वर्ष, 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में निजता को व्यक्ति का मौलिक अधिकार (Fundamental Right) माना था। तब डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिये नौ जजों की संविधान पीठ ने सामूहिक सहमति से फैसला दिया था।
न्यायालय ने यह निर्देश दिया था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता यानी निजता का अधिकार है।
जस्टिस के. एस. पुत्तुस्वामी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के अपने निर्णय में निजता को मौलिक अधिकार तो माना, लेकिन यह भी कहा कि यह अधिकार निरंकुश और असीमित नहीं है।