मरम्मत के लिये बोल्डर हटाने और अन्य निर्माण, पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी।
जोशीमठ क्षेत्र में बिखरी हुई चट्टानें पुराने भूस्खलन के मलबे, जिसमें बाउलडर, नीस चट्टानें और ढीली मृदा शामिल है, से ढकी हुई हैं, जिनकी धारण क्षमता न्यून है।
ये नीस चट्टानें अत्यधिक अपक्षयित प्रकृति की होती हैं और विशेष रूप से मानसून के दौरान पानी से संतृप्त होने पर इनके रंध्रों पर उच्च दबाव बन जाता है, फलस्वरूप इनका संयोजी मूल्य कम हो जाता है, जो भूमि अवतलन का कारण बनता है।
सड़क, रेल, भवन निर्माण के अनियोजित निर्माण गतिविधियों, क्षेत्र में अधिक जनसंख्या एवं जल के प्राकृतिक प्रवाह तथा जल विद्युत गतिविधियों में बाधा के कारण।
जोशीमठ एक भूकंपीय क्षेत्र भी है, जो इसे बार-बार भूकंप आने के खतरे के प्रति संवेदनशील बनाता है।