उद्देश्य : वित्तीय उत्पादों और सेवाओं में वृद्धि करना।
इस समिति ने हाल ही में भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) को पांच वर्ष पुराने कानून की सफलता का आकलन करने एवं इसके कार्यान्वयन में सुधार से सम्बन्धित अपनी रिपोर्ट को प्रस्तुत किया है।
प्रमुख सिफारिश :
दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2016 की सफलता का आकलन और इसके कार्यान्वयन में सुधार के लिए एक मानकीकृत ढांचे की स्थापना की सिफारिश की।
दिवालिया प्रक्रिया के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए भरोसेमंद रीयल-टाइम डेटा, डेटा बैंक शामिल होना चाहिए, जिसमें समय पर डेटा, लागत एवं पुनर्स्थापना (रिकवरी) दरों के साथ-साथ समष्टि अर्थशास्त्रीय (मैक्रोइकॉनॉमिक) संकेतक शामिल हों।
संहिता के मात्रत्मक और गैर-मात्रत्मक दोनों परिणामों का मापन कर उसकी निगरानी की जानी चाहिए।