वैश्विक वैक्सीन गठबंधन ने वर्ष 2022-2025 के बीच अफ्रीका में पहला मलेरिया टीकाकरण संचालन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन में 160 मिलियन डॉलर की घोषणा की है।
मलेरिया टीके की पहली खुराक अफ्रीका के घाना, केन्या और मलावी में दी जाएगी। वर्ष 2019 में इन्हीं देशों में इस टीके का प्रायोगिक परीक्षण किया गया था।
मलेरिया प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है, जो संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छरों के काटने से फैलता है।
WHO की विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2021 के अनुसार वर्ष 2020 में विश्व भर में मलेरिया के अनुमानित 241 मिलियन मामले थे, जिसमें से 6,27,000 लोगों की मृत्यु हुई थी।
भारत में मलेरिया:
विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2021 के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में मलेरिया के 83 प्रतिशत मामले और इससे होने वाले सभी मृत्यु में लगभग 82 प्रतिशत मामले भारत में दर्ज किए गए हैं।
मलेरिया को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए भारत ने राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन रूपरेखा 2016-2030 लागू की है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2027 तक मलेरिया के स्थानीय मामलों को शून्य करना है। साथ ही वर्ष 2030 तक इसे पूरी तरह से समाप्त करना है।