जैव-विविधाता संरक्षण अधिानियम, 2002

जैव-विविधता संरक्षण हेतु केंद्र सरकार ने 2000 में एक राष्ट्रीय जैव-विविधता संरक्षण क्रियान्वयन योजना शुरू की, जिसमें गैर सरकारी संगठनों, वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों तथा आम जनता को भी शामिल किया गया।

  • इसी प्रक्रिया में सरकार ने जैव विविधता संरक्षण कानून 2002 पास किया, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्ष 2002 में पारित इस कानून का उद्देश्य है-जैविक विविधता की रक्षा की व्यवस्था की जाए। उसके विभिन्न अंशों का टिकाऊ उपयोग किया जाए तथा जीव-विज्ञान संसाधन ज्ञान के उपयोग का लाभ सभी में बराबर विभाजित किया जाये।
  • अधिनियम में, राष्ट्रीय स्तर पर जैव-विविधता प्राधिकरण बनाने का भी प्रावधान है, राज्य स्तरों पर राज्य जैव विविधता बोर्ड स्थापित करने तथा स्थानीय स्तरों पर जैव-विविधता प्रबंधन समितियों की स्थापना करने का प्रावधान है, ताकि इस कानून के प्रावधानों को ठीक प्रकार से लागू किया जा सके।

जैवविविधाता अधिानियम, 2002: जैवविविधता अधिनियम, 2002 की धारा 37(1) के प्रावधान के अनुसार, राज्य सरकार स्थानीय निकायों के परामर्श से समय-समय पर इस अधिनियम के अंतर्गत जैवविविधता के महत्त्व के क्षेत्रों को सरकारी राजपत्र में अधिसूचित कर सकती है।

राष्ट्रीय जैव विविधाता प्राधिाकरण के अनुसार जैव-विविधाता संबंधिात सभी अधिानियम

  • वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
  • वन संरक्षण अधिनियम, 1980
  • राष्ट्रीय जैव-विविधता अधिनियम, 2002
  • वन अधिकार अधिनियम, 2006
  • राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम, 2010
  • पशु क्रूरता अधिनियम, 1960
  • सुरक्षा मानक अधिनियम 2006
  • मत्स्य अधिनियम, 1987
  • सीमा शुल्क अधिनियम, 1962
  • मसाला बोर्ड अधिनियम, 1986
  • समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1972
  • जल (रोकथाम एवं प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1974
  • जल (प्रदूषण नियंत्रण एवं रोकथाम) उपकर अधिनियम, 1977
  • जैव विविधता नियम, 2000