वन्य प्राणियों के संरक्षण के उद्देश्य से 1972 में वन्य प्राणी अधिनियम बनाया गया, जिसके मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:
विशेष पेड़-पौधे को संरक्षण प्रदान करना।
जंगली पशु-पक्षियों के शिकार करने पर प्रतिबंध लगाना।
नेशनल पार्क, अभ्यारण्य (Sanctuaries) तथा जैव-संरक्षण के लिये विशेष क्षेत्रें को घोषित करना।
नेशनल पार्क, अभ्यारण्य इत्यादि का प्रबंधन करना।
केंद्रीय चिड़िया घर कमेटी का गठन करना।
शिक्षा एवं शोध कार्य के लिये तथा वन-पशु-पक्षियों के शिकार के लिये लाइसेंस जारी करना।
शिक्षा एवं शोध कार्य के लिये किसी विशेष वृक्ष, पौधे को उखाड़ने अथवा तोड़ने के लिये लाइसेंस जारी करना।
वन्य पशु-पक्षियों तथा उनके उत्पाद के व्यापार के लिये लाइसेंस जारी करना।
पेड़ पौधों को उगाने के लिए लाइसेंस देना, जिन पर आमतौर पर प्रतिबंध है।
अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों का संरक्षण करना।
इन नियमों के उल्लंघन करने वालों को दंडित करना।
जैव विविधाता अभिसमय (CBD)
जैव विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity- CBD), जैव विविधता के संरक्षण हेतु कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि है जो वर्ष 1993 से लागू है। इसके 3 मुख्य उद्देश्य हैं:
जैव विविधता का संरक्षण।
जैविक विविधता के घटकों का सतत् उपयोग।
आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत वितरण।