असम का काटी बिहू पर्व

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में अक्टूबर, 2022 को काटी बिहू (Kongali Bihu) पर्व मनाया गया।

  • काटी बिहू या कोंगाली बिहू (Kati Bihu) असमिया कैलेंडर में काटी माह के पहले दिन मनाया जाता है और आमतौर पर अक्टूबर के मध्य में पड़ता है।
  • काटी बिहू या कोंगाली बिहू से जुड़ी कई मान्यताएं और परंपराएं इसी खास बनाती हैं। अक्टूबर मास के आते-आते घरों में रखा अनाज खत्म होने लगता है, इसलिए असम के लोग इस दौरान अपने अनाज भंडारों, तुलसी के पास और धान के खेत के नजदीक मिट्टðी का दीपक जलाते हैं।

3 प्रकार के बिहू: असम में दो अन्य बिहू त्योहार मनाए जाते हैं- ‘भोगाली या माघ बिहू’ 13 या 14 जनवरी को मनाया जाता है तथा ‘रोंगाली या बोहाग बिहू’ 14 या 15 अप्रैल को मनाया जाता है। तीनों बिहू पर्व कृषि से जुड़े हुए हैं।

  • जहां कोंगाली या काटी बिहू, भोजन की कमी के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, वहीं रोंगाली या बोहाग बिहू, खुशी के उत्सव के रूप में तथा भोगाली या माघ बिहू, दावत के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

काटी बिहू का महत्व: यह त्यौहार असम के प्रत्येक किसान परिवार के लिए वर्ष के एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतीक है। काटी बिहू धान के पौधे के स्थान परिवर्तन (relocation) के समय मनाया जाता है।

  • काटी बिहू को कोंगाली (गरीब) बिहू भी कहा जाता है, क्योंकि अन्न भंडार आमतौर पर खाली होते हैं और साल के इस समय खाने के लिए बहुत कुछ नहीं होता है।

परंपराएं: इस बिहू को घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक या साकी (मोमबत्तियां) जलाकर मनाया जाता है।

  • आमतौर पर लोग अपने घरों के बाहर दीपक जलाते हैं और अपने पूर्वजों के स्वागत के लिए बांस से रास्ते बनाते हैं। अच्छी फसल के लिए लोग देवी लक्ष्मी और तुलसी के पौधे की भी पूजा करते हैं।