संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार

संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद का विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है तथा विश्व शांति और विकास में इसने महती भूमिका का निर्वाह किया है, परन्तु बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य जिसमें वैश्विक व्यवस्था में अमेरिकी एकध्रुवीयता से लेकर बहुपक्षीय संस्थानों और बहुध्रुवीयता के उदय तक बड़े पैमाने हुए बदलाव ने इसकी कार्यप्रणाली और भूमिका में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया है ।

सुधार की आवश्यकता

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना में व्याप्त दोष को रेखांकित किया तथा कहा कि P5 देशों के विशेषाधिकारों से परे जाना और एक अधिक लोकतांत्रिक एवं प्रतिनिधिक सुरक्षा परिषद की तलाश करना आवश्यक है।

UNSC से संबंधित मुद्दे

  • पर्याप्त प्रतिनिधित्व का अभाव, क्योंकि 54 देशों के महाद्वीप अफ्रीका की अनुपस्थिति इसमें सर्वाधिक प्रासंगिक है।
  • भारत, जर्मनी, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे विश्व स्तर पर महत्त्वपूर्ण देशों को UNSC स्थायी सदस्यों की सूची में प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होना।
  • वीटो पावर का दुरुपयोग।
  • P5 देशों में से किसी की भी असंतुष्टि की स्थिति में परिषद आवश्यक निर्णय ले सकने की अक्षमता।
  • P5 देशों के मध्य भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता।
  • राज्य की संप्रभुता के लिये खतरा, अर्थात किसी भी राज्य की संप्रभुता को, यदि आवश्यक हो तो कार्रवाई के माध्यम सेअतिक्रमित किया जा सकता है।

भारत का पक्ष

  • भारत सुरक्षा परिषद् के अस्थायी और स्थायी दोनों ही तरह के सदस्यों की संख्या में बढ़ोत्तरी चाहता है।
  • भारत परिषद का विस्तार चाहता है, क्योंकि इससे सुरक्षा परिषद् ज्यादा प्रतिनिधिमूलक होगी और विश्व बिरादरी का ज्यादा समर्थन मिलेगा।
  • भारत सुरक्षा परिषद् के अस्थायी और स्थायी दोनों ही तरह के सदस्यों की संख्या में बढ़ोत्तरी चाहता है।

आगे की राह

  • वर्तमान में सुरक्षा परिषद वैश्विक समस्याओं पर एक तरह से निरर्थक चर्चा का मंच बनकर रह गई है।
  • यह यूक्रेन युद्ध, दक्षिण चीन सागर में चीन की मनमानी के मामले विश्व जनमत के समक्ष सामने आ चुका है। कुछ वैश्विक ताकतों की मनमानी ने सुरक्षा परिषद को एक तरह से असहाय और निरुपाय बना दिया है।
  • इसलिए इस परिषद् में सुधार की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता है। “महासभा एकमात्र ऐसा यूएन निकाय है, जिसके पास सुरक्षा परिषद में सुधार के सवाल के समाधान की तलाश करने का शासनादेश है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में 193 सदस्य देश हैं और इसे सम्पूर्ण यूएन प्रणाली का सर्वाधिक प्रतिनिधि अंग माना जाता है।