यह रिपोर्ट साक्ष्य आधारित नीतियों और नवाचारों की एक शृंखला पर प्रकाश डालता है। इसने खाद्य प्रणालियों में अनुकूलन और शमन उपायों को प्राथमिकता देने तथा इन्हें तुरंत लागू करने पर बल दिया है।
रिपोर्ट जारीकर्ताः अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI)।
रिपोर्ट का प्रमुख तथ्यः
जलवायु परिवर्तन के कारण वर्ष 2030 तक भारत का खाद्य उत्पादन क्षमता 16% तक कम हो सकता है तथा भूख के जोखिम वाले लोगों की संख्या में 23% तक की वृद्धि हो सकती है।
जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में 2050 तक वैश्विक खाद्य उत्पादन 2010 के स्तर से लगभग 60% बढ़ जाएगा।
वर्ष 2030 तक दक्षिण एशिया और पश्चिम तथा मध्य अफ्रीका में मांस का उत्पादन दोगुना एवं वर्ष 2050 तक तीन गुना होने का अनुमान है। इस वृद्धि के बावजूद विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति खपत का स्तर विकसित देशों की तुलना में आधे से भी कम रहेगा।
वैश्विक स्तर पर 7 करोड़ से अधिक लोगों पर भुखमरी का खतरा होगा। इनमें लगभग 2.8 करोड़ से अधिक लोग पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में होंगे।