भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र

भारत सौर ऊर्जा संसाधन से समृद्ध देश है। इसलिए भारत में जलवायु परिवर्तन के दबाव को कम करने हेतु सौर ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी विकास के साथ-साथ इसे तेजी से अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

  • भारत द्वारा पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को प्राप्त करने तथा ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बेहतर प्रयास किये जा रहे हैं।
  • 30 नवंबर, 2021 तक देश की स्थापित अक्षय ऊर्जा (RE) क्षमता 150.54 गीगावाट (सौरः 48.55 गीगावाट, पवनः 40.03 गीगावाट, लघु जलविद्युतः 4.83 गीगावाट, जैव-शक्ति: 10.62 गीगावाट, हाइड्रोः 46.51 गीगावाट) है, जबकि इसकी परमाणु ऊर्जा आधारित स्थापित बिजली क्षमता 6.78 गीगावाट है।
  • भारत के पास विश्व की चौथी सबसे बड़ी पवन ऊर्जा क्षमता है।
  • यह कुल गैर-जीवाश्म आधारित स्थापित ऊर्जा क्षमता को 157.32 गीगावाट तक लाता है, जो कि 392.01 गीगावाट की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 40.1% है।

मुद्दे

  • वर्ष 2022-23 के लिये केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के बजट अनुमान से पता चलता है कि भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SESI) में निवेश 1,800 करोड़ रुपए से घटकर लगभग 1,000 करोड़ रुपए हो गया है।
  • SECI सौर ऊर्जा पर कार्य करने वाला केंद्र सरकार का एकमात्र सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, जो वर्तमान में संपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिये जिम्मेदार है।
  • वर्षों से भारत में सौर फोटोवोल्टिक (PhotoVoltaic) मॉड्यूल के निर्माण के साथ गुणवत्ता की कमी एक प्राथमिक मुद्दा रहा है।
  • हालांकि ऐसे अनुसंधान एवं विकास के लिये किसी अलग आवंटन की घोषणा नहीं की गई है।

आगे की राह

सही क्षेत्रें की पहचान करनाः अक्षय संसाधनों, विशेष रूप से पवन ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना हर जगह सम्भव नहीं है, उन्हें विशिष्ट स्थान की आवश्यकता होती है।

अन्वेषणः अधिक ऊर्जा का संग्रहण हेतु समाधान तलाशने की आवश्यकता है।

कृषि सब्सिडीः कृषि सब्सिडी में सुधार किया जाना चाहिये, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल आवश्यक मात्र में ही ऊर्जा की खपत हो।