चेन्नई-व्लादिवोस्टॉक समुद्री मार्ग

भारत पूर्वोत्तर एशिया और पश्चिम प्रशांत क्षेत्र से जोड़ने वाले एक प्रमुख समुद्री मार्ग की स्थापना के साथ ही एक बड़ी कनेक्टिविटी पहल की शुरुआत करने जा रहा है। यह समुद्री मार्ग चेन्नई और व्लादिवोस्टॉक (Vladivostok) के मध्य एक प्रत्यक्ष शिपिंग लिंक (shipping link) के रूप में होगा। यह एशिया और अफ्रीका को जोड़ने वाले चीन के महत्त्वाकांक्षी समुद्री सिल्क मार्ग (Maritime Silk Route -MSR) के मध्य से होकर गुजरेगा। यह प्रस्तावित समुद्री मार्ग (जिसे गलियारे में बदला जा सकता है) हिन्द-जापान प्रशांत महासागर को हिन्द महासागर से जोड़ेगा। समुद्री सिल्क मार्ग चीन के वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट का ही एक भाग है, जो कि सड़क, नौवहन और रेल लिंक के माध्यम से सम्पूर्ण एशिया को जोड़ेगा।

फार ईस्ट क्षेत्र

रूस का यह सुदूर-पूर्व क्षेत्र बैकाल झील और प्रशांत महासागर के बीच स्थित एक बड़ा भू-भाग है। इस क्षेत्र की दक्षिणी सीमा मंगोलिया, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया से मिलती है। उत्तर-पूर्व में इसकी समुद्री सीमा जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ लगती है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधन जैसे खनिज, तेल, गैस के मामले में सम्पन्न है। इसके अलावा रूस के लगभग 30% जंगल भी इसी क्षेत्र में आते हैं।


एक्ट फार ईस्ट पॉलिसी

अपनी रूस यात्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के लिए अपनी एक नई नीति का ऐलान किया। रूस से रिश्तों को और अधिक मजबूत करने के लिये ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ की तर्ज पर प्रधानमंत्री द्वारा ‘एक्ट फार ईस्ट पॉलिसी’ की शुरुआत की गई। यह मंच रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र में व्यापार के विकास तथा निवेश के अवसरों पर केंद्रित है। इसी के साथ भारत ने रूस के पूर्वी हिस्से में विकास के लिए एक अरब डॉलर का ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ देने की घोषणा भी की।

  • इस क्षेत्र के भू-रणनीतिक महत्त्व को देखते हुए भारत ने वर्ष 1992 में व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) में वाणिज्य दूतावास की शुरुआत की थी। भारत वह पहला देश है, जिसने व्लादिवोस्तोक में इस प्रकार का कदम उठाया था।
  • भारत के इस निर्णय को चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स पॉलिसी’ (String of Pearls Policy) के काउंटर के रूप में भी देखा जा सकता है।