लोन वुल्फ़ आतंकवाद

लोन-वुल्फ अटैक यानी ऐसा घातक हमला, जिसे एक आतंकी बिना किसी के सहयोग के अकेले ही अंजाम देता है। इस तरह के हमले आतंकवाद के नए चेहरे के रूप में सामने आए हैं और यह आतंकवाद-रोधी अध्ययनों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।

चुनौतियां

अप्रत्याशित प्रकृतिः लोन वुल्फ आतंकी गतिविधियों और उनके द्वारा किए जाने वाले हमलों को अप्रत्याशित तरीके से अंजाम दिया जाता है। इसके कारण आतंकवाद-रोधी एजेंसियों, पुलिस और खुफिया संगठनों के लिए इस तरह की गतिविधियों व हमलों से निपटना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

इंटरनेट का उपयोगः कट्टरता, लोन वुल्फ आतंकवादी को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कट्टरता को ज्यादातर ऑनलाइन माध्यम से प्रचारित किया जाता है। इसके अलावा, इंटरनेट लोन वुल्फ को अपनी पहचान गुप्त बनाए रखते हुए संवाद स्थापित करने में भी सक्षम बनाता है।

लोन वुल्फ हमलों का आसानी से संचालनः लॉजिस्टिक की दृष्टि से इस तरह के हमलों का संचालन सरल होता जा रहा है।

  • लोन वुल्फ कॉपी-कैट (नकल करना) व्यवहार को प्रोत्साहित करते हैं। ये अन्य अलग-थलग युवाओं के लिए रोल मॉडल बन जाते हैं। इससे बैंड बैंगन हमलों को बढ़ावा मिलता है।

भारत द्वारा उठाए गए कदम

  • गैर-कानूनी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 {Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967}: यह अधिनियम अन्य विषयों के साथ-साथ आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए विशेष उपबंध करता है।
  • सरकार ने नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) का गठन किया है। यह एजेंसी देश में एक प्रमुख आतंकवाद रोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है। नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड या नेटग्रिड 113 का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य देश की आतंकवाद रोधी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक प्रदान करना है।
  • गृह मंत्रलय के अंतर्गत आतंकवाद रोधी एवं कट्टरवाद-रोधी प्रभाग तथा साइबर एवं सूचना सुरक्षा प्रभाग की स्थापना की गई है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को कट्टरता से निपटने हेतु नए कार्यक्रम विकसित करने के लिए संवैधानिक और कानूनी अधिकार प्रदान किए गए हैं।
  • राज्य सरकारों की ओर से परामर्श पहले संचालित की जा रही है, जैसे- केरल का ऑपरेशन-पिजना।