भारत के मानव विकास को सुनिश्चित करने के लिये प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है क्योंकिनवीनतम मानव विकास सूचकांक में भारत 191 देशों में 132वें स्थान पर है।
लक्ष्य
निपुण भारत पहल: वर्ष 2021 में शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने बेहतर समझ और संख्यात्मकता ज्ञान के साथ शिक्षा में प्रवीणता के लिये राष्ट्रीय पहल –निपुण (National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy- NIPUN) की शुरूआत की।
शिक्षाकर्मी प्रोजेक्ट: वर्ष 1987 में राजस्थान के दूर-दराज के गांवों में शिक्षकों की अनुपस्थिति से निपटने के लिये स्कूलों में शिक्षाकर्मी प्रोजेक्ट शुरू किया गया था।
बिहार शिक्षा परियोजना: 1990 के दशक में शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण को बढ़ावा देना था।
लोक जुम्बिश: यह सभी के लिये शिक्षा हेतु एक जन आंदोलन था जिसे वर्ष 1992 में राजस्थान में शुरू किया गया था। इसने विशेष रूप से आदिवासी जिलों में नवाचारों पर बल दिया था
जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम: इस कार्यक्रम को वर्ष 1994 में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को सार्वभौमिक बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
सर्व शिक्षा अभियान: वर्ष 2001 में प्रारंभिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के उद्देश्य से इस अभियान को शुरू किया गया था यह स्कूल के बुनियादी ढांचे, शौचालय की उपलब्धता, स्वच्छ जल तक पहुँच और पाठ्यपुस्तक की उपलब्धता में सुधार कर स्कूल की नामांकन भागीदारी को बढ़ाने में सहायता की है।
न्यायिक निर्णय: उन्नी कृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य वाद (1993) में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लियेशिक्षा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।
आगे की राह: