उपासना स्थल अधिनियम, 1991

‘उपासना स्थल अधिनियम, 1991’ सितंबर 1991 में पारित किया गया था। इस अधिनियम की धारा 3 के तहत किसी पूजा स्थल या उसके एक खंड को अलग धार्मिक संप्रदाय के पूजा स्थल में बदलने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

  • यह अधिनियम राज्य को एक सकारात्मक दायित्व भी प्रदान करता है कि वह स्वतंत्रता के समय मौजूद प्रत्येक पूजा स्थल की धार्मिक विशेषता को बनाए रखे।
  • इस अधिनियम के प्रावधान उन प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारकों तथा पुरातात्विक स्थलों और अवशेषों पर लागू नहीं होंगे जिन्हें प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 द्वारा संरक्षित किया गया है। सभी धर्मों में समानता बनाए रखने और संरक्षित करने के लिये विधायी दायित्व राज्य की एक आवश्यक धर्मनिरपेक्ष विशेषता (Secular Feature) है, यह भारतीय संविधान की मूल विशेषताओं में से एक है।
  • यह अधिनियम किसी भी पूजा स्थल पर लागू नहीं होता है, जो एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक या प्राचीन स्मारक हो अथवा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (Archaeological Sites and Remains Act, 1958) द्वारा कवर एक पुरातात्विक स्थल है।
  • अधिनियम की धारा 6 में अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ अधिकतम तीन वर्ष की कैद का प्रावधान है।