भारत में न्यूमोकोकल रोग

न्यूमोकोकल रोग स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया (जिसे न्यूमोकोकस भी कहा जाता है) नामक जीवाणु के कारण होने वाली बीमारियों के समूह को दिया गया नाम है।

भारत में न्यूमोकोकल रोग

  • विश्व स्तर पर और भारत में न्यूमोकोकल बीमारी पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मौत का सबसे बड़ा कारण है? यह न्यूमोकोकल रोग से सुरक्षा प्रदान करती है। जो बच्चों और वयस्कों दोनों को न्यूमोकोकल रोग से बचा सकती है।
  • यह वैक्सीन न्यूमोकोकी कुल (Pneumococci Family) के कई जीवाणुओं के मिश्रण से तैयार की गई है, जिन्हें निमोनिया का कारण माना जाता है, इसलिये वैक्सीन के नाम में ‘कॉन्जुगेट’ शामिल है। छोटे बच्चों को गंभीर निमोनिया रोग और मृत्यु होने का उच्च जोखिम होता है।
  • जीवन के पहले 2 वर्षों के दौरान बच्चों में निमोनिया से जुड़ी 80% से अधिक मौतें होती हैं। निमोनिया हर जगह बच्चों और परिवारों को प्रभावित करता है, लेकिन दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका में विकासशील दुनिया में सबसे अधिक प्रचलित है। निमोनिया दुनिया भर में पांच वर्ष से कम उम्र के किसी भी अन्य संक्रामक रोग की तुलना में अधिक बच्चों को मार रहा है।

कारण

  • निमोनिया कई संक्रामक एजेंटों के कारण होता है, जिनमें वायरस, बैक्टीरिया और कवक शामिल हैं।
  • स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया-बच्चों में बैक्टीरियल निमोनिया का सबसे आम कारण;
  • हिब-बैक्टीरियल निमोनिया का दूसरा आम कारण;
  • रेस्पिरेटरी सिंकिटियल वायरस-निमोनिया का सबसे आम वायरल कारण है;
  • न्यूमोसिस्टिस जीरोवेसी-मानव इम्यूनोडिफीसिएन्सी वायरस (एचआईवी) से संक्रमित शिशुओं में निमोनिया से होने वाली सभी मौतों में से कम से कम एक-चौथाई के लिए जिम्मेदार है।
  • न्यूमोकोकल संक्रमण से मेनिन्जाइटिस, सेप्टीसीमिया और निमोनिया जैसी गंभीर आक्रामक बीमारियां हो सकती हैं, साथ ही हल्के लेकिन अधिक सामान्य बीमारियां जैसे साइनसाइटिस और ओटिटिस मीडिया हो सकती है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बचपन के प्रतिरक्षण कार्यक्रम की दुनिया में पीसीवी को शामिल करने की सिफारिश की है।
  • न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) सरकार द्वारा 2017 में भारत के सबसे अधिक प्रभावित पांच राज्यों बिहार, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से शुरु की गई थी। इसके बाद, पूरे देश में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत पीसीवी का विस्तार किया गया है।
  • पीसीवी अब भारत के सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम (यूआईपी) का एक अभित्र अंग है और पूरे जन्म समूह के लिए निःशुल्क उपलब्ध है।