पैराडिप्लोमैसी (स्थानिक कूटनीति) को भारतीय नीति निर्माण प्रक्रिया के केंद्र-बिंदु में लाने का श्रेय वर्तमान की केंद्र सरकार को दिया जा सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाने का यह विचार नया नहीं है।
पैराडिप्लोमैसी की संकल्पना पहली बार 1990 में एक अमेरिकी विद्वान जॉन किनकैड ने की थी, जिन्होंने एक लोकतांत्रिक संघीय प्रणाली के भीतर स्थानीय सरकारों के लिए एक विदेश नीति की भूमिका की रूपरेखा बनाई थी।
अर्थ
विकास में योगदान
पैराडिप्लोमेसी संबंधी चिंताएं
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