राष्ट्रीय सतत हिमालय पारितंत्र मिशन

हिमालय भारत के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है- सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से हिमालय पारितंत्र में लगभग 51 मिलियन लोग हैं, जो पहाड़ी कृषि कार्य करते हैं।

  • हिमालय पारितंत्र प्राकृतिक कारणों, मानवजनित उत्सर्जन से संबंधित कारणों और आधुनिक समाज के विकासात्मक प्रतिमानों के कारण परिवतर्नों के प्रभावों के प्रति तेजी से कमजोर हो गया है।
  • हिमालयन पारितंत्र तंत्र को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय मिशन को सभी संभावित हितधारकों को शामिल करके ऐसे सभी मुद्दों को समग्र और समन्वित तरीके से संबोधित करने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया है।
  • मिशन का सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक उद्देश्य हिमालय पारितंत्र की स्वास्थ्य स्थिति का लगातार आकलन करना और नीति निकायों को उनके नीति-निर्माण कार्यों में सक्षम बनाना और भारतीय हिमालयी क्षेत्र में राज्यों की सहायता करना है, ताकि वे चुने गए कार्यों को सतत् विकास के लिए लागू कर सकें।

ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्टः ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ काम करने के लिए गठित किया गया था, ताकि वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की वृद्धि को रोका जा सके। इसका उद्देश्य वैश्विक कार्बन चक्र की समझ विकसित करना है।

नेट जीरो उत्सर्जन

‘नेट जीरो उत्सर्जन’ से तात्पर्य है सभी मानवजनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (जैसे जीवाश्म-ईंधन वाले वाहनों और कारखानों से) को यथासंभव शून्य के करीब लाया जाना चाहिये। दूसरा, किसी भी शेष GHGs को कार्बन को अवशोषित (प्राकृतिक और कृत्रिम सिंक के माध्यम से) कर (जैसे- जंगलों की पुनर्स्थापना द्वारा) संतुलित किया जाना चाहिये। इस तरह मानवजनित कार्बन न्यूट्रल होगा और वैश्विक तापमान स्थिर होगा।