हाल ही में, केंद्र सरकार ने विदेश व्यापार नीति (FTP) में कुछ बदलाव किए हैं। सरकार ने निर्यात को बढ़ाने हेतु अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए रुपये में भुगतान करने की अनुमति दी है।
FTP के तहत सरकार द्वारा निर्यात बढ़ाने के लिए इंसेंटिव्स (अलग-अलग प्रकार के प्रोत्साहन) दिए जाते हैं। इन्हें पाने के लिए सरकार द्वारा तय किए गए निर्यात दायित्व (Export Obligation) को पूरा करना होता है। ये लाभ और इंसेंटिव तभी दिए जाते हैं जब भुगतान पूर्ण परिवर्तनीय मुद्राओं (डॉलर, पाउंड, यूरो, येन) में होते हैं।
नए बदलाव के बाद अब ये इंसेंटिव निर्यात के लिए भारतीय रुपये में किए जाने वाले भुगतानों के लिए दिए जा सकते हैं।
भारतीय रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार निपटान (ITS) के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देश
आयातक और निर्यातक भारतीय रुपये में दर्ज प्राप्तियों तथा भुगतान के लिए अब अपने विशेष वोस्ट्रो खातों का उपयोग कर सकते हैं। ये खाते भागीदार देश के कॉरिस्पोंडेंस बैंक के साथ जुड़े होते हैं।
इन मामलों में भी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के प्रावधान लागू होंगे।
इनवॉयसिंग व्यवस्था के तहत आयात तथा निर्यात बिल में आयात-निर्यात की राशि को रुपये में दर्ज (इनवॉइस) किया जा सकता है। दो व्यापार सहयोगी देशों की मुद्राओं के बीच विनिमय दर को बाजार द्वारा ही निर्धारित किया जाएगा।