सामाजिक पूंजी के विकास की संभावनाएं

सामाजिक पूंजी (Social Capital) मानव अंतर्क्रिया के परिणामस्वरूप निर्मित सामाजिक नेटवर्कों के मूल्य से संबंधित है। ये सामाजिक नेटवर्क पारस्परिक विश्वास तथा निश्चित मानदंडों पर आधारित होते हैं तथा सभी सदस्यों को लाभ प्रदान करते हैं। मनुष्यों का सहयोगी व्यवहार सामाजिक पूंजी के निर्माण का आधार है।

सामाजिक-आर्थिक विकास में भूमिका

  • सामाजिक पूंजी को वर्तमान में विकास की प्रक्रिया के अभिन्न अंग के रूप में स्वीकार किया जा चुका है। ऐसे कई उदाहरण उपलब्ध हैं, जिनमें सामाजिक पूंजी का निम्न स्तर आर्थिक तथा समाज कल्याण नीतियों की विफलता के लिए उत्तरदायी रहा है।
  • भारत में समावेशी विकास तथा सामाजिक-आर्थिक न्याय के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सामाजिक पूंजी अत्यंत आवश्यक तत्व है। सामाजिक पूंजी किसी समाज की शत्तिफ़ तथा एकजुटता का प्रतिबिंब है।
  • जब समाज अच्छी तरह से जुड़े होते हैं तथा अत्यधिक भरोसेमंद होते हैं, अर्थव्यवस्था से लेकर लोकतंत्र तक सभी क्षेत्रें में इसके सकारात्मक परिणाम देखे जा सकते हैं।
  • लॉकडाउन शुरू होने के दो महीने बाद बच्चों की स्कूली शिक्षा ऑनलाइन मोड में प्रारंभ हुई। शिक्षकों को ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के लिए कहा गया। उन्हें समुदाय में ही 5-6 बच्चों के छोटे समूहों में कुछ आमने-सामने कक्षाएं संचालित करने के लिए गरीब समुदायों के गांवों का दौरा करने के लिए भी कहा गया था।

विकासशील देशों के संबंध में सामाजिक पूंजी का महत्व

  • उभरती विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में संस्थागत रित्तिफ़यों (Institutional Vacuum) एवं व्यापक संसाधन बाधाओं जैसी चुनौतियों तथा बाजार उदारीकरण व तीव्र आर्थिक विकास जैसी प्रवृत्तियों के कारण विकास में सामाजिक नेटवर्कों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
  • उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अधिकांश व्यवसाय छोटे पैमाने के होते हैं और निम्न से मध्यम आय वाले परिवारों के स्वामित्व में होते हैं।
  • इसके अलावा, ऐसे परिवार के स्वामित्व वाले छोटे व्यवसायों में, व्यावसायिक लक्ष्यों को आम तौर पर सामाजिक लक्ष्यों के साथ जोड़ा जाता है।
  • विकसित अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित औपचारिक संस्थान व्यावसायिक गतिविधियों के लिए श्रम और पूंजी संसाधनों के प्रभावी प्रवाह की सुविधा प्रदान करते हैं।

भारत में विकास की संभावनाएं

  • हालांकि सामाजिक पूंजी के निर्माण में बहुधा सरकार से अधिक धर्म, परंपरा, साझा ऐतिहासिक अनुभव और अन्य कारकों की भूमिका होती है फिर भी राज्य यानी सरकार सक्रिय रूप से किसी विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति के लिए सामाजिक पूंजी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैै।