जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 1978 एक निवारक निरोध (Preventive Detention) कानून है, इसके तहत किसी व्यक्ति को ऐसे किसी कार्य को करने से रोकने के लिये हिरासत में लिया जाता है, जिससे राज्य की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इस अधिनियम के तहत व्यक्ति को 2 वर्षों के लिये हिरासत में लिया जा सकता है।
यह कमोबेश राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के समान ही है,
जिसका प्रयोग अन्य राज्य सरकारों द्वारा नजरबंदी के लिये किया जाता है।
यह अधिनियम मात्र संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) या जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) द्वारा पारित प्रशासनिक आदेश से लागू होता है। साथ ही इस संबंध में आदेश पारित करने वाले अधिकारी को किसी भी तथ्य का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं होती है।
इस अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को हिरासत में रखना सख्त वर्जित है। साथ ही, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए।
यह कानून आतंकवादी गतिविधियों और गैर-कानूनी गतिविधियों से जुड़े मामलों से निपटने के लिए भी प्रावधान करता है।
जम्मू एवं कश्मीर में संदिग्ध उग्रवादियों या आतंकवादियों को सुरक्षित आश्रय, बच निकलने की सुविधा या सूचना प्रदान करने या उनके लिए एक संदेशवाहक के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति को ओवर ग्राउंड वर्कर कहा जाता है।