भारत-म्यांमार विवाद के मुख्य कारण

1967 के समझौतेः 1967 में दोनों देशों के मध्य अंतरराष्ट्रीय सीमा का औपचारिक रूप से निर्धारण एवं सीमांकन किया गया था, फिर भी दोनों राष्ट्रों को अलग करने वाली सीमा रेखा जमीनी स्तर पर लागू नहीं हुई है।

ड्रग्स के अवैध प्रवाहः भारत के चार पूर्वोत्तर राज्यों की म्यांमार के साथ साझा सीमाएं हैं। भारत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह सहित बंगाल की खाड़ी को भी म्यांमार के साथ साझा करता है।

  • ड्रग्स गोल्डन ट्रायंगल के सीमा के समीप उपस्थिति भारतीय क्षेत्र में ड्रग्स के अप्रबंधित अवैध प्रवाह की सुविधा प्रदान करती है।
  • मणिपुर के सीमावर्ती कस्बे मोरेह के माध्यम से हेरोइन का बड़ा हिस्सा भारत में प्रवेश करता है। इसमें स्थानीय विद्रोहियों का समूह सक्रिय रूप से शामिल हैं।
  • 1995 में भारतीय और म्यांमार की सेना ने मणिपुर, नागालैंड और असम से संबंध रखने वाले विद्रोहियों के सफाया के लिए ऑपरेशन गोल्डन बर्ड नामक संयुक्त अभियान चलाया था।

बाड़ का निर्माणः हालिया संदर्भ में भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों की समस्या की जांच के लिए, भारत सरकार ने वर्ष 2013 में भारत-म्यांमार सीमा पर बॉर्डर पिल्लर संख्या 79 से 81 के बीच के क्षेत्र को बाधित करने के लिए एक कार्यवाई की मंजूरी दी।

  • इस मंजूरी के कारण मणिपुर में विरोध प्रदर्शन हुए, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का मानना है कि म्यांमार की आपत्तियों के कारण 10 किलोमीटर की बाड़ का निर्माण भारतीय क्षेत्र में कई मीटर अंदर तक किया जा रहा है और इसके परिणामस्वरूप मणिपुर के एक बड़े हिस्से का म्यांमार में चले जाने की सम्भावना है। हालांकि विरोध प्रदर्शनों के बावजूद केन्द्र सरकार बाड़ निर्माण के कार्य को आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

संयुक्त राष्ट्र की नशीली दवाओं की स्थिति पर क्षेत्रीय सम्मेलन

  • 30 सितंबर से 1 अक्टूबर, 2019 के बीच ‘संयुक्त राष्ट्र की ड्रग्स एंड क्राइम- दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय’ (UNODC-ROSA) और मणिपुर सरकार द्वारा संयुक्त रूप से नशीली दवाओं की स्थिति पर क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
  • इस सम्मेलन का विषय, ‘अफगान अफीम की अवैध तस्करी तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों में नशीली दवाओं की स्थिति पर व्यापक दृष्टिकोण विकसित करना’ था।