हाल ही में, केंद्र सरकार ने कुछ राज्यों द्वारा जनता को मुफ्रत में आधारभूत सुविधाएं (Freebies) देने के कारण उन पर ऋण के बढ़ते बोझ और बिगड़ती राजकोषीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।
भारत के संविधान में राजकोषीय संघवाद को अपनाया गया है। इसके आधार पर स्थिरता को बनाए रखने के लिए कुछ सिद्धांतों का पालन किया जाता है, जो कि निम्नलिखित हैंः
राजकोषीय समानता (Fiscal Equivalency): सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के तहत जिम्मेदारी के क्षेत्र तय किए गए हैं। उदाहरण के लिए- राज्य सूची (सूची II) में कृषि, विद्युत, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्र शामिल किए गए हैं। साथ ही, विशेष संसाधन जुटाने की शत्तिफ़यां (कराधान) देकर उनके वित्त पोषण के प्रावधान भी किए गए हैं।
समनुषंगिता का सिद्धांत (Principle of Subsidiarity): सरकार के सबसे निचले स्तर के लिए कार्यों का विभाजन और स्वायत्तता देना। इससे राजस्व सृजन और व्यय दक्षता को बढ़ावा मिलता है। उदाहरण के लिए-73वें और 74वें संविधान संशोधनों द्वारा 11वीं और 12वीं अनुसूची के तहत क्रमशः पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को निश्चित कार्य सौंपे गए हैं।