हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
इस पायलट प्रोजेक्ट में भाव लेने के लिए 9 प्रमुख बैंकों की पहचान की गई है। ये बैंक हैः स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, HDFC बैंक, ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, यस बैंक, IDFC फर्स्ट बैंक और HSBC।
इस पायलट प्रोजेक्ट के दौरान RBI सरकारी प्रतिभूतियों के भुगतान हेतु प्रत्येक बैंक के CBDC खाते में नियमित अंतराल पर डिजिटल मुद्रा जारी करेगा।
इस संबंध में CBDC पर एक कॉन्सेप्ट नोट भी जारी किया गया है। इस नोट में डिजिटल रुपये को बैंक नोट की परिभाषा में शामिल करने की बात कही गई है। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अधिनियम, 1934 में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा गया है।
कॉन्सेप्ट नोट का उद्देश्य: CBDCs के बारे में सामान्य रूप से और डिजिटल रुपये के पहले से तय किए गए फीचर्स के बारे में विशेष रूप से जागरूकता पैदा करना है।
इसमें भारत में CBDCs को जारी करने के उद्देश्यों, विकल्पों, लाभों और जोखिमों को बताया गया है। CBDC को ई-रुपी (डिजिटल रुपया) कहा जा रहा है।
कॉन्सेप्ट नोट के अनुसार, डिजिटल रुपये का डिजाइन परिस्थितियों और आवश्यकता के आधार पर तय किया जाएगा, ताकि यह वित्तीय एवं मौद्रिक स्थिरता के लक्ष्यों के अनुकूल हो ।
CBDC को दो रूपों में लाया जा सकता हैः
CBDC-खुदराः यह संभवतः सभी निजी क्षेत्रक, गैर-वित्तीय उपभोत्तफ़ाओं और व्यवसायों द्वारा उपयोग के लिए उपलब्ध होगी।
CBDC-थोकः यह सभी के लिए उपलब्ध नहीं होगी। इसे वित्तीय संस्थानों के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया जाएगा।
ई-रुपी को ‘टोकन आधारित’ या ‘खाता-आधारित’ बनाया जा सकता है।
खाता-आधारित प्रणाली के तहत CBDC के सभी धारकों के बैलेंस और लेन-देन के रिकॉर्ड को रखना अनिवार्य होगा।