इसकी स्थापना नस्लीय एवं धार्मिक चरमपंथ से निपटने, आतंकवाद से मुकाबला करने तथा व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने हेतु किया गया था। यह संगठन सदस्य देशों के मध्य सहयोग एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ नशील पदार्थों की तस्करी के रोकथाम में सहयोग प्रदान करता है। साथ ही आतंकवाद की रोकथाम और परस्पर सैन्य सहयोग स्थापित करते हुए साइबर सुरक्षा के ऽतरे से निपटता है। इस संगठन में शामिल देशों की आबादी दुनिया की आबादी का 42% तथा विश्व जीडीपी का 20% है। वर्ष 2017 में भारत और पाकिस्तान को इस संगठन के स्थायी सदस्य के रूप में दर्जा प्रदान किया गया।