राष्ट्रीय सुरक्षा अधिानियम (NSA) 1980

NSA एक निवारक निरोध कानून है। निवारक निरोध के तहत भविष्य में किसी व्यक्ति को अपराध करने या अभियोजन से बचने से रोकने के लिये हिरासत में लिया जाना शामिल है।

  • संविधान का अनुच्छेद 22(3)(ब) राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था की स्थापना हेतु व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर निवारक निरोध और प्रतिबंध की अनुमति प्रदान करता है।
  • इसके अलावा अनुच्छेद 22 (4) के अनुसार निवारक निरोध के तहत हिरासत में लिये जाने का प्रावधान करने वाले किसी भी कानून के तहत किसी भी व्यत्तिफ़ को तीन महीने से अधिक समय तक हिरासत में रखने का अधिकार नहीं दिया जाएगा।
  • NSA के तहत अनुच्छेद 22 (5) के तहत प्रक्रियात्मक सुरक्षा दी गई है, जिसके तहत हिरासत में लिये गए सभी व्यक्तियों को एक स्वतंत्र सलाहकार बोर्ड के समक्ष प्रभावी प्रतिनिधित्व करने का अधिकार दिया गया है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारत में निवारक निरोध कानून की शुरुआत औपनिवेशिक युग के बंगाल विनियमन-III 1818 (Bengal Regulation-III, 1818) से मानी जाती है।
    • इस कानून के माध्यम से सरकार, किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रियाओं से गुजरे बिना सीधे ही गिरफ्रतार कर सकती थी।
    • एक सदी बाद ब्रिटिश सरकार ने रोलेट एक्ट, 1919 (Rowlatt Acts-1919) को लागू किया, जिसके तहत बिना किसी परीक्षण (Trial) के संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्रतार करने की अनुमति दी गई।
    • स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1950 में निवारक निरोधक अधिनियम (Preventive Detention Act-PDA) बनाया गया, जो 31 दिसंबर, 1969 तक लागू रहा।
    • वर्ष 1971 में आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (Maintenance of Internal Security Act-MISA) लाया गया, जिसे वर्ष 1977 में जनता पार्टी सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया। बाद में कांग्रेस सरकार द्वारा पुनः NSA लाया गया।