​राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षणॉ 2021

यह सर्वेक्षण अखिल भारतीय स्तर पर 12 नवंबर, 2021 को स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (शिक्षा मंत्रलय के अंतर्गत) द्वारा आयोजित किया गया।

  • इसका संचालन CBSE तथा इसकी रूपरेखा और उपकरण NCERT द्वारा तैयार किया गया है।
  • यह सर्वेक्षण तीन वर्ष में एक बार होता है, जिसमें कक्षा 3, 5, 8 और 10 के बच्चों की अधिगम, यानी लर्निंग क्षमता का व्यापक मूल्यांकन करके देश में स्कूली शिक्षा प्रणाली की स्थिति का आकलन किया जाता है।
  • यह सर्वेक्षण छात्रें से सम्बंधित मानकीकृत सर्वेक्षण का प्रबंधन करके और स्कूल के वातावरण, शिक्षण प्रक्रियाओं एवं छात्रवास जैसे प्रासंगिक पृष्ठभूमि चरों और कारकों पर जानकारी एकत्र करके प्रणाली स्तरीय फीडबैक प्रदान करता है।
  • यह रिपोर्टिंग हेतु जिले को इकाई के रूप में मानकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के निष्कर्ष प्रदान करता है। पिछला सर्वेक्षण वर्ष 2017 में आयोजित किया गया था।
  • शामिल किए गए स्कूलः सरकारी स्कूल (केंद्र सरकार और राज्य सरकार); सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल और निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल।
  • शामिल किए गए विषयः
    • कक्षा 3 और 5 के लिए भाषा, गणित और पर्यावरण विज्ञान।
    • कक्षा 8 के लिए भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान।
    • कक्षा 10 के लिए भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी।

सर्वेक्षण से सम्बंधित प्रमुख तथ्य

समग्र रूप से

भाषा और गणित सहित लगभग सभी विषयों में स्कूली छात्रें के अधिगम स्तर में गिरावट आई है, क्योंकि उन्हें बड़ी कक्षाओं में प्रमोट कर दिया गया था।

लिंग वार स्थिति

उन राज्यों में और संघ राज्यक्षेत्रें की संख्या में उल्लेऽनीय वृद्धि हुई, जहां लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों की तुलना में बेहतर था।

राज्यवार स्थित

पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जिनका स्कोर राष्ट्रीय स्कोर से अधिक है। दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हैं।

श्रेणी वार स्थिति

अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और जनजाति श्रेणियों के छात्रें का प्रदर्शन सामान्य वर्ग के छात्रें की तुलना में कम रहा है।

अन्य

18 प्रतिशत बच्चों की माताएं पढ़-लिऽ नहीं सकती,

7 प्रतिशत शिक्षकों की अनुपस्थिति का सामना कर रहे हैं।

78 प्रतिशत छात्रें को महामारी के दौरान घर पर सीखना कठिन लगा और 24 प्रतिशत के पास घर पर डिजिटल उपकरणों तक पहुंच की कमी रही