इसे भारत में ओमिक्रोन का पता लगाने के लिए विकसित किया गया है, जिसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् द्वारा मंजूरी प्रदान की गई।
इसके माध्यम से आरटी-पीसीआर परीक्षणों के दौरान नासोफिरिन्जियल (Nasopharyngeal)/ ओरोफरिन्जियल (Oropharyngeal) नमूनों में ओमिक्रोन का पता लगाया जा सकता है।
इसे टाटा मेडिकल एंड डायग्रोस्टिक्स द्वारा विकसित किया गया है।
वर्तमान में जीनोम अनुक्रमण के बाद ही ओमिक्रोन रोगियों का पता लगाया जा सकता है, लेकिन यह परीक्षण उस चरण को समाप्त करने में मदद करेगा और परीक्षण के दौरान ही ओमिक्रोन संक्रमण का पता लगाया जा सकेगा।