सिंथेटिक बायोलॉजी, आनुवंशिक अनुक्रमण (Genetic Sequencing), आनुवंशिक संपादन (Gene Editing) तथा संशोधन (Gene Modification) का उपयोग करके अप्राकृतिक जीवों (Unnatural Organisms) या कार्बनिक अणुओं (Organic Molecules) को बनाने से संबंधित विज्ञान को संदर्भित करता है। जीव विज्ञान की यह शाखा वैज्ञानिकों को उपयोगी प्रयोजनों के लिए डीएनए के नए अनुक्रमों को डिजाइन और संश्लेषित करने में सक्षम बनाती है।
अनुप्रयोग
फार्मास्युटिकल उद्योग में: इसकी सहायता से प्रयोगशाला में विभिन्न रोगों के उपचार के लिए टीकों और दवाओं का विकास किया जा सकता है। सिंथेटिक बायोलॉजी का उपयोग मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाले आर्टीमिसिनिन (Artemisinin) के उत्पादन में किया जाता है। इसके अतिरिक्त कैंसर के इलाज में प्रयोग होने वाली कार टी सेल थेरेपी (CAR T-cell therapy) से संबंधित प्राकृतिक यौगिकों को बनाने में भी सिंथेटिक बायोलॉजी का उपयोग किया जाता है।
चिकित्सा अनुप्रयोगः इसके द्वारा वैसी जन्मजात बीमारियों को ठीक किया जा सकता है, जो जीन में गड़बड़ी के कारण होती हैं। इसकी सहायता से रोग उत्पन्न करने वाले जीन को बदलकर सुरक्षात्मक उपाय किए जा सकते हैं।
कृषि उद्योगः सिंथेटिक बायोलॉजी का प्रयोग कर पौधों में इच्छित सुधार के लिए अन्य जीवों से प्राप्त जीन को जोड़ा जा सकता है। इस प्रकार से निर्मित उत्पाद में वे सभी अपेक्षित गुण प्राप्त किये जा सकते हैं, जो मानव की आवश्यकता की पूर्ति करते हों। इसकी सहायता से अनाज का उत्पादन बढ़ाकर कुपोषण एवं भूख की समस्या का भी समाधान किया जा सकता है।
चुनौतियां
नए प्रकार के जीव का विकासः सिंथेटिक बायोलॉजी के माध्यम से ऐसे जीवों का विकास किया जा सकता है, जो सर्वथा नए एवं विलक्षण हों। 2002 में, संयुत्तफ़ राज्य अमेरिका के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला मे पहली बार ‘वायरल जीनोम’ को संश्लेषित किया था।
जैव आतंकवादः जैविक हथियारों को विकसित करने के लिए संश्लेषित जीव विज्ञान का उपयोग किया जा सकता है। समाज के कुछ निहित स्वार्थ वाले व्यत्तिफ़ या संस्थाएं, दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए संश्लेषित जीव विज्ञान का उपयोग कर सकती हैं।
उचित विनियमन का अभावः वर्तमान में सिंथेटिक बायोलॉजी के संबंध में सभी तकनीकी पक्षों से संबंधित विनियामक तंत्र का अभाव है। इस कारण इससे संबंधित विनियमन की समस्या उत्पन्न होती है। साथ ही इस प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग और अनपेक्षित परिणामों के सन्दर्भ में जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी कठिनाई उत्पन्न होती है।