केंद्रीय निगरानी समिति

देश भर में 350 से अधिक नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक राष्ट्रीय योजना तैयार करने व उसे लागू करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने एक ‘केंद्रीय निगरानी समिति’ (Central Monitoring Committee) का गठन किया गया है।

  • इन नदियों के प्रदूषण ने जल व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

कार्यः केंद्रीय निगरानी समिति राज्यों की ‘नदी कायाकल्प समितियों’ (River Rejuvenation Committees) के साथ समन्वय करेगी। इसके अतिरिक्त समय-सीमा, बजटीय तंत्र और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए कार्य योजनाओं के निष्पादन की देखरेख भी करेगी।

लेड प्रदूषणः विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष अनुमानित 9 लाख लोगों की मौत शीशा से होने वाले प्रदूषण के कारण होती है, यह संख्या कम या ज्यादा हो सकती है।

  • पहले लेड प्रदूषण का स्रोत लेड वाले पेट्रोल था, जिसे लेड रहित पेट्रोल में बदल दिया गया था।
  • लेड एक्सपोजर के अन्य स्रोतों में लेड-एसिड बैटरी और प्रदूषण नियंत्रण के बिना ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, लेड-दूषित मसाले, लेड लवण के साथ मिट्टी के बर्तन एवं पेंट तथा अन्य उपभोक्ता उत्पादों में लेड शामिल होना है।
  • अनुमान है कि विश्व भर में 80 मिलियन से अधिक बच्चों में (अकेले भारत 27.5 मिलियन) ‘यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ द्वारा स्थापित 3.5 ग्राम/डीएल मानक से अधिक रक्त लेड सांद्रता है।