भारत के लिए म्यांमार का महत्व

भारत के लिए भू-रणनीतिक महत्वः भारत, म्यांमार के साथ लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी में समुद्री सीमा को भी साझा करता है।

चार पूर्वोत्तर राज्य, नामतः अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम, म्यांमार के साथ सीमा साझा करते हैं।

  • इस प्रकार, यह भारत के लिए भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण है; क्योंकि यह भारत की ‘‘नेबरहुड फर्स्ट’’ नीति और ‘‘एक्ट ईस्ट’’ नीति के संदर्भ में अति विशिष्ट राष्ट्र है।

उप-क्षेत्रीय आर्थिक सहयोगः यह भारत से संलग्न एकमात्र आसियान (ASEAN) देश है। इसलिए इसे दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है तथा यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रीय सहयोग का एक प्रमुख घटक भी है।

  • इसके अतिरिक्त, म्यांमार ‘‘बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’’ (BIMSTEC) के साथ-साथ ‘‘मेकांग गंगा सहयोग’’ का भी एक महत्वपूर्ण सदस्य है। ऐसे में यह भारत की ‘‘एक्ट ईस्ट’’ नीति के संदर्भ में विशिष्ट स्थान रखता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा में सहयोगः म्यांमार ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने सम्मान की पुनर्पुष्टि की है तथा किसी भी विद्रोही समूह को भारत सरकार के विरुद्ध शत्रुतापूर्ण कृत्य के लिए म्यांमार की भूमि का उपयोग न करने देने की नीति का दृढ़तापूर्वक अनुपालन किया है।

भारतीय डायस्पोराः वर्ष 1852 में लोअर बर्मा में ब्रिटिश शासन के आरंभ होने के उपरांत म्यांमार में भारतीय समुदाय का आविर्भाव हुआ।

  • म्यांमार के विभिन्न हिस्सों में भारतीय मूल के लगभग 1.5-2.5 मिलियन लोगों के अधिवासित और कार्यरत होने का अनुमान है।