भारतीय शास्त्रीय नृत्य

शास्त्रीय नृत्य पौराणिक कहानी से अलग नृत्यकी एक परम्परा है। शास्त्रीय नृत्य में सख्ती से नियमो का पालन होता है। शास्त्रीय नृत्य कला में नर्तक अलग अलग भाव के माध्यम से कथा को प्रस्तुत करता है। किसी एक विशेष स्थान का शास्त्रीय नृत्य प्रतिनिधित्व करता है,जिससे वह सबंध रखता है। शास्त्रीय नृत्य के तिन प्रमुख घटक है। नाट्य, नृत्ता और नृत्य है।

नाट्य: नृत्यनाटिका तत्व पर आधारित है, कथकली नृत्य नाटक के अतिरिक्त आज ज्यादातर नृत्य रूपों में इस घटक को व्यवहार में कम ही लाया जाता है।

नृत्य: नर्तक के हाथो के हावभाव और पेरो की स्थिति के माध्यम से मनोदशा का चित्र किया जाता है।

नृत्ता: एक शुद्ध नृत्य है,जहाँ शरीर की गतिविधि किसी भी हव भाव का वर्णन नही करती है, और नहीं किसी अर्थ को प्रतिपादित करती है। शास्त्रीय नृत्य कला में 8 प्रकार के रस होते है। 9 मा शांत रस अभिनव गुप्त द्वारा बाद में जोड़ा गया है, शास्त्रीय नृत्य में व्यक्त किये जाने वाले भाव निम्रलिखित है।

  • शृंगार रस: यानि की प्रेम का भाव
  • हंसी रस : क्रीड़ा करनेवाला भाव
  • करुण रस : दुःख व्यक्त करे वाला भाव
  • रौद्र रस : क्रौध को व्यक्त करने वाला भाव
  • वीर रस : वीरता को व्यक्त करने वाला भाव
  • भयानक रस : भय को व्यक्त करने वाला भाव
  • बीभत्स : द्वेष को व्यक्त करने वाला भाव
  • अद्भुत रस : आश्चर्य को व्यक्त करने वाला भाव
  • शांत रस : शांति को व्यक्त करने वाला भाव

कत्थकः यह मूलतः उत्तर भारत का शास्त्रीय नृत्य है। कत्थक का अर्थ है – ‘कथा कहने वाला’। इस नृत्य में विभिन्न भाव-मुद्राओं और अंग संचालन द्वारा कथा को अभिव्यक्त किया जाता है। इस नृत्य में सभी पग समानान्तर एवं स्वाभाविक होते हैं। कालान्तर में इसकी दो शैलियां विकसित हुईं- राजपूत प्रभावित जयपुर शैली और मुगल प्रभावित लखनऊ शैली। दमयंती जोशी, भारती गुप्ता, कुमुदनी लखिया, गोपी कृष्ण, सितारा देवी, बिरजू महाराज, उमा शर्मा आदि मशहूर नर्तक है।

कथकलीः परम्परा से यह शास्त्रीय नृत्य केरल की योद्धा जनजाति नायर में प्रचलित रहा है। इस नृत्य को पुनप्रतिस्थापित करने का श्रेय बल्लथोस नारायण मेनन को जाता है, जिन्होंने 1930 में ‘केरल कला मंडलम’ की स्थापना की। कृष्णन कुट्टी, माधवन एवं आनन्द शिवरामन, उदयशंकर, रामगोपाल, शान्ताराव आदि कुशल व चर्चित नर्तक हैं।

ओडिसीः मूलतः ओडिशा का प्राचीन नृत्य ओडिसी देवदासी परम्परा से अनुप्राणित रहा है। इसका प्राचीनतम प्रमाण हाथीगुम्फा लेख से प्राप्त होता है। इसका मूल आधार ड्डोत भरतमुनि का नाट्यशास्त्र, अभिनय चन्द्रिका, अभिनय दर्पण जैसे शास्त्रीय ग्रंथ है। संयुक्ता पाणिग्रही, सोनल मानसिह, मिनाती दास, प्रियंवदा मोहन्ती, मधुमिता राउत आदि प्रसिद्ध नृत्यांगनाएं हैं।

भरतनाट्यमः भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से संबद्ध तथा पूर्व में सादिर नाम से अभिहित किया जाने वाला भरतनाट्यम तमिलनाडु राज्य का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है। इस नाट्य नृत्य को दक्षिण के मंदिरों में देवदासी परम्परा का अनुरक्षण प्राप्त रहा। रूक्मिणी देवी के प्रयास से इस नृत्य को अपनी गरिमा के अनुरूप शास्त्रीय नृत्यों के बीच स्थान मिल पाया। इसकी दो उप शैलियां हैं- पंडानल्लुर शैली तथा तंजौर शैली। सम्पूर्ण भरतनाट्यम के सात खंड हैं- अलारिज्पु, जाति स्वर, वर्ण, शब्द, पद, तिल्लाना और श्लोक। यामिनी कृष्णमूर्ति, सोनल मानसिह, पद्मा सुब्रह्मणयम, लीला सैम्सन आदि चर्चित नृत्यांगनाएं हैं।

कुचिपुड़ीः आंध्र प्रदेश राज्य के मूलतः ‘कुचेलपुरम्’ नामक गांव के नाम पर ही इस नृत्य का नाम कुचिपुड़ी पड़ा। इसका उद्देश्य वैदिक एवं उपनिषद के धर्म एवं अध्यात्म का प्रचार करना है। कुचिपुड़ी को उसके वर्तमान स्वरूप में लाने का श्रेय ‘सर्वश्री लक्ष्मी नारायण शास्त्री’ व ‘वेदानृत्म सत्य नारायण’ को जाता है। इस नृत्य में लय, ताल एवं भाव का समावेश होता है। चिन्ता कृष्ण मुरली, वेमपत्ती सत्यनारायण, यामिनी कृष्णमूर्ति, राजा एवं राधा रेड्डी प्रसिद्ध नर्तक हैं।

मणिपुरीः इस शास्त्रीय नृत्य का मूलाधार मणिपुर का प्राचीन जनजातीय नृत्य है, लेकिन वैष्णव धर्म की विषय वस्तु का अवलंबन लेकर यह शास्त्रीय परंपरा के रंग में रंग गया। यह नृत्य शैली भक्ति तथा त्याग पर विशेष बल देती है। इस नृत्य में मानसिक एवं शारीरिक भावों को मुख-मुद्रा तथा भाव-भंगिमाओं द्वारा संगीत के स्वर ताल पर प्रस्तुत किया जाता है। इसमें अंग संचालन के दो रूप हैं- तांडव तथा लास्य। झावेरी बहनें, रीता देवी, सविता मेहता, निर्मला मेहता एवं थम्बल यैमा प्रसिद्ध नर्तकी हैं।

मोहिनीअट्टमः यह नृत्य केरल से संबंधित है। वैष्णव भक्त परम्परा से अनुप्राणित इस नृत्य की चर्चा ‘व्यवहार माला’ नामक ग्रंथ में है। इस नृत्य को प्रतिष्ठित करने का श्रेय केरल कला मंडलम को है। इसका स्वरूप एकल होता है। इसकी प्रमुख नृत्यांगना भारती शिवाजी हैं।

लोक नृत्य और उनके राज्य

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
लोक नृत्य
अरुणाचल प्रदेश बुईया, छालो, वांचो, पासी कोंगकी, पोनुंग, पोपीर, बारडो छाम।
असम बीहू, बीछुआ, नटपूजा, महारास, कालिगोपाल, बागुरुम्बा, नागा नृत्य, खेल गोपाल, कानोई, झूमूरा होबजानाई।
आंध्रप्रदेश

वीरानाट्यम, बुट्टा बोम्मलू (Butta Bommalu), भामकल्पम ( Bhamakalpam), दप्पू (Dappu), तपेता गुल्लू (Tappeta Gullu,), लम्बाडी (Lambadi,), धीमसा (Dhimsa), कोलट्टम (Kolattam)

कर्नाटक यक्षगान, हुट्टारी, सुग्गी, कुनीथा, करगा, लाम्बी।
केरल कूरावारकली (Kuravarkali)।
बिहार जट– जटिन (Jat-Jatin), पनवारिया, बिदेसिया।
गुजरात गरबा, डांडिया रास, टिप्पनी जुरुन, भावई।
हरियाणा झूमर, फाग, डाफ, धमाल, लूर, गुग्गा, खोर, जागोर।
हिमाचल प्रदेश झोरा, झाली, छारही, धामन, छापेली, महासू, नटी, डांगी।
जम्मू कश्मीर रऊफ, हीकत, मंदजात, कूद डांडी नाच।
महाराष्ट्र लावणी, डिंडी (Dindi), काला (Kala), दहीकला दसावतार।
ओडिसा गोतिपुआ (Gotipua), छाउ, घुमूरा (Ghumura), रानाप्पा (Ranappa), संबलपुरी नृत्य।
पश्चिम बंगाल लाठी, गंभीरा, ढाली, जतरा, बाउल, छाऊ, संथाली डांस।
पंजाब भांगड़ा, गिद्दा, दफ्फ, धामल (Dhamal), दंकारा (Dankara)।
राजस्थान घूमर, गणगौर, झूलन लीला, कालबेलिया, छारी (Chari)।
तमिलनाडु कुमी, कोलट्टम, कवाडी अट्टम।
उत्तर प्रदेश नौटंकी, रासलीला, कजरी, चाप्पेली।
उत्तराखंड भोटिया नृत्य (Bhotia Dance), चमफुली (Chamfuli)और छोलिया (Chholia)
गोवा देक्खनी, फुग्दी, शिग्मो, घोडे, जगोर, गोंफ, टोन्या मेल (Tonyamel)
मध्य प्रदेश जवारा, मटकी, अडा, खाड़ा नाच, फूलपति, ग्रिदा नृत्य, सालेलार्की, सेलाभडोनी, मंच।
छत्तीसगढ़ गौर मारिया, पैंथी, राउत नाच, पंडवाणी, वेडामती, कपालिक, भारथरी चरित्र, चंदनानी।
झारखंड झूमर, जनानी झूमर, मर्दाना झूमर, पैका, फगुआ, मुंदारी नृत्य, सरहुल, बाराओ, झीटका, डांगा, डोमचक, घोरा नाच।
मणिपुर डोल चोलम, थांग टा, लाई हाराओबा, पुंग चोलोम, खांबा थाईबी, नूपा नृत्य, रासलीला।
मेघालय शाद सुक मिनसेइम, शाद नॉन्गरेम, लाहो।
मिज़ोरम छेरव नृत्य, खुल्लम, चैलम, च्वांगलाईज्वान, जंगतालम, सरलामकई/ सोलाकिया, तलंगलम।
नागालैंड रेंगमा ( Rengma), बांस नृत्य चंगी नृत्य (Changai Dance), आलूयट्टू (Aaluyattu)।
सिक्किम सिंघी छाम (Singhi Chaam) और याक छाम, तमांग सेलो (Tamang Selo), मारूनी नाच।
त्रिपुरा होजागिरी, गारिया, झूम।
लक्षद्वीप लावा, कोलकाली (Kolkali), परीचाकली (Parichakali)।