कोप-27

यूएनएफसीसीसी (UNFCCC) यानि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क अभिसमय का COP-27 सम्मेलन 7-18 नवंबर 2022 के मध्य, मिस्र के शर्म-अल-शेख मे संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन को प्रमुख संकट मानते हुए वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने के साथ-साथ क्षति के समाधान को अधिकारिक तौर पर एजेंडे में शामिल किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट, 2022 (Adaptation Gap Report- 2022) के अनुसार- अनुकूलन योजना, वित्तपोषण और कार्यान्वयन की दिशा में किये जा रहे वैश्विक प्रयास दुनिया भर में कमजोर समुदायों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बढ़ते जोखिमों के अनुकूलन हेतु सक्षम करने के लिये पर्याप्त नहीं हैं।
  • वैश्विक अनुसंधानों के अनुसार, यदि कार्बन उत्सर्जन की वर्तमान दर निरंतर रूप से जारी रही तो इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान 3°C से ज्यादा बढ़ सकता है।
  • ग्लोबल वार्मिंग के कारण बाढ़, सूखे और बढ़ते समुद्री स्तर जैसी चरम जलवायु घटनाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। हाल में बाढ़ के कारण जहां एक तरफ पाकिस्तान का 1/3 हिस्सा जलमग्न हो गया था, वहीं केन्या के मकुनी काउंटी में विनाशकारी सूखा पिछले तीन साल से अधिक समय से फैला हुआ है।
  • C0P-27 में भागीदार रहे विश्व के प्रमुख राष्ट्रों द्वारा निम्नलिखित कदम उठाने पर सहमति बनी -