बेघर होना हाशियाकरण के सबसे बुरे रूपों में से एक है, क्योंकि अधिकांश बेघर व्यक्ति कुपोषण और अत्यधिक गरीबी से पीडि़त हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और उनकी सामर्थ्य भी एक बाधा है। शहरी बेघरों की स्थितियां कई मामलों में मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा, ये स्थितियां दवा और शराब की खपत को भी जन्म देती हैं।
बेघर होने का कारण
बेघर व्यक्तियों के अधिकार
आगे की राह
2030 तक शहरों की जनसंख्या करीब 600 मिलियन तक बढ़ जाएगी, जो कि देश की कुल आबादी का 40 प्रतिशत होगी। 2011 में ये 377 मिलियन थी। पूरे देशभर में करीब 1.8 मिलियन लोग ऐसे हैं, जिनके सिर पर कोई छत नहीं है और वे बेघर हैं। ये जनसंख्या गोवा राज्य की कुल आबादी से भी अधिक है। इनमें से करीब आधे शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। उत्तर प्रदेश राज्य में सबसे ज्यादा बेघर लोग हैं। प्रदेश में 0.33 मिलियन लोग बेघर हैं, जिनमें से 0.18 मिलियन लोग प्रदेश के शहरी इलाकों में रहते हैं।