सतत शहरीकरण की भारत की चुनौतियां

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसकी वृद्धि इसके शहरों से प्रेरित है। शहरीकरण को विकास के उप-समूह के रूप में माना जा सकता है। इसे आमतौर पर ग्रामीण समाज से शहरी समाज में परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसे एक विशेष अवधि के दौरान शहरी क्षेत्रों में लोगों की संख्या में वृद्धि के रूप में दर्शाया जाता है।

चुनौतियां

कुशल परिवहन का अभावः सामाजिक स्थिति के नाम पर लोग निजी परिवहन का अधिक प्रयोग करना पसंद करते हैं। कारों पर निर्भरता के परिणामस्वरूप सड़कों पर भीड़भाड़, प्रदूषण और शहरों में यात्रा के समय में वृद्धि हुई है।

मलिन बस्तियाँ और अवैध बस्तियां: शहरी क्षेत्रों में जीवन यापन की उच्च लागत होती है, लेकिन अधिकांश लोग जो ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में जाते हैं, वे इस तरह के जीवनयापन को वहन करने की स्थिति में नहीं होते हैं।

पर्यावरणीय गुणवत्ता में गिरावटः शहरीकरण पर्यावरणीय गिरावट के प्रमुख कारणों में से एक है। सीमित स्थानों में लोगों की भीड़ हवा की गुणवत्ता को कम करती है और पानी को दूषित करती है।

सीवरेज की समस्याः तेजी से हो रहे शहरीकरण से शहरों का अनियोजित और अव्यवस्थित विकास होता है और इनमें से अधिकांश शहर अकुशल सीवेज सुविधाओं से त्रस्त हैं।

अर्बन हीट आइलैंडः शहरी क्षेत्रों की पहचान फुटपाथ, इमारतों और अन्य सतहों के घने संकेंद्रण से होती है, जो गर्मी को अवशोषित और बनाए रखते हैं।

शहरी बाढ़ः भूमि की कीमतों में वृद्धि और शहर के केंद्रों में सीमित भूमि के परिणामस्वरूप, भारतीय शहरों और कस्बों में नए विकास निचले इलाकों में हो रहे हैं, जो अक्सर झीलों, आर्द्रभूमि और नदियों पर अतिक्रमण कर रहे हैं।

यूएलबी की अप्रभावी कार्यप्रणालीः यद्यपि संविधान द्वारा उल्लिखित शहरी स्थानीय निकायों के कार्यों की एक विस्तृतश्रृंखला है, उन कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक राजस्व केंद्र और राज्य पर निर्भर है।

शहरी विकास से संबंधित हाल की प्रमुख पहलें

  • शहरी कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिये अटल मिशन
  • प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी
  • जलवायु स्मार्ट शहर आंकलन रूपरेखा 2.0
  • द अर्बन लर्निंग इंटर्नशिप प्रोग्राम- ट्यूलिप

आगे की राह

भारत संधारणीय विकास लक्ष्यों (SDG) का परिपालन करने के लिए प्रतिबद्ध है, सतत शहरों और समुदायों पर सतत विकास लक्ष्य, 11 में यह भी कहा गया है कि विकास में सतत विकास महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि वे लोगों को आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध होने के अवसर प्रदान करते हैं। भारत सरकार सतत विकास लक्ष्य का परिपालन कर रही है। सतत विकास लक्ष्यों के आदर्श वाक्य ‘‘किसी को पीछे नहीं छोड़ना’’ की भावना में ‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विकास’’ सुनिश्चित करने के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।