​आधारभूत शिक्षण अध्ययन 2022

हाल ही में केन्द्रीय शिक्षा मंत्रलय और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् द्वारा संयुत्तफ़ रूप से आधारभूत शिक्षण अध्ययन 2022 शीर्षक से एक अध्ययन किया गया।

उद्देश्यः बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान में बेंचमार्क प्राप्त करना है।

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में वर्ष 2025 तक सभी बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान विकसित करने को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई है।
  • बुनियादी साक्षरता कौशल के मापदंड में शामिल हैः
    • भाषा को सुनकर समझने की क्षमता,
    • भाषा को पढ़कर समझने की क्षमता,
    • लिखे हुए पाठ को समझने के साथ ही उसे प्रवाहपूर्ण तरीके से पढ़ने की क्षमता आदि।
  • इस अध्ययन के तहत पूरे भारत में 10,000 स्कूलों के कक्षा तीन के लगभग 86,000 बच्चों के लर्निंग स्तर का आकलन किया गया है। यह एकमात्र ऐसा अध्ययन है, जो 20 अलग-अलग भाषाओं में किया गया है।

अध्ययन से सम्बंधित प्रमुख तथ्य

संख्यात्मक ज्ञान के संबंध में

  • 11 प्रतिशत छात्रें के पास अपनी कक्षा के स्तर का बुनियादी कौशल नहीं था, 37 प्रतिशत छात्रें के पास सीमित कौशल था।
  • 10 प्रतिशत छात्रें के पास बेहतर कौशल था।

नोटः अपनी कक्षा के स्तर के सबसे बुनियादी पाठों एवं सवालों को हल नहीं कर सकने के मामले में 29 प्रतिशत छात्रें के साथ तमिलनाडु में छात्रें की संख्या सबसे अधिक है।

साक्षरता के संबंध में (अंग्रेजी में)

  • 15 प्रतिशत छात्रें में बुनियादी कौशल तक की कमी थी, 30 प्रतिशत छात्रें के पास सीमित कौशल था, 34 प्रतिशत छात्रें के पास थोडा बेहतर कौशल था।

अन्य भारतीय भाषाओं में

  • बुनियादी कौशल की कमी वाले छात्रें का प्रतिशत निम्नलििऽत थाः
    • हिंदी में 21 प्रतिशत
    • मराठी में 17 प्रतिशत
    • गुजराती में 17 प्रतिशत
    • बंगाली में 20 प्रतिशत